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कानपुर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. विनय पाठक के खिलाफ CBI ने दर्ज किया केस, रंगदारी-कमीशनखोरी के हैं आरोप

कानपुर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. विनय पाठक के खिलाफ CBI ने दर्ज किया केस, रंगदारी-कमीशनखोरी के हैं आरोप

कानपुर: कानपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) के केस दर्ज किया है। प्रो. विनय पाठक के खिलाफ सीबीआई रंगदारी, कमीशनखोरी और अवैध वसूली के आरोपों की जांच करेगी। इन्हीं आरोप के तहत उनके खिलाफ सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। राज्य सरकार की सिफारिश के बाद सीबीआई ने केस दर्ज कर प्रो. विनय पाठक पर जांच का शिकंजा कस दिया है। जानकारी के मुताबिक इससे पहले प्रो. विनय पाठक और एक करीबी के खिलाफ लखनऊ के इंदिरा नगर थाने में 29 अक्टूबर को केस दर्ज किया गया था।

कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय पाठक के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को केस दर्ज कर लिया है। भ्रष्टाचार के मामले में प्रो. पाठक और XLICT कंपनी के मालिक अजय मिश्रा को आरोपी बनाया गया है। इससे पहले एसटीएफ द्वारा इसकी विवेचना की जा रही थी। इस दौरान अजय मिश्रा, अजय जैन और संतोष सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। जबकि पाठक को कई बार नोटिस भेजकर एसटीएफ मुख्यालय तलब किया गया। लेकिन वह नहीं पहुंचे। गौरतलब है कि, यूपी सरकार ने भी इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।

ये है मामला
आगरा यूनिवर्सिटी में टेंडर के बदले कमीशनखोरी के मामले में फंसे प्रो. पाठक पर जबरन बंधक बनवाकर पैसे वसूलने का आरोप है। पीड़ित की माने तो इन्होंने अजय मिश्रा के साथ मिलकर कई अन्य बिलों को पास करने के नाम पर पीड़ित से रुपए वसूले हैं। आरोप है कि अजय मिश्रा ने इंटरनेशनल बिजनेस फार्म्स अलवर राजस्थान के खाते में करीब 73 लाख रुपये भी ट्रांसफर करवाएं थे। पीड़ित के मुताबिक, अबतक उससे करीब डेढ़ करोड़ रुपए की कमीशन ली गई है। वहीं इस मामले की जांच एसटीएफ कर रही थी। इसके साथ प्रवर्तन निदेशालय की रडार पर भी प्रो. विनय पाठक हैं।

पूर्व विधायकों ने भी जांच कराने की राज्यपाल से की थी मांगइससे पहले छह पूर्व विधायकों ने भी प्रो. पाठक पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर राज्यपाल आनंदबेन पटेल से ईडी, आईटी और सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी। जानकारी के मुताबिक, प्रो. विनय पाठक ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) में तैनाती के दौरान भी खूब मनमानी की थी। प्रो. पाठक एकेटीयू के घटक संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) में अपने करीबी निर्माण एजेंसी से लेकर आपूर्ति करने वाली फर्म को खुले हाथ से काम देते गए। इसकी शिकायत होने पर राजभवन ने जनवरी में हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में कमेटी से जांच कराई। इसके बाद उन पर लगे कई आरोप सही पाये गये थे।

2009 में उत्तराखंड के ओपन यूनिवर्सिटी के बने थे वीसीप्रोफेसर विनय पाठक 2009 में ओपन यूनिवर्सिटी उत्तराखंड के कुलपति का कार्यभार संभालने से पहले HBTI कानपुर में सहायक प्रोफेसर, IIT कानपुर में परियोजना वैज्ञानिक और फिर HBTI कानपुर में प्रोफेसर और डीन के रूप में कार्य किया था। आगरा के डॉ. भीमराव अंबेडकर विवि, एकेटीयू के साथ-साथ ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्विद्यालय का भी कार्यभार संभाल चुके हैं। इसके बाद उन्हें कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में कार्यभार ग्रहण किया।
रिपोर्ट- संदीप तिवारी