Editorial :- प्रतिबंधित  बीबीसी फिल्म इंडियाज डाटर….

8 January 2020

भारत को बदनाम करने वाले बिकाऊ इंडियाज लीडर्स, जनर्लिस्टों पर फिल्म क्यों नहीं?

ब्रिटिश पत्रकार  लेस्ली उडवीन ने भारत को भारत की नारी को बदनाम करने की नीयत से निर्भया पर आधारित बीबीसी के लिये इंडियाज डाटर फिल्म बनाई थी।

लेस्ली उडवीन ने तिहाड़ जेल जाकर निर्भया के बलात्कारी मुकेश का इंटरव्यू लिया था। इंटरव्यू लेने की अनुमति यूपीए सरकार ने दी थी। इस संबंध में क्या लेन देन हुआ यह उस समय की यूपीए सरकार के जिम्मेदार कांगे्र्रस नेताओं से पूछना चाहिये।

फिल्म की डायरेक्टर लेसली उडवीन तथा बीबीसी का कथन था कि बीबीसी की फिल्म बनाने की अनुमति निर्भया के अभिभावक से ले ली गई थी। निर्भया के पिता का कथन एनडीटीवी में प्रकाशित हुआ था जिसके अनुसार उनके पिता का कहना था कि उन्हें फिल्म में कुछ भी अनुचित नहीं है।

इस फिल्म का प्रसारण एनडीटीवी भारत में करने का कांटेक्ट बीबीसी से किया था।

उक्त तथ्यों के आधार पर यह संदेह होता है कि उस समय की यूपीए सरकार और एनडीटीवी  ने मिलकर भारत को भारत की नारी को बदनाम करने का कुचक्र किया था।

राहुल गांधी ने झारखंड विधानसभा चुनाव के समय रेप इन इंडिया कहा था। इसी से समझा जा सकता है कि कांग्रेस की सोच उक्त फिल्म निर्माण करवाने के समय जो थी वही सोच अभी भी है।

कांग्रेस की इसी सोच का प्रदर्शन कांग्रेस के उस समय के प.बंगाल से सांसद अभिजीत मुखर्जी ने भी निर्भया कांड पर हो रहे प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देकर किया था।

कांग्रेस सांसद ने निर्भया  प्रदर्शन पर की थी टिप्पणी : रात में डिस्को, सुबह प्रदर्शन बन गया है फैशन

इस फिल्म को भारत की मोदी सरकार ने बैन ०५ मार्च 2015 को प्रतिबंधित कर दिया था। भारत की रोक के बावजूद बीबीसी ने भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 3:30 बजे इसका प्रसारण किया। पहले ये फिल्म 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रसारित की जानी थी। लेकिन विवाद से मिली चर्चा को भुनाने के लिए फिल्म पहले ही दिखा दी गई।

निर्भया पर फिल्म बनवाकर हमारे यहॉ के बिकाऊ नेता और पत्रकार ने देश की बहादुर बेटी निर्भया का एक दृष्टि से अपमान किया है। उसी प्रकार का अपमान राहुल गांधी ने रेप इन इंडिया  कहकर किया है।

 इस फिल्म में उस समय एनडीटीवी इंडिया में कार्यरत पत्रकार दिवांग ने भी इस समय उस फिल्म में एक्टिंग की थी। उनका भी कथन था कि बीबीसी ने फिल्म निर्भया पर जो बनाई है वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है उसे प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिये।

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम का दावा रहा है – टीवी पर इंटरव्यू के एवज में पैसे लेता था दोस्त। इसका विवरण संपादकीय के इसी पृष्ठ मेें अलग से दिया गया है।

 इसीलिये हमारा प्रश्र है कि भारत को बदनाम करने वाले बिकाऊ इंडियाज लीडर्स, जनर्लिस्टों पर फिल्म क्यों नहीं?

Leave comment