जल संरक्षण पर सरकार हो रही सख्त: मध्य प्रदेश में बनाया जाएगा कड़ा कानून

 मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को कहा कि प्रदेश में नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों पर अतिक्रमण अब अपराध माना जाएगा। इसे पानी के अधिकार कानून में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कानून का प्रारूप जल्द तैयार कर विधानसभा के अगले सत्र में पेश किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति पानी के स्रोतों पर कब्जा करेगा, उस पर अपराधी मान कर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यहां मंत्रालय में पानी के अधिकार अधिनियम पर गठित जल विशेषज्ञों की समिति के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा, बड़ी संरचनाओं के स्थान पर छोटी जल संरचनाएं बनाई जाए।

इससे लोगों को पुरखों की जमीन, जायदाद और गांव से बेदखल होने से बचा सकेंगे। जनसमुदाय को पानी के प्रबंधन और उपयोग का अधिकार देना चाहिए। उन्होंने पानी की बर्बादी रोकने और उसके संरक्षण पर विशेष ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव गौरी सिंह व पीएचई प्रमुख सचिव संजय शुक्ल से अलग से भी सुझावों पर चर्चा की।

हमारा गांव, हमारा पानी पर हो काम

मध्यप्रदेश जल विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष डॉ. मिहिर शाह ने कहा कि हमारा गांव हमारा पानी कांसेप्ट पर काम हो। गांव का पानी गांव में ही रहे। बड़े बांध से खेतों तक उतना पानी नहीं पहुंच पाता। पानी शुद्धता और फ्लोराइड समस्या का हल होना चाहिए। मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त राजेंद्र सिंह ने कहा, जल स्रोतों के चिन्हांकन, पुनर्जीवन, नोटिफिकेशन पर ध्यान देने की जरूरत है, तभी पुराने स्रोतों को बचाया जा सकेगा। अतिक्रमण खत्म कर जल स्रोत बचा सकेंगे।

उत्तर प्रदेश में जल प्रदूषण पर सजा

उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री डॉ.महेंद्र सिंह ने कहा है कि जल संरक्षण संबंधी कानून का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है जल्द ही इसे कानून की शक्ल दी जाएगी। इसमें जल को प्रदूषित करने वाले को पांच से सात साल की सजा और 10 से 20 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया जा रहा है। कानून के दायरे में सरकारी, अर्धसरकारी, निजी संस्थान होंगे। रेन वॉटर की हार्वेस्टिंग अनिवार्य होगी। सिस्टम नहीं लगाने पर मान्यता रद्द होगी।

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