Editorial :- सीएए से किसी की नागरिकता नहीं पर चली गई २७ निदोर्षों की जाने

27 February 2020

जब ओबामा भारत में २०१५ में आये थे ठीक उसी समय दिल्ली डायलॉग प्रोग्राम के तहत पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में उन दिनों  हुए दंगों और चर्चों पर हुए हमलों की झूठी अफवाह फैलाते हुए केजरीवाल ने इन सबके पीछे बीजेपी का हाथ होने की आशंका जताते हुए कहा  था कि बीजेपी वाले दिल्ली में दंगे करा रहे हैं। ये लोग जहर की राजनीति करते हैं, लेकिन हम लोग प्यार-मुहब्बत की राजनीति करते हैं। ये लोग विकास की बजाय धर्म परिवर्तन की बात करते हैं, महिलाओं को मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करने, जींस न पहनने। ये लोग क्या दिल्ली का विकास करेंगे?

चुनाव के ठीक पहले उसी स्टाइल में फ्री-शुगर कोटेड मीठा धीमा जहर दिल्लीवासियों को  केजरीवाल ने दिया और नतीजा उसी का नतीजा है कि अब दिल्ली जल रही है।

शाहीनबाग को शांति का केन्द्र स्थल बताकर उसके इर्द-गिर्द जामिया जेएनयू आदि क्षेत्रों में दो महीने से भी अधिक समय से हिंसा की आग  भड़काई जाती रही है। उसमें घी डालने के लिये समय-समय पर मुस्लिमों को उकसाने और हिन्दुओं के प्रति नफरत फैलाने का काम कांग्रेस और आप पार्टी ने किया है।

शाहीनबाग में जिन्ना वाली आजादी के नारे लगे।  जामिया, जेएनयू आदि को लेकर एफआईआर पुलिस को बदनाम करने और उनका मनोबल गिराने का निरंतर प्रयास उसी प्रकार से होते रहा जैसे कि आर्मी चीफ को सड़क का गुंडा कहकर सेना को बदनाम किया गया था।

बालाकोट स्ट्राईक पर प्रश्र चिन्ह लगाये और  अभी भी पुलवामा पर पाकिस्तान की भाषा बोली जा रही है।

अमेरिका के राष्ट्रपति टं्रप के भारत आगमन के समय ही एक सोची समझी साजिश के तहत  कांग्रेस और आप पार्टी ने पीएफआई तथा अन्य मुस्लिम कट्टरपंथी तबकों के माध्यम से शांतिभंग करने का प्रयास किया।

मणिशंकर अय्यर का शाहीनबाग में पीएम मोदी को कातिल कहकर अल्पसंख्यक समुदाय को उकसाना क्या शांति की निशानी थी?

वारिस पठान के बयान १५ करोड़ भारी पड़ेंगे १०० करोड़ पर और शाहीन बाग की दादियों के कारण जली है दिल्ली यह वसीम रिजवी का कथन एक प्रकार से सही लगता है।

दिल्ली के छतों पर पत्थर फेंकने वालों की तलाशी हो रही है। अब तक १०६ लोग अरेस्ट हो चुके हैं और १८ एफआईआर दर्ज हो चुकी है परंतु कांग्रेस और आप पार्टी अपनी खूनी सियासत की राजनीति को ढ़कने के लिये भाजपा के कपिल मिश्रा तथा अन्य दो नेताओं  के नाम को उछाल रही है।

शाहीनबाग में शरजिल इमाम ने क्या कहा, शशि थरूर की उपस्थिति में जिन्ना वाली आजादी के नारे किसने लगाये, भारत के प्रधानमंत्री को कातिल किसने कहा, छ: महीने के बाद मोदी को युवा ढूंढ  ढूंढ कर डंडे मारेंगे आदि सब प्यार के बोल थे।

टं्रप के भारत आगमन के समय ही सोनिया गांधी के निर्देश पर कांग्रेस के शत्रुघ्र सिन्हा पाकिस्तान जाकर वहॉ के राष्ट्रपति से मिलते हैं और पकिस्तान के राष्ट्रपति ट्विट कर कहते हैं कि  कश्मीर पर हमारी चिंता से शत्रुघ्र सिन्हा ने सहमति बताई है।

आरएसएस को जिस प्रकार से कांग्रेस बदनाम कर रही है वही दुस्साहस कांग्रेस का नाम लेकर पाकिस्तान का प्रधानमंत्री इमरान खान कर रहा है।

इन सब बातों से स्पष्ट है कि कांगे्रस और आप पार्टी तथा उनके जैसे ही आगामी चुनाव फ्री-अलगाववाद का शुगर कोटेड जहरीली शराब पिलाकर आगामी बिहार, बंगाल, केरल आदि के चुनाव जीतने का कुचक्र हो रहा है। और यह सब कुचक्र  अलगाववाद की आग फैलाकर मुस्लिम समुदाय को भड़काकर किया जा रहा है।

परंतु यह सुनिश्चित है कि उक्त दलों का षडयंत्र भारत की जनता कभी सफल नहीं होने देगी। अतएव सभी दलों नेताओं को चाहिये कि वे सियासत की राजनीति करें परंतु अलगाववाद और दंगे भड़काकर सियासत करने का देशविरोधी कृत्य न करें।

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