Editorial :- भारत माता की जय बोलने में शर्म किसको?

3 March 2020

मुस्लिमों में नहीं बल्कि कांग्रेस के हाथ में हिन्दू विरोध के जहर का प्याला

मंगलवार को भाजपा संसदीय दल की बैठक में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह  का नाम लिए बिना पीएम मोदी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री को भारत माता की जय कहने में भी ‘बूÓ आती है। आज़ादी के समय इसी कांग्रेस में कुछ लोग वंदे मातरम बोलने के खिलाफ थे। अब इन्हें ‘भारत माता की जयÓ बोलने में भी दिक्कत हो रही है।

यहॉ यह उल्लेखनीय है कि २२ फरवरी २०२० को कहा कि राष्ट्रवाद और ‘भारत माता की जयÓ के नारे का इस्तेमाल ‘भारत की उग्र व विशुद्ध भावनात्मक छविÓ गढऩे में गलत रूप से किया जा रहा है जो लाखों नागरिकों को अलग कर देता है ।

>>  यहॉ यह उल्लेखनीय है कि भारत माता शब्द से नेहरू जी को भी ऐलर्जी थी परंतु महात्मा गांधी को नहीं।

सन् 1936 में बनारस में शिव प्रसाद गुप्त ने भारतमाता का मन्दिर निर्मित कराया। इसका उद्घाटन महात्मा गांधीजी ने किया था।

पंडित नेहरू कहते थे कि भारत का मतलब है   वह जमीन का टुकड़ा -भारत माता की जय का नारा लगाते हैं तो आप हमारे प्राकृतिक संसाधनों की जय ही करते हैं। नेहरू कहते थे हिन्दुस्तान एक ख़ूबसूरत औरत नहीं है। नंगे किसान हिन्दुस्तान हैं। वे न तो ख़ूबसूरत हैं, न देखने में अच्छे हैं

इस पर लोकशक्ति के २३ फरवरी २०२० के संपादकीय में विस्तृत चर्चा की गई है। 

>> नवंबर २०१८ को कांग्रेस के नेता ने Óभारत माता की जयÓ के नारे को रोक ‘सोनिया गांधीÓ और ‘राहुल गांधीÓ की जय के नारे लगवाए: राजस्थान के वीडियो में बीकानेर में कांग्रेस नेता बीडी कल्ला के समर्थकों ने रविवार रात को ‘भारत माता की जयÓ के नारे को बीच में रोकने के बाद ‘सोनिया गांधी जिंदाबादÓ और ‘राहुल गांधी जिंदाबादÓ के नारे लगाए।

>> अब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी भारत माता की जय को अलगाववादी देश का विभाजनकारी नारा बता दिया है।

>>  कांग्रेस के पंडित? नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी तक के नेताओं ने सत्ता लोलुपता की लालसा से मुस्लिम तुष्टिकरण के लिये   मुस्लिमों को उकसाते रहे हैं भारत माता की जय न बोलने के लिये।

इसी प्रकार की अन्य भी कांग्रेस की नीतियां रही हैं मुस्लिमों के दिलों में हिन्दुओं के प्रति नफरत पैदा करने के लिये। हम ये कह सकते हैं कि  मुस्लिम हिन्दू विरोधी नहीं हैं बल्कि कांग्रेस के हिन्दू नेता सत्ता लोलुपता के कारण मुस्लिमों का तुष्टिकरण कर उन्हें राष्ट्र की मुख्यधारा से अलग करने का कुचक्र करते रहे हैं।

>> कांग्रेस की इसी नीतियों के कारण जेएनयू, जादवपुर युनिवर्सिटी आदि केन्द्रीय शिक्षा संस्थानों मेें तिरंगा ध्वज लहराने और भारत माता की जय बोलने पर भी आपत्ति होती रही है।

>> परंतु अभी दो महीने से चल रहे सीएए विरोधी  प्रदर्शनों में चाहे वो शाहीनबाग का हो या जामिया , जेएनयू अलीगढ़ युनिवर्सिटी में हमने देखा कि  मुस्लिम महिलाओं और मुस्लिम छात्रों ने जोर-शोर से भारत माता की जय के नारे लगाये, हाथों में तिरंगा ध्वज लहराते हुए।

 >>  26 जनवरी 2020 को न्यूयॉर्क, शिकागो, ह्यूस्टन, अटलांटा और सैन फ्रांसिस्को के भारतीय वाणिज्य दूतावास और वाशिंगटन में भारतीय दूतावास में नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों ने ”भारत माता की जयÓÓ और ”हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, आपस में सब भाई-भाईÓÓ नारे लगाए ।

अमेरिका के करीब 30 शहरों में हाल में गठित संगठन ‘कोएलिशन टू स्टॉप जिनोसाइडÓ ने विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया। इसमें भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद (आईएएमसी) इक्वालिटी लैब्स, ब्लैक लाइव्स मैटर (बीएलएम), ज्यूईश वॉयस फॉर पीस (जेवीपी) और मानव अधिकारों के लिए हिंदू (एचएफएचआर) जैसे कई संगठन शामिल हैं।

इन सबका विस्तृत विवरण इस संपादकीय के नीचे अलग से दिया गया है।

भारत माता की जय बोलने में शर्म मनमोहन सिंह को क्यों?

अतएव हम ये कह सकते हैं कि मुस्लिमों के हाथों में नहीं बल्कि कांग्रेस के हाथ में हिन्दू विरोध के जहर का प्याला हैै ।

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