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पूर्वांचल में क्यों महत्वपूर्ण है निषाद वोटबैंक? अमित शाह कर सकते हैं आरक्षण की घोषणा, समाज पर हर दल की नजर, सैकड़ों सीटों पर उलटफेर की ताकत

लखनऊ
7 जून 2015 की तारीख को गोरखपुर जिले के सहजनवा और पड़ोस के संतकबीरनगर जिले के मगहर के बीच कसरवल के पास निषाद जाति के लोगों ने अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग को लेकर रेलवे ट्रैक जाम कर दिया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की फायरिंग में एक युवक की मौत हो गई। अखिलेश निषाद नामक युवक इटावा से प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आया था। मौत की सूचना के बाद प्रदर्शन उग्र हो गया और जमकर बवाल हुआ।

पेशे से होम्योपैथिक डॉक्टर और राजनीति में सक्रिय संजय निषाद इस घटना के बाद सुर्खियों में आ गए। उस समय प्रदेश में सत्तारूढ़ अखिलेश यादव की सरकार ने उग्र प्रदर्शन को लेकर डॉक्टर निषाद सहित 3 दर्जन लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ। उन्होंने निषाद NISHAD (निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल) पार्टी का गठन किया। 2017 के चुनाव में उतरे लेकिन सफलता केवल ज्ञानपुर की एक सीट पर ही मिली। लेकिन 5 सालों में उनके दल ने राजनीतिक प्रभाव का विस्तार कर लिया है।

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निषाद पार्टी फिलहाल बीजेपी की सहयोगी है। 8-10 पहले तक गोरखपुर में गीता वाटिका रोड पर इलेक्ट्रो होम्योपैथी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर संजय का प्रभाव क्या है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यूपी चुनाव की तैयारियों को लेकर गृहमंत्री अमित शाह उनसे मुलाकात कर चुके हैं। संजय निषाद खुद को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग बीजेपी नेतृत्व से करते रहे हैं।

पूर्वांचल के कई जिलों में निषाद वोट बैंक का प्रभाव है। मछुआ समाज की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गोरखपुर में 2018 के लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी को हराने वाले संजय के बेटे प्रवीण निषाद को अगले ही साल 2019 में बीजेपी ने संतकबीरनगर सीट से लोकसभा से टिकट दे दिया। प्रवीण निषाद लोकसभा सांसद हैं। डॉक्टर संजय दावा करते हैं कि वह यूपी की 150 से अधिक सीटों पर जीत हार तय करने का माद्दा रखते हैं।

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निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने कहा कि 17 दिसंबर को रमाबाई अंबेडकर मैदान में होने वाली उनकी पार्टी की महारैली में गृह मंत्री अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ भी मंच साझा करेंगे। उन्होंने दावा किया कि महारैली में पार्टी के सभी बड़े नेता मछुआ जाति के उत्थान के लिए किए गए कार्यों से अवगत कराएंगे तो वहीं मछुआ समाज के आर्थिक, सामाजिक एवं राजनैतिक आरक्षण की भी घोषणा करेंगे।

पूर्वांचल में निषाद पार्टी की क्या है ताकत
गंगा के किनारे वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश के इलाके में निषाद समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है। वर्ष 2016 में गठित निषाद पार्टी का खासकर निषाद, केवट, मल्लाह, बेलदार और बिंद बिरादरियों में अच्छा असर माना जाता है। गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, जौनपुर, संत कबीरनगर, बलिया, भदोही और वाराणसी समेत 16 जिलों में निषाद समुदाय के वोट जीत-हार में बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं।

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डॉक्टर निषाद ने दावा किया कि निषाद पार्टी के आंदोलन के बाद मछुआरों के 17 अति पिछड़ी जातियों को शासनादेश दिसंबर 2016 के अनुसार अनुसूचित जाति के रूप में परिभाषित कर सुविधा देना आदेशित है। साथ ही 31 दिसंबर 2016 के आदेशानुसार मछुआ समुदाय की सभी जातियों (कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिंद, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी और मछुआ) को ओबीसी की सूची से निकालकर अनुसूचित जाति की सुविधा देने का सभी विभागों को आदेश हुआ था।

2008 में बनाए दो संगठन
संजय सबसे पहले बामसेफ से जुड़े और कैम्पियरगंज विधानसभा से पहली बार चुनाव लड़े और हार गए। यहां से उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई। 2008 में उन्होंने ऑल इंडिया बैकवर्ड ऐंड माइनॉरिटी वेलफेयर मिशन और शक्ति मुक्ति महासंग्राम नामक दो संगठन बनाए। उन्होंने राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद बनाई। मछुआ समुदाय की 553 जातियों को एक मंच पर लाने की मुहिम शुरू की।