Editorial :- पाकिस्तान परस्ती देश के लिये घातक

11 May 2020

कांग्रेस के सर्वे सर्वा राहुल गांधी को चाहिये कि वे पंडित नेहरू से नीचे लिखी जो देश के लिये अहितकारी गलतियां की थी उनका प्रायश्चित करने के लिये पाकिस्तान परस्ती छोड़ें और कांग्रेस को भारत के स्वतंत्रता के बाद की मुस्लिम लीगी पार्टी न बनाएं।
नेहरू जी कश्मीरी पंडित होते हुए भी पाकिस्तान को गिफ्ट कर दिया था पीओके। हिन्दी-चीनी भाई-भाई का नारा लगाकर चाऊ एन लाई से आलिंगन कर १९८२ में भारत के हिमालय छोर के एक बड़े भूभाग को चीन को यह कहकर समर्पित कर दिया था।


इस पर उस समय के सांसद महावीर त्यागी ने जब लोकसभा में प्रश्र उठाया तो पंडित नेहरू ने उत्तर दिया था कि उस क्षेत्र में तो घांस तक नहीं उगती है। जिसके बाद महावीर त्यागी ने कहा था कि उनके सिर में बाल नहीं हैं तो क्या उसे भी आप चीन को समर्पित कर देंगे?
पंडित नेहरू प्रधानमंत्री बनने मेें की लालसा में जिन्ना से हाथ मिलाकर भारत का विभाजन तक स्वीकार कर लिया था। पाक पीएम इमरान ख़ान ने 14 फरवरी 2020 को कहा, ‘Óमैं दावे के साथ कह सकता हूं कि अर्दोआन ने अगला चुनाव पाकिस्तान में लड़ा तो वो आराम से जीत जाएंगे.
हम यह कह सकते हैं कि तुर्की के राष्ट्रपति के विरूद्ध राहुल गांधी पाक में चुनाव लड़कर वहॉ के प्रधानमंत्री बन सकते हैं।


राहुल गांधी जिन्हें भाजपा के प्रवक्ता नरसिम्हा राव ने राहुल जिन्ना की संज्ञा दी है, अपनी पाक परस्त नीतियों के कारण और मोदी विरोध के लिये देशविरोध करते हुए देखे जाने के कारण यह कहा जा सकता है कि वे इमरान खान की इस कथन को झुठला सकते हैं कि तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन पाक में चुनाव जीत जाएंगे। 370 अनुच्छेद निष्प्रभावी होने के बाद से तो पाकिस्तान के नेताओं यहॉ तक की इमरान को भी विश्वास हो चला है कि राहुल गांधी तुर्की के राष्ट्रपति को ही नहीं बल्कि इमरान खान को भी पाकिस्तान में हराकर वहॉ के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। कश्मीर के मुद्दे पर 370 अनुच्छेद निष्प्रभावी होने के बाद से पाकिस्तान को पूरे विश्व में जितने भी इस्लामिक देश हैँ उनमें से सिर्फ दो देशों मलेशिया और तुर्की का ही समर्थन मिला है।

यही कारण है कि इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सेम पित्रोदा ने राहुल गांधी के निर्देश पर इसीलिये तुर्की में कार्यालय स्थापित किया है।यहॉ यह उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह के शांतिदूत जाकिर नाईक मलेशिया में ही शरण लेकर वहॉ के हिन्दुओं के विरूद्ध जहर उगल रहे हैं।
दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरूल इस्लाम पर देशद्रोह का मुकदमा कायम है उसने भी जाकिर नाईक को अपना हीरो बताया है। मलेशिया के इतिहास का हम अध्ययन करें कि वहॉ मलेशिया मेें तामिल के हिन्दू विजयन वंश राजाओं का शासन रहा है। इस विजयन वंश के अंतिम राजा ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था इसके कारण ही उस समय की प्रथा के अनुसार वहॉ के अधिकांश हिन्दुओं ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था।

राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर कहा था ‘जम्मू-कश्मीर के लोगों की स्वतंत्रता और नागरिक आजादी पर अंकुश लगाए हुए 20 दिन हो गए हैं. विपक्ष और मीडिया को तब जम्मू-कश्मीर के लोगों पर किए जा रहे कठोर बल प्रयोग और प्रशासनिक क्रूरता का अहसास हुआ, जब उन्होंने शनिवार को श्रीनगर का दौरा करने की कोशिश की. राहुल गांधी की उक्त ट्वीट और इसी प्रकार के अन्य बयानों को पाकिस्तान के पक्ष में एक हथियार बनाकर पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र संघ तक में उछाला चुका है।
इसके बाद भी लगातार इसी प्रकार की पाकिस्तान परस्ती कांग्रेस तथा उनके अन्य नेता गुलामनबी आजाद, सैफद्दीन सोज, मणिशंकर अय्यर, नवजोत सिंह, शशि थरूर आदि करते रहे हैं। अभी-अभी ६ मई २०२० का भी समाचार है : कश्मीर पर दुष्प्रचार करने वाले फोटोग्राफर्स को मिला पुलित्जर अवार्ड, राहुल गांधी बोले हमें आप पर गर्व है।

ठीक इसके विपरीत ९ मई को जब अमेरिका के व्हाईट हाऊस में वैदिक मंत्र गूंजे उसी समय वहॉ के राष्ट्रपति टं्रप ने पुलित्जर पुरस्कार पाने वाले पत्रकारों को बताया था चोर, और कहा था सम्मान लौटाने को। इसी कड़ी में आज 132 प्रख्यात भारतीय हस्तियों ने कश्मीरी एपी फोटोग्राफर्स को पुलित्जर अवार्ड देने का विरोध किया कश्मीरी फ़ोटोग्राफऱ डार यासीन, मुख्तार ख़ान, और एसोसिएटेड प्रेस के चन्नी आनंद को दिए गए 2020 के पुलित्जऱ पुरस्कार का विरोध करते हुए रविवार को 132 प्रतिष्ठित भारतीय हस्तियों ने पुलित्जऱ पुरस्कार 2020 के प्रशासक, बोर्ड और जूरी को एक खुला पत्र लिखा है। पत्र ने ‘कश्मीर के प्रतियोगिता क्षेत्रÓ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है, जिसमें कहा गया है कि यह भारत की संप्रभुता और भारतीय संविधान के अपमान पर हमला था। पत्र के 132 हस्ताक्षरों में पद्म पुरस्कार विजेता, पूर्व सांसद, सेना के अधिकारी और कई भारतीय सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल हैं।