Editorial :- USCIRF पर तमाचा जड़ती नारी शक्ति- शहीद अजय की बेटी शीन-सुनंदा वशिष्ट-आरती टिक्कू सिंह

12 June 2020

आज के प्रमुख समाचार हैें: 

१. Óआंसू नहीं बहाऊंगीÓ, अजय पंडिता की बेटी की हिम्मत को करेंगे सलाम।

२. अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की टीम को  वीजा देने से भारत का इनकार।

भारत सरकार ने अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआइआरएफ) की टीम को वीजा देने से इन्कार कर दिया है। यह टीम भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का आकलन करने के लिए आना चाहती थी। सरकार ने साफ कर दिया है कि भारतीयों के संविधान संरक्षित अधिकारों पर किसी विदेशी संस्था को बोलने का हक नहीं है।

भारत ने विवादास्पद स्ष्टढ्ढक्रस्न टीमों को वीजा देने से किया इनकार, रूश्व्र का कहना है कि ‘पूर्वाग्रहितÓ संस्था का देश के मामलों में कोई स्थान नहीं है।

सरकार ने अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआइआरएफ) की टीम को वीजा देने से इन्कार कर दिया है। यह टीम भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का आकलन करने के लिए आना चाहती थी। सरकार ने साफ कर दिया है कि भारतीयों के संविधान संरक्षित अधिकारों पर किसी विदेशी संस्था को बोलने का हक नहीं है।

विदेश मंत्री ने कहा कि यूएससीआइआरएफ को भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भ्रामक, पक्षपाती और गलत सूचनाएं फैलाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि हम इस तरह की संस्थाओं की बातों को तवज्जो नहीं देते। विदेश मंत्रालय संस्था की टिप्पणी को गलत और अवांछित करार देता है।

  लोकसभा में नागरिक संशोधन बिल पास होने के बाद यूएससीआइआरएफ द्वारा गृह मंत्री अमित शाह पर पाबंदी लगाने की मांग के मुद्दे उठाया था।  

यहॉ यह उल्लेखनीय है कि जब ओबामा यूएस के राष्ट्रपति थे और नरेन्द्र मोदी गुजरात के मंत्री थे  तब भारतीय मूल की प्रिता बंसल स्ष्टढ्ढक्रस्न की चीफ थीं। प्रिता बंसल ने ही उस समय नरेन्द्र मोदी जी का वीसा रद्द किया था।

अमेरिका के लिए धार्मिक स्वतंत्रता का मतलब है कि दुनिया को ईसाई धर्म में बदल दें?

मोदी सरकार द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करने वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को वीजा देने से इनकार करने के एक महीने बाद, प्रतिनिधिमंडल के अधिकारियों में से एक डॉ। कैटरीना लैंटोस स्विट ने धर्मशाला में विवादास्पद चीन विरोधी सम्मेलन में भाग लिये थे। 

भाग लेने के बाद उन्होंने कहा था : “मैंने भारत की यात्रा की और अमेरिका वापस आया,” डॉ। लैंटोस स्विट ने टेलीफ ोन पर द हिंदू को बताया, पुष्टि की कि उसे वास्तव में पर्यटन के लिए ई-वीजा मिला था, बावजूद इसके चीन के धर्मशाला में हुए सम्मेलन में भाग लिया था।

“जैसा कि आप जानते हैं कि मैं दो टोपी पहनता हूं, मानवाधिकार और लोंबिरोस फ ाउंडेशन पर लैंटोस फ ाउंडेशन। इस अवसर पर मैं स्ष्टढ्ढक्रस्न के प्रतिनिधि के रूप में यात्रा नहीं कर रहा था, “उसने समझाया।

इससे हम समझ सकते हैं कि तबलीगी जमात में टूरिस्ट वीसा के नाम पर दिल्ली के मकरज में जो सम्मिलित हुए थे उनमें और स्ष्टढ्ढक्रस्न के डॉ ललैंटोस स्विट में कितनी समानता है?

03 मई 2016 को द हिंदू ने रिपोर्ट की:वॉशिंगटन लौटने के कुछ ही घंटों के भीतर, नई दिल्ली के डिस्फ़ैक्शन में, डॉ। लैंटोस स्विट ने नवीनतम अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (स्ष्टढ्ढक्रस्न) की रिपोर्ट जारी की, जिसमें भारत को एक नकारात्मक रेटिंग दी गई और इसे “ञ्जढ्ढढ्ढ ढ्ढढ्ढ देशों” की निगरानी में रखा गया।

अमेरिका की यह संस्था स्ष्टढ्ढक्रस्न धार्मिक स्वतंत्रता की विश्व में ठेकेदार बनी हुई है। जबकि अमेरिका में कितनी धार्मिक स्वतंत्रता है इसके उदाहरण कन्वर्टेड रिचर्ड वर्मा (अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत) प्रिता बंसल और ओबामा। 

अमेरिका के एक और कन्वर्टेड रिपब्लिकन नेता बॉबी जिंदल ने तो यहॉ तक कहा था कि उनके दोस्त के बारंबार आग्रह से परेशान होकर उन्होंने इसाइ धर्म स्वीकार कर लिया जबकि जिंदगी में उन्होंने बाईबिल कभी नहीं पढ़ा।

स्ष्टढ्ढक्रस्न पर तमाचा जडऩे वाली भारत की तीन बेटियों की चर्चा यहॉ करना आवश्यक है ।

Óआंसू नहीं बहाऊंगीÓ, अजय पंडिता की बेटी की हिम्मत को करेंगे सलाम

आंखों में आंसू और दिल में वेदना लिए एक बेटी अपने पिता के हत्यारे आतंकियों को ललकार रही है। ‘..कायरो तुम में अगर हिम्मत है तो सामने आओ। मैं तुम्हें छोड़ूगी नहीं। गोली तो मैं तुम्हें मारूंगी। कब तक बुजदिलों की तरह हत्याएं करते रहोगे।Ó यह बहादुर बेटी है शीन पंडिता, जिसके पिता सरपंच अजय पंडिता (भारती) को आतंकियों ने दो दिन पहले दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में गोलियों से भूनकर मौत के घात उतार दिया था। कश्मीरी भाषा में शीन को बर्फ कहते हैं, लेकिन पिता के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए शीन ज्वाला बन चुकी है। शीन ने कहा कि पापा ने अपना कर्तव्य निभा दिया अब सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाए।

जम्मू में बुधवार को मीडिया से बातचीत में शीन पंडिता ने कहा कि मुझे गर्व है कि मैं अजय भारती की बेटी हूं। पापा मुझे कहते थे कि तू मेरा शेरा है। मैं अपने पापा को विश्वास दिलाती हूं कि उनका यह शेर उनके हत्यारों को बख्शेगा नहीं। कायर आतंकियों ने एक शेर को मारा है। अब मैं उन्हें मारूंगी। न मैं कभी डरूंगी और न कभी हारूंगी। आंसू पोंछते हुए शीन ने कहा कि पिता को खो देने का गम मेरा परिवार ही जानता है। मेरी मां, बुआ, दादी को बड़ा झटका लगा है।

 ‘1990 में इस्लामिक स्टेट जैसी क्रूरता पंडितों के साथ हुईÓ : सुनंदा वशिष्ट

अमेरिका में मानवाधिकार पर आयोजित सम्मेलन में कश्मीरी मूल की लेखिका सुनंदा वशिष्ठ का भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सुनंदा ने आर्टिकल 370 समाप्त किए जाने का समर्थन करते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों को धार्मिक पहचान के कारण निशाना बनाया गया।सुनंदा ने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं ने 1990 के दौर में भयानक हिंसा झेली, वह ‘1990 के इस्लामिक स्टेट ढ्ढस् जैसी क्रूरता थी 

सुनंदा वशिष्ट ने कहा, ‘मेरे माता-पिता कश्मीरी पंडित हैं, मैं हिंदू कश्मीरी पंडित हूं। हम कश्मीर के उस पीडि़त समुदाय से आते हैं जिन्हें इस्लामिक कट्टरपंथ के कारण अपना घर छोडऩे के लिए मजबूर होना पड़ा। हिंदू महिलाओं का गैंगरेप किया गया और उनके शव के टुकड़े कर के फेंके गए। खून से लथपथ, हिंसा से आक्रांत हम मजबूर और डरे हुए लोग थे जिन्हें अपना घर छोडऩा पड़ा।Ó यह सब कुछ धर्म के नाम पर संगठित होकर किया गया था।Ó 

उन्होंने कहा, ‘अमेरिका ही नहीं बाकी दुनिया ने भी इस्लामिक आतंकवाद का नाम नहीं सुना था, लेकिन उस दौर में हमने उसे भोगा। 

>> सुनंदा ने कहा- 1990 में कश्मीरी पंडितों को जब निकाला जा रहा था तो उन्हें तीन विकल्प दिए गए: भाग जाओ, धर्म परिवर्तन करा लो या मर जाओ।

‘पाकिस्तान की तरह भारत की पहचान 70 साल पुरानी नहीं; कश्मीर के बिना भारत नहीं और भारत के बिना कोई कश्मीर नहींÓ।

>> टाईम्स ऑफ इंडिया की पत्रकार आरती टिक्कू सिंह ने अमेरिका की विदेश मामलों की एक समिति की सुनवाई में हिस्सा लिया था। 

भारतीय पत्रकार  आरती टीकू ने अमेरिकी संसद में कहा  पाक के कश्मीर में इस्लामी जिहाद को बढ़ावा देने को मीडिया ने किया नजऱअंदाजÓ – कांग्रेस के आमंत्रण पर उसके सामने गवाही के लिए अमेरिका पहुंची आरती टीकू सिंह ने कहा, ”संघर्ष के इन 30 वर्ष में पाकिस्तान द्वारा कश्मीर में इस्लामी जिहाद और आतंकवाद को दिए गए बढ़ावे को दुनिया की मीडिया  ने पूरी तरह नजरअंदाज किया. दुनिया में कोई मानवाधिकार कार्यकर्ता और कोई प्रेस नहीं है, जिसे लगता हो कि कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवाद के पीडि़तों के बारे में बात करना और लिखना उनका नैतिक दायित्व है.ÓÓ