Editorial :-धारा 370 निष्प्रभावी होने से  पाकिस्तान से ज्यादा कांग्रेस क्यों तिलमिला रही है?

8 February 2020

अधीर बोले- ‘कश्मीर भारत का भौगोलिक हिस्सा, भावनात्मक रूप से नहींÓ,

हम ये समझने में असमर्थ हैं कि धारा ३७० निष्प्रभावी होने से पाकिस्तान से ज्यादा कांगे्रस क्यों तिलमिला रही है। वह पाकिस्तान की भाषा लगातार क्यों बोल रही है?

>> ३७० धारा निष्प्रभावी होने के उपरांत राहुल गांधी ने जो प्रतिक्रिया दी थी उसका दुरपयोग पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रस्तुत कर किया था।

>> उसके बाद जब लोकसभा में ३७० धारा पर भी  बहस हो रही थी  तब कांग्रेस सांसद ने कहा था कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला नहीं है। वह सयुक्त राष्ट्र संघ की निगरानी मेें है। तब उनके पीछे बैठीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी भौंचक रह गई थीं। परंतु सोनिया गांधी में यह साहस नहीं था कि वह उन्हेें रोकती या उसके बाद अधीर रंजन चौधरी की कही हुई बात का खंडन करती।

>> ५ फरवरी को पुन: कांग्रेस के लोकसभा में नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कश्मीर आंतरिक मामला नहीं है पीओके पर एक्शन नहीं ले सकता भारत।

उन्होंने सदन में बैठे विदेश मंत्री एस. जयशंकर से पूछा, ‘मैं (विदेश मंत्री) जयशंकर जी को पूछना चाहता हूं कि आप दावे के साथ कह सकते हैं कि कश्मीर इंटरनल मसला है? कश्मीर कोई इंटरनल मसला नहीं है।

आर्मी चीफ के बयान पर पूछा- आपमें हिम्मत है?

अपने बयानों को लेकर अक्सर विवादों में रहने वाले अधीर रंजन ने आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवाणे के पीओके पर दिए बयान की भी चर्चा की।

“चीन जब पीओके में घुसने लगा तो पीओके पाकिस्तान के कब्जे में चला गया। अब आप कुछ नहीं कर सकते। पीओके में जब कुछ करने जाएंगे तो चाइना के साथ आपको टकराना होगा, आप तैयार हैं? बताइए, आप तैयार हैं पाकिस्तान और चीन, दोनों से एकसाथ मुकाबला करने के लिए? तैयार हैं तो क्यों नहीं पीओके पर कब्जा कर लेते हैं?”

आज लोकसभा में अधीर रंजन चौधरी जब बोले रहे थे ‘कश्मीर भारत का भौगोलिक हिस्सा, भावनात्मक रूप से नहींÓ  तब वे प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ, दोनों के लिए ‘आपके प्रधानमंत्रीÓ और ‘आपके आर्मी चीफÓ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते रहे।

इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अधीर रंजन को रोकते हुए कहा कि प्रधानमंत्री हम सबके हैं। इनके प्रधानमंत्री नहीं कहें।

भारत के प्रधानमंत्री के प्रति अपशब्द कहना और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की प्रशंसा करना कांग्रेस की एक आदत सी बन गई है। यह सब वह मुस्लिम तुष्टिकरण के लिये कर रही है। वह समझती है कि  कांगे्रस पाक परस्त है वैसे ही भारत के मुसलमान भी हैं।

 वास्तव में देखा जाये तो भारत के मुसलमान पाक परस्त नहीं हैं । परंतु कांग्रेस उन्हें हिन्दू विरोधी और पाक परस्त बनाते जा रही है।

लश्कर से ज्यादा हिन्दू आतंकवाद से खतरा भारत को है यह राहुल गांधी ने अमेरिका में कहा था। हिन्दू आतंकवाद, भगवा आतंकवाद शब्द का अविष्कार यूपीए शासनकाल में उस समय के दोनों गृहमंत्री शिंदे और चिदंबरम ने किया था।

उसके बाद अब सीएए के विरोध के प्रदर्शनों को हवा देकर वह अलगाववाद को बढ़ावा दे रही है।

उसका ही परिणाम है कि २६ दिसंबर को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (ढ्ढढ्ढञ्ज), पवई में देश में ह्वह्ल हिंदुत्व आतंकवाद को रोकने, Óऔर द्धह्वद्वड्डठ्ठ नफरत को हवा देकर मानवता को कायम रखनेÓ का आह्वान करने वाले पोस्टरों ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया था।

इसी सब हरकतों से उत्साहित होकर इमरान खान की पार्टी ने पाकिस्तान में जगह-जगह पोस्टर लगाये हैं कि हिन्दू लात से नहीं बात से मानते हैं। इसकी आलोचना होने पर पाकिस्तान ने माफी मांगी हैं।

इससे ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस और पाकिस्तान एक दूसरे से प्रेरणा प्राप्त कर भारत में अलगाववाद को बढ़ावा दे रहे हैं।

शाहीनबाग एक प्रकार से इसी प्रवृत्ति की प्रयोगशाला कांगे्रस और आप पार्टी जैसी विपक्षी पार्टियां बना रही हैं।

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