Editorial :- जिस टू नेशन थ्योरी को इंदिरा गांधी ने खत्म किया उसे राहुल गांधी जिंदा करने का दुस्साहस कर रहे हैं…

28 January 2020

इंदिरा गांधी ने १९७१ में बंगलादेश की स्थापना में सहयोग प्रदान कर टू नेशन थ्योरी को खत्म कर दिया था, परंतु आज उसे ही राहुल गंाधी प्रधानमंत्री बनने की लालसा मेें जिंदा कर रहे हैं।
यहॉ यह उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी जो अभी गुस्ताखी कर रहे हैं वही पाप सत्ता के लालच में पंडित नेहरू ने भी किया था। महात्मा गांधी की इच्छा के विरूद्ध पंडित नेहरू और जिन्ना ने मिलकर धार्मिक आधार पर भारत का बटवारा स्वीकार किया और अपने-अपने देश के प्रधान बन गये।
कश्मीर मुद्दे ३७० धारा हटाने पर विश्व के सभी देशों ने समर्थन किया था और कोई भी मुस्लिम देश उस समय उसका खुलकर विरोध नहीं किया था। बाद में विश्व के सिर्फ दो ही मुस्लिम देशों ने तुर्की और मलेशिया ही पाकिस्तान के पक्ष में खड़े हुए।
यही कारण है कि पाक परस्त कांग्रेस की फारेन विंग इंडियन ओवरसीज कांगे्रस ने अपना दफ्तर पाकिस्तान का समर्थन करने वाले देश तुर्की में खोला।
जाकिर नाईक जिसे दिग्विजय सिंह ने शांतिदूत कहा था और जिसकी संस्था से कांग्रेस ने डोनेशन लिया था उसे मलेशिया मेंं शरण लेने के लिये सहयोग दिया।
सीएए और कश्मीर मुद्दे पर
इंडियन ओवरसीज कांगे्रस का हाथ पाक समर्थकों के साथ?
लंदन समेत दुनिया में 8 जगह इंडियन ओवरसीज कांग्रेस का प्रदर्शन
ष्ठद्गष् १४, २०१९, – कांग्रेस दिल्ली के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बचाओ रैली की. इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के कार्यकर्ता लंदन व अमेरिका से लेकर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया से लेकर सऊदी अरब तक के भारतीय दूतावास के सामने प्रदर्शन किया था.
370 व कश्मीर का विरोध करने वाले ब्रिटिश सांसद से मिले कांग्रेसी नेता
ह्रष्ह्ल १०, २०१९, – ब्रिटेन की लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने विपक्षी पार्टी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद कश्मीर का मामला उठाया था। जेरेमी कॉर्बिन यूके में विपक्षी दल लेबर पार्टी के नेता है और उन्होंने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के भारत के कदम का विरोध किया था।
१९७१ में बंगलादेश लिब्र्रेशन वार के समय बलूचिस्तान और पख्तूनिस्तान की आजादी के लिये क्वेटा और पेशावर में जुलुस निकाले गये थे।
सिंध, बलूच और पश्तून भारत के वास्तविक मित्र हैं।
आंाध्र के पूर्व मुख्यमंत्री रामाराव के पुत्र के.विक्रमराव ने अपने एक लेख में लिखा है
‘बाच्चा खानÓ अहिंसा की शत-प्रतिशत प्रतिमूर्ति थे
आजादी की बेला पर कुर्सी की रेस में नेहरु-पटेल ने इस अकीदतमंद हिन्दुस्तानी से उनकी मातृभूमि (सरहद प्रान्त) छीनकर अंग्रेजभक्त मोहम्मद अली जिन्ना की झोली में डाल दी थी। तब इस भारतरत्न और उनके भारतभक्त पश्तूनों को कांग्रेसियों ने “भेडिय़ों” (मुस्लिम लीगियों) के जबड़े में ढकेल दिया था।और बापू मूक रहे। दशकों तक पाकिस्तानी जेलों में नजरबंद रहे, यह फख़रे-अफगन, उतमँजाई समुदाय के ‘बाच्चा खानÓ अहिंसा की शत-प्रतिशत प्रतिमूर्ति थे।

सिंधी, बलूच और पश्चून भारत के वास्तविक मित्र हैँ। वे अभी आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं।
इधर भारत में कांग्रेस और अन्य कुछ विपक्षी दल झूठ और भ्रमजाल फैलाकर भारत में गृहयुद्ध की स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं और भारत सरकार को पाकिस्तान के समर्थक तत्वों से मिलकर बदनाम कर रहे हैं।
जिस टू नेशन थ्योरी को इंदिरा गांधी ने खत्म किया उसे राहुल गांधी जिंदा करने का दुस्साहस कर रहे हैं…

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