Editorial :-   जमानत पर घूम रहे नेताओं का क्या?

25 January 2020

राजनीति में अपराधीकरण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

  राजनीति के अपराधीकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने आज २४ जनवरी २०२० को सख्त टिप्पणी की है. शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए कुछ तो करना ही होगा.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर विचार करने की सहमति जताई है, जिसमें आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को पार्टी प्रत्याशी न बनाने का आदेश जारी करने की अपील की गई है.

 अब प्रश्न यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनाव आयोग को दिये गये दिशा निर्देश में जमानत पर घूम रहे नेता अछूत रहेंगे?

यहॉ यह उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के सभी बड़े दिग्गज नेता यहॉ तक की सोनिया और राहुल गांधी तथा रॉबर्ट वाड्रा भी अदालत से जमानत लेकर राजनीति कर रहे हैं, शाहीन बाग में उन्हीं के आशीर्वाद से जिन्ना वाली आजादी के नारे भी लग रहे हैं तथा वहॉ पर मणिशंकर अय्यर पहुंचकर पीएम मोदी को कातिल तक कह डाले हैं।

शशि थरूर भी सुनंद पुष्कर की संदिग्ध मौत  या हत्या के केस में भी कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम तो दो-तीन महीना जेल में रहकर अभी-अभी बाहर निकले हैं। लालू यादव तो अभी जेल से ही अपनी पार्टी आरजेडी को दिशा निर्देश दे रहे हैं।

कर्नाटक के भी कांगे्रस के कर्नाटक के नेता शिव कुमार और जार्ज पर भी ईडी का शिकंजा कसा जा चुका है। वे भी ईडी की कस्टडी में रह चुके हैं।

हरियाणा के पूर्व सीएम हुड्डा भी जमानत पर ही घूम रहे हैं।

अब प्रश्र यह उठता है कि सुप्रीम कोर्ट  राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए अपराधिक मामलों में भ्रष्टाचार पर घूम रहे नेताओं को भी शामिल करेगी।

सितंबर २७, २०१३ को अजय माकन कांग्रेस की ओर से दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे। उस प्रेस कांफ्रेंस में अचानक राहुल गांंधी पहुंचकर उस समय मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार द्वारा दागी नेताओं को बचाने वाले अध्यादेश की प्रतिलिपि को फाड़कर फेंक दिया था।

दरअसल, दागी नेताओं (विशेषकर जैसे  लालू यादव) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए तैयार इस अध्यादेश को केंद्रीय कैबिनेट ने बीते मंगलवार को मंजूरी भी दे दी और राष्ट्रपति के पास भेजने की तैय्यारी भी थी परंतु भेजा नहीं गया।

उस दौरान राहुल ने संसद और विधानसभाओं में दागी नेताओं पर सरकार के अध्यादेश पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘इस अध्यादेश के बारे में मेरा यही कहना है कि इसे (अध्यादेश को) फाड़कर फेंक देना चाहिए। यह मेरी निजी राय है।Ó उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस अध्यादेश को लेकर जो फैसला लिया है, वह फैसला बिल्कुल गलत है। उन्होंने माना कि इस मसले पर कांग्रेस की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने गलती की है।

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