Editorial :- महात्मा गांधी की हत्या में कांग्रेस का हाथ?

18 February 2020

नेताजी सुभाष चंद्र बोस, श्यामा प्रसाद मुखर्जी  व लाल बहादुर शास्त्री ही नहीं बल्कि महात्मा गांधी की हत्या में भी कांग्रेस का ही हाथ रहा है इस प्रकार के संकेत इतिहास के पन्ने खंगालने से मिलते हैं। यहॉ हमने १३ बिंदू दिये हैं। इसमें कुछ तथ्य प्रस्तुत किये हैं। हमने पूरी सावधानी बरती है  कि वे सहीं हों। ये सब पब्लिक डोमेन में है।

सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने आज ट्वीट किया, “पहला सवाल: गांधीजी के शव का पोस्टमार्टम या ऑटोप्सी क्यों नहीं हुआ? दूसरा: आभा और मनु से प्रत्यक्षदर्शी के रूप में अदालत में पूछताछ क्यों नहीं की गई? तीसरा: गोडसे की रिवाल्वर में कितने खाली चैम्बर हैं? इटैलियन रिवाल्वर “पता नहीं चला” !! क्यों? हमें इस मामले को फिर से खोलने की जरूरत है।”

१. इस संदर्भ में यह भी तथ्य है कि महात्मा गांधी  गांधी ही नहीं बल्कि लाल बहादुर शास्त्री का भी पोस्टमार्टम न ही ताशकंद में हुआ और न ही भारत में।

२. पंडित नेहरू अपने विरोधी चाहें वे सुभाष चंद्र बोस हों या डा् श्यामा प्रसाद मुखर्जी उन्हें अपने रास्ते से अलग इस प्रकार किये कि उनका हाथ उसी प्रकार से साफ-सुथरा दिखे जैसे कि उनकी जैकेट।

सुभाष चंद्र बोस को अपने रास्ते से हटाने के लिये किस प्रकार से उन्होंने ब्रिटेन के तत्कालीन पीएम एटली को पत्र लिखा था यह इतिहास के पन्नों में है। उसकी प्रतिलिपि इस संपादकीय के नीचे अलग से दी गई है।

३. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को शेख अब्दुल्ला के साथ मिलकर किस प्रकार से कश्मीर की जेल में बंद किया गया और उनकी संदेहास्पद मृत्यु जेल में ही हुई यह भी इतिहास के पन्नो में है।

क्या उनका पोस्टमार्टम हुआ? क्या उनकी मृत्यु के लिये कोई जांच कमेटी बैठाई गई? यदि ऐसा नहीं हुआ तो संदेह की सुई किस ओर घुमेगी?

४. गांधी समाधि में ‘हे राम!Ó अभी भी उदधृत है। यदि महात्मा गांधी के ये अंतिम शब्द नहीं थे तो उन्हें समाधि में क्यों रखा गया और बाद में क्यों नहीं हटाया गया? 

५. आभा और मनु महात्मा गांधी को गोली लगने के समय उनके दायें बांये खड़ी थीं। ‘हे राम Ó महात्मा गांधी के मुह से अंतिम शब्द यदि निकले थे तो इसका तात्पर्य यह है कि वे उस समय सांस ले रहे थे।

आभा और मनु से प्रत्यक्षदर्शी के रूप में अदालत में पूछताछ क्यों नहीं की गई?

६.  एैसी स्थिति में उन्हें गोली लगने और बिड़ला के घर ले जाने के बाद गांधी को कोई चिकित्सीय उपचार क्यों नहीं दिया गया? उन्हें दो या तीन या चार गोलियां लगी थी और ठीक होने की संभावना नहीं थी लेकिन सवाल बना हुआ है  गोली लगने के बाद वह सांस ले रहा था, उसे राम मनोहर लोहिया अस्पताल या सफदरजंग अस्पताल में क्यों नहीं ले जाया गया, प्रत्येक 4 ्यरू दूर?

७.            गांधी हत्या के पांचवें प्रयास में मारे गए थे। 20 जनवरी 1948 को पिछला प्रयास अंतिम और 30 जनवरी को सफल होने से सिर्फ 10 दिन पहले हुआ था। यह एक असफल बमबारी थी – और पकड़े गए लोगों में से एक मदनलाल पाहवा ने गोडसे और आप्टे को सह साजिशकर्ता बताया था। उन्हें २० जनवरी से ३० जनवरी तक कभी भी गिरफ्तार या पूछताछ क्यों नहीं की गई?

८. बॉम्बे के मुख्यमंत्री – बीजी खेर और गृह मामलों के मंत्री सरदार पटेल को चौथे प्रयास के बाद संदिग्धों की एक सूची दी गई, और गोडसे और आप्टे को इसमें नामित किया गया। इस रिपोर्ट के दर्ज होने के बाद गांधी को प्रदान की जा रही सुरक्षा का कोई रिकॉर्ड क्यों नहीं है?

९. महात्मा गांधी जी भारत विभाजन के खिलाफ थे। जबकि पंडित नेहरू और जिन्ना भारत विभाजन के पक्षधर थे। क्या यह विरोधाभाष संकेत नहीं देता है कि भारत विभाजन महात्मा गांधी की इच्छा के विरूद्ध हुआ। क्या भारत विभाजन के बाद स्वतंत्रता समारोह में पंडित नेहरू के साथ महात्मा गांधी भी थे? कहा जाता है कि वे विभाजन के बाद बंगाल के स्थान पर दु:खी अवस्था में पश्चाताप कर थे।

यहॉ यह उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी किसी भी हालत में भारत विभाजन को रोकना चाहते थे और इसके लिये उन्हेांने यहॉ तक सुझाव दिया था कि जिन्ना को पूरे भारत का प्रधानमंत्री बना दिया जाये। परंतु पंडित नेहरू को महात्मा गांधी का यह सुझाव पसंद नहीं था।

इस तथ्य को इस संपादकीय के नीचे मैं अलग से प्रकाशित कर रहा हूूं :

१०.  2 अप्रैल, 2013 को मुख्यमंत्री जयललिता ने विधानसभा में कांग्रेस सदस्यों का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि उन्हें अपनी पार्टी के इतिहास और महात्मा गांधी के कांग्रेस को भंग करने के सुझाव की भी जानकारी नहीं है। जयललिता ने इसके लिए दस्तावेजी प्रमाण दिये थे। इसका विवरण लोकशक्ति के १७ फरवरी २०२० के अंक में पृष्ठ 4 में प्रकाशित है।

महात्मा गांधी की इच्छा की पूर्ति के लिये पंडित नेहरू ने क्यों नहीं कांगे्रेस को भंग किया।

क्या उक्त ९ और १० कारण महात्मा गांधी की हत्या के प्रति संदेह प्रकट नहीं कर रहे हैं?

११. हैदराबाद के बीजी केसकर, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि नाथूराम गोडसे ने वास्तव में महात्मा की हत्या नहीं की थी, लेकिन कांग्रेस के कुछ लोग इसके पीछे थे, वह पांच कारणों का हवाला देते हैं: (1) महात्मा के साथ जाने वाली दो लड़कियों के बयानों में असंगतता कभी नहीं कहा गया। अभियोजन पक्ष द्वारा न्यायालय के समक्ष। (2) गोलीबारी में प्रयुक्त खाली कारतूस कभी नहीं मिले। (3) उनके शरीर का पोस्टमॉर्टम नहीं किया गया था। (4) नाथूराम के पास एक इटालियन पिस्तौल थी लेकिन उसे पकड़े जाने पर वह पूरी तरह भरी हुई थी। (5) महात्मा के शरीर पर जो घाव थे वह रिवॉल्वर की गोलियों से थे! फिर उसकी हत्या किसने की? उनके अनुसार, यह एक कांग्रेसी का काम था जो 1979 तक पुना में जीवित था। महात्मा की हत्या में आरएसएस का कभी दूर का संबंध नहीं था।

– विष्णु विश्वनाथ फाटक, वडोदरा

वे कौन-कौन से कांग्रेस नेता थे जिनकी ओर विष्णु विश्वनाथ फाटक, वड़ोदरा ने इशारा किया है। यह इतिहास में खोज का विषय है।

परंतु यह निश्चित है कि महात्मा गांधी की हत्या में कांग्रेस का हाथ रहा है और इसमें लार्ड माऊंटबैटन का भी साथ रहा है।

संदेह तो यह भी है कि महात्मा गांधी को अपने रास्ते से उसी प्रकार से पंडित नेहरू हटाना चाहे जिस प्रकार से उन्हेांने सुभाष चंद्र बोस और डा् श्यामा प्रसाद मुखर्जी को हटाया। इन तीनों ही मामलों में पंडित नेहरू के हाथ साफ-सुथरे हैं।

 इन सभी में बड़ी चतुराई से पं.नेहरू ने एक तीर से देा शिकार किये हैं।

 महात्मा गांधी तो रास्ते से हट ही गये परंतु उसका पूरा दोष संघ को बदनाम करने में कांगे्रस द्वारा लगा दिया गया जो कुचक्र अभी तक तक चल रहा है।

क्या यह संभव नहीं कि महात्मा गांधी की हत्या कांग्रेस के ही किसी नेता ने की हो जैसा कि  विष्णु विश्वनाथ फाटक, वडोदरा ने कहा है।

क्या यह संभव नहीं कि महात्मा गांधी की हत्या गोड़से को सुपारी देकर लार्ड माऊंटबैटन और पंडित नेहरू ने नहीं करवाई हो?

इस पुस्तक के कुछ अंश इस संपादकीय के नीचे अलग से उदधृत हैं। उससे यह संदेह होता है कि महात्मा गांधी की हत्या में कांग्रेस का भी कनेक्शन है।

[पोस्टमॉर्टम गांधी के लिए नहीं हुआ। पास के अस्पताल में नहीं ले जाया गया। गोडसे ने कहा कि उसने 2 गोलियां चलाईं, सरकार ने कहा 3, मीडिया ने कहा 4. गोडसे को पहले असफल प्रयास के लिए गिरफ्तार किया गया था और माउंटबेटन ने उसे रिहा कर दिया। नेहरू की बहन ने ब्रिटेन के दूतावास से रूसियों को रोकने का आग्रह किया जिन्होंने कहा कि यह माउंटबेटन की साजिश थी।]

अब इन तथ्यों का पता लगाने की जिम्मेदारी  उन इतिहासकारों तथा थीसिस लिखने वाले विद्यार्थियों की है।

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