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झारखंड आईएमए ने महाराष्ट्र में डॉक्टरों पर चाकूबाजी की घटना का किया विरोध

सांकेतिक तस्वीर

Ranchi: महाराष्ट्र के यवतमाल में एक मरीज ने दो रेजिडेंट डाक्टरों को चाकू मार कर घायल कर दिया. जिसके बाद पूरे देश में इस घटना की निंदा की जा रही है. वहीं झारखंड आईएमए ने भी इस घटना का विरोध किया है. साथ ही झारखंड में हॉस्पिटल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की है. आईएमए के प्रदेश सचिव डॉ प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि यह बहुत ही शर्मसार करने वाली घटना है. जो डॉक्टर मरीजों की जान बचाते हैं उसके साथ इस तरह की घटना की जितनी निंदा की जाए कम है. लेकिन सरकार को अब प्रोटेक्शन एक्ट लाना होगा ताकि डॉक्टर सुरक्षित रहें और अपना काम सही से कर सके. उन्होंने बताया कि अगर यह घटना होती रही तो कोई भी इस पेशे में नहीं आएगा. डॉक्टरों पर हिंसा का यह नया स्तर दर्ज किया गया है. आईएमए ने कहा है कि उसे लगता है कि डॉक्टरों और नर्सों के लिए एक सुरक्षित कार्यस्थल प्रदान करने के लिए एक मजबूत निवारक केंद्रीय कानून की आवश्यकता है. पहले कदम के तौर पर आईएमए ने अस्पतालों को सेफ जोन घोषित करने की मांग की है. तीन स्तरीय सुरक्षा कवर, आगंतुकों पर प्रतिबंध, सीसीटीवी कैमरों का प्रावधान और परामर्श सेवाएं में कुछ सुझाव हैं. सरकार को इस कभी न खत्म होने वाले खतरे का स्थायी समाधान खोजने की जरूरत है.

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अस्पताल में किसी भी तरह की हिंसा अस्वीकार्य है: राष्ट्रीय आईएमए

राष्ट्रीय आईएमए ने सभी राज्यों को पत्र लिख बताया कि अस्पताल में किसी भी तरह की हिंसा अस्वीकार्य है. हमारे अस्पतालों में व्याप्त भय के माहौल के कारण डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य सेवा पेशेवर बहुत तनाव में काम करते हैं. अस्पतालों में हिंसा की यह घटना पूरे देश में पूरे डाक्टर समुदाय को हतोत्साहित करती है. स्थिति की परवाह किए बिना सरकार को एक्शन लेना होगा. 23 राज्यों में डॉक्टरों और अस्पतालों पर हिंसा के खिलाफ कानून है. हालांकि, एक केंद्रीय कानून की अनुपस्थिति ने जमीन पर प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न की है. इस अपराध के लिए बहुत कम दोष सिद्ध हुए हैं. महामारी के दौरान बढ़ी हुई हिंसा एक विचारणीय मुद्दा बन गई.

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