Editorial :- सीएए के विरोध में दंगे, साधुओं की हत्या और कोरोना की लड़ाई कमजोर करने के पीछे अफवाहों का हाथ

29 April 2020

कोरोना की अभी तक विश्व के किसी भी देश में वैक्सिन या दवाई  नहीं ढूंढ़ी है। सभी देशों के वैज्ञानिक शोध करने में संलग्र है। भारत ने विश्व के अनेक देशों को हाइड्रोक्लोरिक टैबलेट का निर्यात किया है।  ब्राजील के राष्ट्रपति ने तो इसे संजीवनी बूटी तक की संज्ञा दी है। परंतु यह होइड्रोक्लोरिन कोरोना का सटीक इलाज ही नहीं बल्कि इसका उपयोग जोखिम भरा भी है।

इसी प्रकार से प्लाज्मा थैरीपी का उपयोग दिल्ली की आप सरकार कोरोना के इलाज के लिये कर रही है। आज केन्द्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह चेताया है कि प्लाज्मा थेरिपी कोरोना का कोई इलाज नहीं है। इसलिये अनुरोध किया गया है कि जब तक शोध न हो जाये तब तक के लिये इसका उपयोग करने से बचें।

इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि केजरीवाल के प्लाज्मा थैरिपी के लिये ब्लड डोनेशन का आग्रह करने तबलीगी जमात के मौलाना साद ने तुरंत स्वीकार किया और अपने अनुयायियों को ब्लड डोनेट करने को भी कहा। यहॉ यह भी उल्लेखनीय है कि तबलीगी जमात के कारण भारत में कोरोना की लड़ाई जीतने में जो कठिनाई हो रही है उसका कारण भी मौलाना साद ही हैं।

यहॉ यह भी महत्वपूर्ण है कि तबलीगी जमात के लोगों ने सीएए के विरोध में जो शाहीनबाग को केन्द्रीत कर आंदोलन किया गया था और उसके कारण दिल्ली में जो दंगे भड़के थे उसमें भी जमात के कुछ लोगों का हाथ रहने का संदेह प्रकट मीडिया में किया गया है।

दिल्ली दंगों में और सीएए के विरोध में हिंसात्मक आंदोलन भड़काने में कांग्रेस और आप पार्टी का भी हाथ रहा है यह भी आरोप लगते रहे हैं।

उक्त तथ्यों के आधार पर केन्द्र  सरकार को सीबीआई, एनआईए, आईबी आदि संस्थाओं के माध्यम से जांच करवाकर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाये।

 पालघर के बाद बुलंदशहर में संतों की हत्या क्या साजिश है?

पालघर में साधुओं की जिस प्रकार से एक सोची समझी साजिश के तहत हत्या हुई है उसके पीछे माक्र्सवादियों, क्रिस्चियन मिशनरियों  तथा कांगे्रस का हाथ है ऐसी चर्चा है। साधुओं की हत्या के आरोप में महाराष्ट्र पुलिसे ने १०१ लोगों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों में आधे से भी अधिक की जमानत पालघर के एक क्रिस्चियन पादरी ने ली है।

पालघर में साधुओं की हत्या में १०१ ही नहीं बल्कि कई सौ लोग शामिल थे। पुलिस ड्रोन से उनको तलाश करने का अभियान चलाई हुई है। साधुओं की इस हत्या का काफी विरोध हो रहा है। संतों में विशेषकर आक्रोश है। आज २८ अप्रैल को  को देशभर के संत समाज व विहिप व संघ ने दिवंगत संतों को श्रद्धांजलि देने और विरोध का कार्यक्रम रखा। इस दिन आदि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य व संत सूरदास का जन्मदिवस भी था।

 इसी प्रकार से सोनिया गांधी और महाराष्ट्र की अघाड़ी सरकार ने पालघर में साधुओं की हत्या को बहुत हल्के से लिया है। रिपब्लिक टीवी के अरनब  गोस्वामी ने जब सोनिया गांधी से इस संबंध में सवाल किया तो उस पर हजारों एफआईआर दर्ज हुई हैं। इन सभी एफआईआर के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में तीन हफ्ते तक अरनब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है बावजूद इसके महाराष्ट्र पुलिस अरनब गोस्वामी से थाने में बुलाकर घंटो पूछताछ कर परेशान कर रही है। पत्रकार जगत ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन कहकर निन्दा की है।

पालघर में साधुओं की हुई हत्या के बाद बुलंदशहर उद्धव ठाकरे से योगी आदित्यनाथ ने भी बात की थी।

पालघर में दो साधुओं की हत्या और फिर बुलंदशहर में दो साधुओं की हत्या क्या यह सिर्फ एक संयोग है या साजिश? इसका उत्तर तो जांच के बाद ही मिल सकेगा।

  कोरोना वायरस की दवाई की अफवाह से ग्रस्त होकर  जहरीला मेथनॉल पीने से 700 इरानियों की मौत

इस संदर्भ में मुझे कुछ दिनों पूर्व की एक घटना का स्मरण हो रहा है:

चर्च में पादरी से जादुई तेल पाने के चक्कर में मची भगदड़, 20 लोगों की मौत। तंजानिया आफ्रिका महाद्वीप में है।

यह सर्वविदित है कि आफ्रिकन लोगो को ईसाइ बनाने में क्रिस्चन मिशनरियां सक्रिय रही हैं। इसी प्रकार से मुस्लिम मौलवी भी वहॉ के लोगों को इस्लाम धर्म कबुलवाने में सक्रिय रहे हैं।

झारखंड के शिबू सोरेन ने भी सोनिया गांधी से प्रभावित होकर एक बार कहा था कि ‘इसाइ मिशनरी ने उन्हें चार पाया से दोपाया बनाया है।Óअर्थात जानवर से आदमी बनाया है।

यहॉ यह उल्लेखनीय है कि कांग्रेसध्यक्ष सोनिया गंाधी दिल्ली में प्रत्येक रविवार को प्रार्थना के लिये चर्च जाती हैं।  अन्ना आंदोलन के समय एक समय मंच पर अन्ना हजारे और केजरीवाल के साथ मौजूद धर्मगुरूओं में आर्कबिशप भी मौजुद थे। आर्कबिशप यानी दिल्ली में चर्च के प्रमुख। ऐसे में सोनिया और केजरीवाल के बीच चर्च ने सेतु का काम किया है यह प्रमाणित होता है।

तंजानिया के समाचार को पढ़कर मुझे सोनिया गंाधी और उनके पारिवारिक मित्र बेनी हिन्न का स्मरण हो रहा है जो प्राय: यूपीए शासनकाल में और उसके पूर्व भी कांग्रेस शासनकाल में भारत आते रहे हैं और लोगों को हिलिंग टच के माध्यम से ईसा मसीह के चमत्कार बताकर बीमारी दूर करने का ढोंग रचते रहे हैं और इस प्रकार के प्रयासों से वे यहॉ हिन्दुओं को इसाइ भी बनाते रहे हैं।

सुनामी का प्रकोप जब दक्षिण भारत में हुआ था उस समय कांग्रेस शासित आंध्रा के हैदराबाद में और कर्नाटक के बैंगलोर में वहॉ के मुख्यमंत्रियों के सहयोग से वे इसी प्रकार के हिलिंग टच शो करके लोगों को इसाइ बनाते रहे हैं।

अफवाहों ने किस प्रकार से ७०० इरानियों को मौत के मूह में ढकेल दिया यह आज हमने देखा है। उसी प्रकार से सीएए के विरोध में जिस प्रकार से सत्ता लोलुप अलगाववादियों ने अफवाहे फैलाई और उसमें हुए दंगों में मौतें हुई यह भी हम देख चुके हैं। इसी प्रकार से हमने अभी यह भी देखा है कि किस प्रकार से अफवाहों को आधार बनाकर एक सोची समझी साजिश के तहत पालघर में साधुओं की हत्या हुई।  कोरोना के विरूद्ध लड़ाई में जिस प्रकार से सरकार और भारत की जनता लड़ाई लड़ रही है उसे अफवाहे ही कमजोर कर रही हैं। कोरोना वारियर्स डाक्टरों, नर्सो और पुलिस पर जिस प्रकार से आक्रमण हो रहे हैं उसके पीछे भी एक सोची-समझी  साजिश और अफवाहे ही हैं।