10 May 2019

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिल्ली में यह कहे जाने के बाद कि राजीव जी ने ससुराल वालों के साथ आइएनएस युद्धपोत से मनाई थी १० दिनों की छुट्टियां तो राजनीतिक मामाओं की चर्चा राजनीतिक गलियारे में हो रही है।
राजीव गांधी द्वारा आईएनएस विराट द्वारा यात्रा कर छुट्टियां मनाने के समय अपनी इटालवी रिश्तेदार विशेषकर मामा क्वात्रोची की कथित उपस्थिति को लेकर उस समय विशेष चर्चा रही  क्योंकि यह मामा बोफोर्स घोटाले में खलनायक की भूमिका अदा कर रहा था।
अभी इसी भूमिका में एक दूसरे मामा क्रिस्चियन मिशेल अगस्ता वेस्टलैंड चापर घोटाले में अभियुक्त है जिसकी पैरवी कांग्रेस के एक नेता वकील जोसेफ कर रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंंत्री राजीव गांधी द्वारा अपने व्यस्त कार्यक्रम से विराम लेने में कुछ भी गलत नहीं है।
१९८७ में दुनिया के सर्वोच्च नेताओं मिखाइल गोर्बाचेव काला सागर सी बीच समुद्र तट की ओर सप्ताह के लिये, रोनाल्ड रीगन अपने सांता बारबरा क्रड्डठ्ठष्द्ध के लिये छुट्टियों का आनंद लेने गये थे। यदि उन्हीं का उस समय राजीव जी ने भी अनुकरण किया तो उसमें गलत कुछ भी नहीं।
राहुल गांधी भी अपना जन्मदिन मनाने, छुट्टियां मनाने इटली तथा अन्य स्थानों पर जाते रहे हैं। इसमें भी कोई आपत्ति कैसे कर सकता है? यह उनका अधिकार है।
यहॉ ऊपर मिखाइल गोर्बाचेव का नाम अनायास गया है। गोर्बाचेव सोवियत संघ के विघटन के जिम्मेदार और सोवियत संघ के अंतिम शासक उसी प्रकार से समझा जा सकता है जिस प्रकार से मुगल शासक बहादुर शाह जफर।
हम चाहेंगे कि कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष गोर्बाचेव और बहादुर शाह जफर का अनुकरण कर  भारत को कांग्रेस मुक्त बनने नहीं देंगे।
कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा ने राजीव गांधी का बचाव करते हुए कहा है कि पीएम मोदी का कोई परिवार नहीं तो वह छुट्टियां मनाने का महत्व क्या जाने?
अब जनता को निर्णय करना है कि उन्हें एक भी दिन छुट्टी मनाने वाले दिनरात देश के लिये काम करने वाले प्रधानमंत्री मोदी चाहिये या और कोई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व पीएम राजीव गांधी पर नौसेना के विमान वाहक पोत ढ्ढहृस् विराट पर छुट्टियां मनाने वाले बयान के बाद कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए पूर्व पीएम राजीव गांधी का खुलकर बचाव किया है। पार्टी ने साफ किया कि राजीव गांधी ने ढ्ढहृस् विराट का इस्तेमाल छुट्टियों के लिए नहीं बल्कि आधिकारिक उद्देश्य के लिए किया था।
भारत की जागरूक जनता  कांग्रेस से जानना चाहेगी कि आएनएस विराट से यात्रा करने का राजीव गांधी और उनके संगी साथियों का अधिकारिक उद्देश्य क्या था?
सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल विनोद पसरिचा जो कि उस वक्त जहाज का संचालन कर रहे थे जब बतौर प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने वहां का दौरा किया था, ने कहा कि 1987 में पीएम के आधिकारिक दौरे के वक्त सभी प्रोटोकॉल का पालन किया गया और इस दौरान वहां कोई भी विदेशी या फिर दूसरे मेहमान मौजूद नहीं थे।
हालांकि एक अन्य सेवानिवृत्त नौसेना कमांडर वी. के. जेटली ने एक ट्वीट में कहा, “राजीव और सोनिया गांधी ने बनगारम द्वीप में छुट्टियां मनाने के लिए आईएनएस विराट का इस्तेमाल अपनी यात्रा के लिए किया था।
सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल विनोद पसरिचा क्या झूठ  बोल रहे हैं? यदि वे झूठ बोल रहे हैं और उनके समय में ही यह सब घपलेबाजी हुई थी तो उन पर भारत सरकार को कार्यवाही करने के लिये जांच आयोग बैठाना चाहिये।
राजीव गांधी द्वारा आईएनएस विराट को छुट्टिया मनाने के लिये टैक्सी के रूप में उपयोग किये जाने काआरोप लगने के बाद सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल विनोद पसरिचा और कांग्रेस राजीव गांधी के बचाव का असफल प्रयास कर रहे हैं।
इंडिया टुडे में २१ नवंबर २०१३ को नीता प्रताप का एक आर्टिकल इस संबंध में प्रकाशित हुआ था।
सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल विनोद पसरिचा और कांग्रेस उस समय क्यों सोई हुई थी? उस आर्टिकल में लिखी तथ्यों का खंडन क्यों नहीं किया गया?
राजीव गांधी द्वारा ली_ के विरूद्ध श्रीलंका की मदद के लिये भारत की सेना भेजी गई थी। इस वाकया से क्रोधित होकर लीटे द्वारा  राजीव गांधी की हत्या का षडयंत्र रचा गया ऐसी मीडिया की रिपोर्ट रही है।
यदि राजीव गांधी शहीद हैं तो डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्ययाय जिनकी हत्या षडयंत्र के तहत की गई, को कांग्रेस शहीद क्यों नहीं मानती है?
डाॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी कश्मीर में दो निशान, दो प्रधान नहीं  चलेंगे इसी मांग को लेकर आंदोलन करने के लिये कश्मीर गये थे। वहॉ उनको पंडित नेहरू के निर्देश पर शेख अब्दुल्ला की सरकार ने गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था और वहॉ उनकी रहस्यमयी ढंग से मृत्यु हुई थी अर्थात हत्या हुई थी। इसी प्रकार से एक सोची समझी रणनीति षडयंत्र के तहत मुगलसराय रेलवे यार्ड में ट्रेन के कंपार्टमेंट में  दीनदयाल उपाध्याय जी की हत्या हुई थी।
इन्होंने तो लीटे के विरूद्ध कोई सेना नहीं भेजी थी? इन पर यह भी आरोप नहीं लगाया जा सकता है कि  इन्होंने भिंडरावाले को वोटबैंक पॉलिटिक्स के लिये मोहरा बनाया था।
इंडिया टुडे के २०१३ नवंबर के आर्टिकल के अनुसार : लक्षद्वीप के प्रशासक वजाहत हबीबुल्लाह, जो तब प्रधानमंत्री सचिवालय में थे, को याद करते हुए उन्होंने कहा, “वह इसे प्यार करते थे; पिछले सितंबर में, राहुल और प्रियंका ने भी चार दोस्तों के साथ लक्षद्वीप में छुट्टियां मनाईं। बाद में राजीव ने 18,000 रुपये के अपने बिल को मंजूरी दे दी।
शराब के बक्से नई दिल्ली से लाए गए थे, द्वीप के सबसे अच्छे फलों के साथ, करावट्टी से कोल्ड ड्रिंक और पीने का पानी। वे 10 दिनों के सूरज, रेत, पानी के सुखद जीवन के लिए वहाँ थे। भारत के एकमात्र विमानवाहक पोत के साथ उन्हें और उनकीसुरक्षाके लिए तीव्रता से तैनात किया गया था!
यह गणना करना असंभव है कि बिल क्या हो सकता है क्योंकि विभिन्न एजेंसियां शामिल थीं। लक्षद्वीप प्रशासन के एक विंग, मनोरंजन और पर्यटन (जल) खेल (खेल) के लिए सोसायटी द्वारा भोजन प्रदान किया गया था। बांगरमऊ में दो रसोइयों सहित समाज के पांच कर्मचारी तैनात थे। बेशक, मेन्यू की देखरेख नई दिल्ली के गांधी के निजी रसोइए ने की थी।
राजधानी से मदिरा और शराब की एक खेप भी लाई गई। अगत्ती में 100 मुर्गियों के साथ एक पोल्ट्री फार्म स्थापित किया गया था। चीनी और ताज़ीपकड़ी गई मछलियों के अलावा, लक्षद्वीप के पपीते, सपोटा, छोटे पीले केले, और अमरूद जैसे द्वीप फल भेजे गए। कवत्र्ती से मक्खन और कुछ 100 रोटियाँ छीनी गईं और कोचीन से कैडबरी की चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक्स के 40 क्रेट, मिनरल वाटर की 300 बोतलें, अमूल चीज़, काजू, मीठा चूना, मसाला, 20 किलो आटा, 105 किलो आटा मिला। बासमती चावल, और ताज़ी सब्जियाँ। गैरविनाशकारी वस्तुओं की पहली खेप 23 दिसंबर को जहाज से बांगरमऊ चली गई थी। दूसरी तीन दिन बाद पहुंची और 1 जनवरी को पुनरावृत्ति हुई।
खेल अधिकारियों के अनुसार, प्रशासन को सभी बिलों को जमा करने के लिए निर्देशित किया गया है ताकि राजीव भुगतान कर सकें। लक्षद्वीप के कलेक्टर के.के. शमार्: ‘हमने वीआईपी अवकाश के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की।हबीबुल्लाह को जोड़ता है: “मेरा काम केवल बांगरम में प्रधान मंत्री को जमा करना था। उसके बाद, वह अपने दम पर छोड़ दिया जाना चाहता था।”  
हालांकि, संदिग्ध कार्रवाइयाँ साक्ष्य में थीं। भारत के प्रमुख युद्धपोत, ढ्ढहृस् विराट, को राजीव द्वारा टैक्सी के रूप में ले जाने और 10 दिनों के लिए अरब सागर में स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल किया गया था। समुद्र में इसका दैनिक खर्च खगोलीय है क्योंकि विराट एस्कॉर्ट जहाजों के पूरे रिटिन्यू के साथ यात्रा करता है। एक पनडुब्बी के भी उपस्थिति में होने की सूचना मिली थी और कुछ रक्षा विशेषज्ञों ने राजीव की अवकाश योजनाओं के अनुरूप नौसेना को उसके सबसे प्रभावी लड़ाकू घटक से वंचित करने के औचित्य पर सवाल उठाया था। अवकाश की अवधि के लिए अगत्ती में एक विशेष उपग्रह लिंक स्थापित करने में भी काफी खर्च किया गया था।
एडमिरल छ्वत्र नाडकर्णी का 2018 में निधन हो गया, लेकिन नौसेना के रिकॉर्ड से पता चलेगा कि निर्णय कैसे आया!  विदेशी नागरिकों की क्या सुरक्षा जाँच की गई?

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