Editorial :- महाराष्ट्र में फिर पलटेगी बाजी?

11 December 2020

महाराष्ट्र में फिर बाजी पलट सकती है। प्रश्र यह है कि शिवसेना और भाजपा पुन: साथ आयेंगे या भाजपा को पुन: एनसीपी का समर्थन मिलेगा या अजीत पवार धड़ा एनसीपी से अलग होकर भाजपा के साथ सरकार बनायेगा।

आज का समाचार है : फिर साथ आ सकते हैं शिवसेना, बीजेपी, उद्धव करेंगे निर्णय: मनोहर जोशी।

शिवसेना के सीनियर नेता मनोहर जोशी ने कहा है कि बीजेपी और शिवसेना एक साथ आ सकते हैं। उनका कहना है कि दोनों हमेशा के लिए नहीं अलग हो गए हैं और पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे इस पर फैसला करेंगे। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना के वरिष्ठ नेता मनोहर जोशी ने मंगलवार को कहा है कि उनकी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी निकट भविष्य में फिर साथ आ सकते हैं। जोशी ने पत्रकारों से कहा कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे इस मुद्दे पर उचित समय पर निर्णय लेंगे।

नागरिकता संशोधन विधेयक पर लोकसभा में बहस के दौरान कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने कहा कि भारत के बटवारे के लिये विनायक दामोदर सावरकर का टू नेशन थ्योरी जिम्मेदार है। दूसरी ओर शिवसेना यह कह चुकी है कि वीर सावरकर को भारत रत्न मिलना चाहिये। उक्त विरोधाभाष के अलावा अन्य कई विरोधाभाष भी हैं जिन्हें झेलना शिवसेना के लिये उसी प्रकार से मुसीबत है जिस प्रकार से मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति ने कांग्रेेस को आज हाशिये पर ला दिया है। नागरिकता संशोधन विधेयक का एक ओर लोकसभा में ं समर्थन कर रही है और दूसरी ओर कांग्रेस के दबाव में आकर अब राज्यसभा में उसका विरोध करने का संकेत स्वयं उद्धव ठाकरे ने ही दे दिया है।

इस प्रकार से विरोधाभाष से तंग आकर संभव है भविष्य में भाजपा और शिवसेना साथ आ जायें।

दूसरी ओर ९ दिसंबर का एक समाचार यह भी है कि  देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार की मुलाकात।

पिछले महीने भाजपा के नेतृत्व वाली 80 घंटों की सरकार गिरने के बाद पहली बार राकांपा नेता अजित पवार और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस किसी सार्वजनिक मंच पर एक साथ नजर आएं।

 पवार ने सोमवार को कहा कि मुलाकात के दौरान उन दोनों ने ”मौसम और बारिशÓÓ पर चर्चा की। उल्लेखनीय है कि एक अप्रत्याशित घटनाक्रम के तहत 23 नवंबर को आनन-फानन में सुबह-सुबह फडणवीस ने मुख्यमंत्री और राकांपा नेता अजीत पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन, उनकी यह सरकार सिर्फ 80 घंटे ही चल पाई थी। अब एनसीपी और कांग्रेस तथा शिवसेना की तिकड़ी सरकार चल रही है। उसमें अजित पवार शामिल नहीं हुए हैं। सरकार बनने के समय वहॉ पोस्टर लगे थे अजित पवार के मुख्यमंत्री बनने के। उप मुख्यमंत्री पर पर संभवत: वे तैय्यार हो जाते।

ऐसा न होने से और अब फडणवीस के साथ उनकी मुलाकात से यह संकेत मिलता है कि संभव है  वे अपने कुछ विधायकों के साथ मिलकर भाजपा के साथ सरकार बना लें।

यह भी संभव है कि जैसे कि अल्पमत वाली पूर्व की भाजपा सरकार को बाहर से समर्थन दिया था एनसीपी ने वैसा पुन: भी हो सकता है।

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