Editorial :- 26/11 संविधान दिवस का बहिष्कार क्यों?

27 November 2019

आज २६ नवंबर को मुंबई ब्लास्ट के शहीदों  को श्रद्धांजली

महाराष्ट्र में आज के सियासी संघर्ष के बीच  मंगलवार को 26/11 के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई है। इसी संदर्भ में मुझे २६/११ मुंबई ब्लास्ट के संबंध में शरद पवार जी द्वारा दिये गये वक्तव्य का स्मरण हो रहा है।

पवार ने कहा कि मुंबई को आग की लपटों में जाने से रोकने का कोई तरीका नहीं है। बदला लेने।

12 वें विस्फोट के बारे में घोषणा करने से कुछ समय पहले ही इस कदम पर पूर्व-ध्यान दिया गया था, उसे मार्च 1993 में शहर में 11 समन्वित विस्फोटों की सूचना दी गई थी, जो सभी हिंदू बहुल क्षेत्रों में थे।

से बात करते हुए इंडियन एक्सप्रेस एडिटर-इन-चीफ शेखर गुप्ता एनडीटीवी के वॉक टॉक पर है, जो शाम 7.30 बजे प्रसारण कल हो जाएगा, पवार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पर समय ने कहा कि वह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच संघर्ष प्रत्याशित था था और वह करना पड़ा ऐसा होने से रोकें।

पवार ने कहा, “मैं टीवी पर गया और जानबूझकर लोगों को गुमराह किया। 11 विस्फोटों के बजाय मैंने 12 और उन क्षेत्रों में से एक मस्जिद बंदर अल्पसंख्यकों (मुस्लिमों)के क्षेत्र में भी विस्फोट हुआ बताया।”

इसी प्रकार से आज संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति कोविंद जी का संबोधन भी हुआ। इसका बहिष्कार कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों ने किया। यह दु:ख का विषय है। राष्ट्रीय समारोहों को राजनीतिक मुद्दा न बनाया जाये।

इसी संदर्भ में मुझे स्मरण हो रहा है कि यूपीए शासनकाल में ही वंदे मातरम का शताब्दी समारोह  २००६ में आयोजित किया गया था। उस समय भी संसद का बहिस्कार उस समय के पीएम मनमोहन सिंह और सोनिया गंाधी जी ने किया था।

 मंगलवार को संसद के केंद्रीय कक्ष में आयोजित संविधान दिवस समारोह का बहिष्कार किए जाने पर कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि यह, संविधान निर्माता डॉ बाबासाहब भीमराव आंबेडकर का अपमान है। कांग्रेस, शिवसेना और राकांपा समेत विपक्षी दलों ने 26 नवंबर को संविधान दिवस पर आयोजित संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का बहिष्कार किया।  यह अनुचित है। इस प्रकार की प्रवृत्तिया भविष्य में नहीं दोहराई जायेंगी ऐसी हम आशा करते हैं।

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