कमलनाथ ने कहा- निवेश जमीन पर दिखाई दे इसके लिए हर फोकस सेक्टर में निवेश के लिए अफसरों की जिम्मेदारी तय होगी

18 अक्टूबर को इंदौर में होने वाले मैग्नीफिसेंट एमपी से पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को प्रदेश में निवेश को लेकर दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत की। उन्होंने कहा- यह तमाशे का वक्त नहीं, प्रदेश के लिए विश्वास बनाने का मौका है। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश। 

सवाल- ग्लोबल समिट में अब तक उद्योगपति-मेहमानों की संख्या ढाई से तीन हजार होती थी। देश-विदेश से मेहमान आते थे। इस बार संख्या 500 तक सीमित रखने की बात आ रही है। वजह क्या है?
जवाब- मैग्नीफिसेंट एमपी पहले की इन्वेस्टर्स समिट से अलग है। यह एेसा मंच है, जिसमें उद्योगपति और सरकार के अफसर मौजूदा परिस्थितियों, आवश्यकताओं और चुनौतियों पर मंथन करेंगे। हम भरोसे का माहौल बनाना चाहते हैं, ताकि सही मायनों में उद्योगों का संचालन सुगम हो सके। हम सिर्फ उन्हीं पर फोकस्ड हैं, जिन्होंने राज्य में निवेश किया है या जो वास्तव में इसके इच्छुक हैं। निवेशक ही हमारे ब्रांड एंबेसडर हैं। हमने रणनीति बदली है, इसके लिए 10 महीनों तक फोकस्ड सेक्टर के निवेशकों के साथ लंबी बातचीत की है। क्योंकि प्रदेश में मौजूद संभावनाओं को निवेशकों के सामने रखने के लिए एक फोकस्ड और रिजल्ट ओरिएंटेड एप्रोच चाहिए।

सवाल- उद्योगपतियों की शिकायत है कि मप्र में जरूरत के मुताबिक स्किल्ड मेनपावर नहीं मिलता?
जवाब- हम स्किल डेवलपमेंट और ट्रेनिंग पर विशेष जोर दे रहे हैं। उद्योगों के फीडबैक के आधार पर पाठ्यक्रमों में बदलाव किया जा रहा है। हर साल 2 लाख से अधिक तकनीकी प्रोफेशनल्स यहां से निकल रहे हैं। हम उच्च शिक्षा में भी गुणवत्ता सुधार पर काम कर रहे हैं। IIM, IIT, AIIMS, MANIT, IISER जैसी संस्थाएं यहां मौजूद हैं। VIT, सिम्बायोसिस और NMIMS जैसे निजी प्रतिष्ठित संस्थान भी प्रदेश में काम कर रहे हैं।

सवाल- सरकार इस बार समिट में निवेश के आंकड़े जारी नहीं करेगी, फिर इसकी सफलता का पैमाना क्या होगा?
जवाब- भाजपा सरकार के समय में सारे निवेश सम्मेलन दिखावे के लिए होते थे। हम निवेश को जमीन पर उतारकर दिखाएंगे। यह तमाशे का वक्त नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के लिए विश्वास बनाने का मौका है। कोई भी निवेशक राज्य में मौजूद संभावनाओं के आधार पर ही निवेश करता हैं। हमारे पास सबसे अच्छा औद्योगिक बुनियादी ढांचा है। भारत की 50% आबादी हमारे कैचमेंट एरिया में आती है। जीएसटी के बाद हम विनिर्माण के लिए सबसे उपयुक्त राज्य हैं, क्योंकि संपूर्ण भारत अब एक बाजार है, मप्र से देश के किसी भी कोने में 24 घंटे में सामान भेजा जा सकता है।  

सवाल- ग्लोबल समिट में अब तक उद्योगपति-मेहमानों की संख्या ढाई से तीन हजार होती थी। देश-विदेश से मेहमान आते थे। इस बार संख्या 500 तक सीमित रखने की बात आ रही है। वजह क्या है?
जवाब- मैग्नीफिसेंट एमपी पहले की इन्वेस्टर्स समिट से अलग है। यह एेसा मंच है, जिसमें उद्योगपति और सरकार के अफसर मौजूदा परिस्थितियों, आवश्यकताओं और चुनौतियों पर मंथन करेंगे। हम भरोसे का माहौल बनाना चाहते हैं, ताकि सही मायनों में उद्योगों का संचालन सुगम हो सके। हम सिर्फ उन्हीं पर फोकस्ड हैं, जिन्होंने राज्य में निवेश किया है या जो वास्तव में इसके इच्छुक हैं। निवेशक ही हमारे ब्रांड एंबेसडर हैं। हमने रणनीति बदली है, इसके लिए 10 महीनों तक फोकस्ड सेक्टर के निवेशकों के साथ लंबी बातचीत की है। क्योंकि प्रदेश में मौजूद संभावनाओं को निवेशकों के सामने रखने के लिए एक फोकस्ड और रिजल्ट ओरिएंटेड एप्रोच चाहिए।

सवाल- उद्योगपतियों की शिकायत है कि मप्र में जरूरत के मुताबिक स्किल्ड मेनपावर नहीं मिलता?
जवाब- हम स्किल डेवलपमेंट और ट्रेनिंग पर विशेष जोर दे रहे हैं। उद्योगों के फीडबैक के आधार पर पाठ्यक्रमों में बदलाव किया जा रहा है। हर साल 2 लाख से अधिक तकनीकी प्रोफेशनल्स यहां से निकल रहे हैं। हम उच्च शिक्षा में भी गुणवत्ता सुधार पर काम कर रहे हैं। IIM, IIT, AIIMS, MANIT, IISER जैसी संस्थाएं यहां मौजूद हैं। VIT, सिम्बायोसिस और NMIMS जैसे निजी प्रतिष्ठित संस्थान भी प्रदेश में काम कर रहे हैं।

सवाल- सरकार इस बार समिट में निवेश के आंकड़े जारी नहीं करेगी, फिर इसकी सफलता का पैमाना क्या होगा?
जवाब- भाजपा सरकार के समय में सारे निवेश सम्मेलन दिखावे के लिए होते थे। हम निवेश को जमीन पर उतारकर दिखाएंगे। यह तमाशे का वक्त नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के लिए विश्वास बनाने का मौका है। कोई भी निवेशक राज्य में मौजूद संभावनाओं के आधार पर ही निवेश करता हैं। हमारे पास सबसे अच्छा औद्योगिक बुनियादी ढांचा है। भारत की 50% आबादी हमारे कैचमेंट एरिया में आती है। जीएसटी के बाद हम विनिर्माण के लिए सबसे उपयुक्त राज्य हैं, क्योंकि संपूर्ण भारत अब एक बाजार है, मप्र से देश के किसी भी कोने में 24 घंटे में सामान भेजा जा सकता है।  

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