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गांव-गांव युवा युवतियों का संबल बनी ग्राम स्वरोजगार योजना

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ग्राम स्वरोजगार योजना से गांवों में लगातार सकारात्मक बदलाव आ रहा है। योजना से लोगों को न सिर्फ काम मिला है, बल्कि उनके लिए आर्थिक विकास के कई रास्ते खुलने लगे हैं। आज गांव की महिलाएं केवल परिवार एवं गृहस्थी तक ही सीमित नहीं है, वह भी अपने कार्यों से स्वयं की पहचान बनाना चाहती है, बस उन्हें तलाश है तो केवल एक अवसर की और यही अवसर उन्हें ग्राम स्वरोजगार योजना दे रही है। जिससे वे आज सालाना अच्छी आय अर्जित कर सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना रही है। 
 इसी तरह गीदम विकासखंड अंतर्गत ग्राम झोडि़याबाड़म निवासी श्रीमती राजेश्वरी सेठिया योजना का लाभ लेकर खुद का किराना दुकान का व्यवसाय प्रारंभ कर अपने एवं परिवार के लिए आर्थिक रूप से संबल बनी हुई है। राजेश्वरी बताती है कि मन में शुरू से इच्छा थी कि घर-परिवार को संभालने के साथ ही गांव में ही व्यवसाय स्थापित कर स्वयं की पहचान के साथ परिवार का सहयोग कर सकूं। इस दौरान उन्हें ग्राम सभा की बैठक में जानकारी मिली कि जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के द्वारा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। जिससे उन्होंने जानकारी प्राप्त कर योजना का लाभ लेने का सोचा। 
ग्राम स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 50 हजार रूपये का ऋण मिल गया। आज उनका खुद का किराना दुकान है। आज वह माह में 3 से 4 हजार रुपए आय प्राप्त कर रहे है। आय बढ़ने से वे अपने परिवार के लिए काफी कुछ कर पा रही हैं। वे कहती है कि यह योजना परिवार का आर्थिक स्तर सुधारने में बड़ी मिसाल बनी है। इस योजना का लाभ लेकर गांव के युवा, उद्यमी बनने के साथ आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं। शासन प्रशासन द्वारा युवा, युवतियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए कई प्रयास कर रही है। साथ ही स्थानीय लोगों को आय का जरिया उपलब्ध कराने और स्व-रोजगार के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।
स.क्र./17/देविका