Editorial :- मोदी सरकार ने LAC पर हुए समझौतों को दिया तलाक   कांग्रेस चाईना को दे तलाक

28 June 2020

महात्मा गांधी की अंतिम इच्छा थी कि स्वतंत्रता के बाद कांग्र्रेस पार्टी का बने रहना ठीक नहीं रहेगा। इसके दुरपयोग होने की संभावना को देखते हुए उन्होंने कहा था कि कांग्रेस को भंग कर देना चाहिये। संबंधित दस्तावेजों का उल्लेख जयललिता जी ने  मद्रास विधानसभा में एक बहस के दौरान भी किया था। 

अभी हाल ही में भी गांधी परिवार की गांधी फाउंडेशन की जो सौदेबाजी चाईना की कम्युनिस्ट पार्टी और वहॉ की सरकार के बीच हुई है उसकी चर्चा मीडिया में हो रही है। 

इन सब घटनाओं को देखते हुए एक तबके की  यह भी सलाह है कि यदि कांग्रेस पार्टी को भंग न किया जाये तो कम से कम अब समय आ गया है कि कांग्रेस पार्टी गांधी परिवार से अपना संबंध विच्छेद कर ले। 

२००८ में कांग्रेस पार्टी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच एक रूश हुआ था। उस पर सोनिया गांधी की उपस्थिति में राहुल गांधी ने हस्ताक्षर किये थे। 

कांग्रेस के विरोधियों का आरोप है कि उस एमओयू पर हस्ताक्षर करने के बाद से राहुल गांधी परिवार चीन के पक्ष में और भारत के हितों के विरूद्ध कार्य कर रहे हैं। 

डोकलाम विवाद के समय उनका चीनी राजदूत से दो बार गुपचुप तरीके से मुलाकात करना और मानसरोवर की धार्मिक यात्रा करते समय चीन के  एक मंत्री से मुलाकात करना उचित नहीं माना जा रहा है। 

अभी कुछ खुलासे इंंडिया में हुए हैं जिससे यह पता चलता है कि राजीव गांधी फाउंडेशन और उसके अंतर्गत कार्य कर रही शोध संस्था राजीव गांधी इंस्टीट्यूट फॉर कंटेम्परेरी स्टडी को चाईना की सरकार और एम्बेसी से भी आर्थिक सहायता मिली थी। 

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बताया  कि भाजपा ने कुछ दिन पहले ट्वीट करके राजीव गांधी फाउंडेशन पर प्रश्न उठाए थे, आज पी चिदंबरम कहते हैं कि फाउंडेशन पैसे लौटा देगा। देश के पूर्व वित्त मंत्री जो खुद बेल पर हों, उसके द्वारा ये स्वीकारना होगा कि देश के अहित में फाउंडेशन ने नियम की अवहेलना करते हुए फंड लिया।

यहॉ यह उल्लेखनीय है कि जाकिर नाईक के एनजीओ से भी राजीव गांधी फाउंडेशन को धन मिला था। उस समय यह प्रश्र उठने पर कांग्रेस ने कहा था कि उसने वह दान में मिला धन जाकिर नाईक को वापस कर दिया है। 

आज समाचार पत्रों में यह भी चर्चा रही की राजीव गांधी फाउंडेशन को मेहुल चौकसी से भी २०१४ में धन मिला था क्या उसको भी कांगे्रस वापस करेगी? 

इसी प्रकार से आरोप लगते रहे हैँ  कि अनेक ऐसे घोटाले हैं जिनसे कांग्रेस ने धन प्राप्त किया। तो क्या कांग्रेस उन्हें भी लौटायेगी? 

इसी प्रकार से सोनिया गांधी ने लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को वापस लाने के लिये रेल किराया कांग्रेस देगी यह भी कहा गया था। उस समय यह प्रश्र किया गया था कि गांधी परिवार और कांग्रेस के पास इतना कितना धन है? 

इन सभी घटनाक्रम को देखते हुए कुछ लोगों का विचार है कि कांग्रेस फाउंडेशन को भंग कर देना चाहिये। 

गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत भारतीय सैनिकों के साथ जो झड़प हुई थी उसमें हमारे २० सैनिक शहीद हुए थे उसके बाद भारत सरकार ने १९९३,१९९६ और २००५ में जो एलएसी को लेकर जो समझौता हुआ था उससे अलग हटकर निर्णय लेकर भारत की सेना को फ्री हैंड दिया है कि वह परिस्थिति को देखते हुए आवश्यक समझे तो गोली भी चला सकती है।

अतएव मोदी सरकार उक्त संधियों को तलाक दे सकती है तो कांगे्रस चीन को क्यों तलाक नहीं दे सकती? 

 एलएसी पर जो विवाद चल रहा है उसका कारण १९९३ में ष्टशठ्ठद्दह्म्द्गह्यह्य ने चीन से समझौते में नहीं जोडऩे दिया था ‘मौजूदाÓ शब्द- पूर्व सैन्य लेफ्टिनेंट जनरल शेकेतकरं  ने बताया पूरा घटनाक्रम।

लेफ्टिनेंट जनरल शेकेतकर, के अनुसार :  “1993 और 1996 के एंग्रीमेंट के बीच लिंक है। आपको इनमें समानताएं भी मिलेंगी। उस वक्त आगे के विवादों को रोकना/काबू रखने पर ही सबका जोर था। एग्रीमेंट में हम लाइन ऑफ कंट्रोल के बजाय एक्जिस्टिंग लाइन ऑफ कंट्रोल (द्ग3द्बह्यह्लद्बठ्ठद्द) चाहते थे। चीनियों ने इस पर आपत्ति जताई थी, पर हमने राजनयिकों से कहा था- ये अच्छी चीज है। अगर इस शब्द इस्तेमाल होगा, तब चीनियों के पास भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने का कोई स्कोप ही नहीं होगा। पर कुछ कारणों से ऐसा नहीं हुआ था।”

यहॉ यह उल्लेखनीय है कि जिस प्रकार से १९९३ में द्ग3द्बह्यह्लद्बठ्ठद्द शब्द समझौते में न जोड़कर कांग्रेस ने चीन के जाल में फंस कर कन्फ्यूजन क्रिएट कर दिया जिसके कांरण एलएसी पर चीन घुसपैठ करते रहा है और उसे कांगे्रस अब भारत की सीमा में चीन घुसा यह कहकर मोदी सरकार की आलोचना कर रही है।

यह कांग्रेस की कांग्रेस के महान नेताओं की आदत ही रही है। सेक्युलरिज्म शब्द की व्याख्या कांग्रेस अपने फायदे के लिये समय-समय पर करते रही है परंतु इसकी परिभाषा संविधान में नहीं दी गई है। इसी प्रकार से दलित शब्द का भी दुरपयोग बहुत हो रहा है जबकि इस शब्द का उल्लेख संविधान में नही है। और इसीलिये मोदी सरकार ने राज्य सरकारों को यह कहा भी है कि शासकीय कार्यों में दलित शब्द का उपयोग न हो। 

Congress ने चीन से समझौते में नहीं जोडऩे दिया था Existing शब्द- पूर्व सैन्य अफसर ने बताई कहानी

पीएलए मोर्चा CAIFC जिसने सोनिया गांधी के नेतृत्व वाले राजीव गांधी फाउंडेशन को दान किया था, एफ बीआई के रडार के तहत था

संयुक्त राज्य अमेरिका की घरेलू खुफिया और सुरक्षा सेवा संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चाइना एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल फ्रेंडली कॉन्टैक्ट (ष्ट्रढ्ढस्नष्ट) एक ‘संदिग्ध विस्तारÓ था। चीनी सेना और जासूसी गतिविधियों में भी शामिल थी।

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के संदिग्ध संबंधों के साथ इस संबंध का नाम राजीव गांधी फाउंडेशन वेबसाइट और राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेम्परेरी स्टडीज के दानदाताओं की सूची में पाया गया है।

टाइम्स नाउ द्वारा एक्सेस की गई यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन द्वारा अगस्त 2018 की रिपोर्ट के अनुसार , सीएआईएफसी सीधे पीएलए केंद्रीय सैन्य आयोग के राजनीतिक कार्य विभाग को रिपोर्ट करता है और सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के हाथ के रूप में, इसका मुख्य काम विदेशों में चीनी सेना को बढ़ावा देना है। 

राजीव गांधी फाउंडेशन के चीन कनेक्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है. राजीव गांधी फाउंडेशन की वेबसाइट का हवाला देते हुए अमित मालवीय ने ट्वीट किया, ‘साल 2004-05 में राजीव गांधी इंस्टीट्यूट फॉर कंटेम्पोरेरी स्टडीज द्वारा शुरू की गई गतिविधियों में से एक है चाइना एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल फ्रेंडली कॉन्टैक्ट (ष्ट्रढ्ढस्नष्ट) के रूप में सूचीबद्ध होना.Ó

अमित मालवीय ने कहा, ‘ष्ट्रढ्ढस्नष्ट चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की छवि बनाने, खुफिया जानकारी जुटाने और प्रोपेगेंडा चलाने का काम करती है.Ó अमित मालवीय ने राजीव गांधी फाउंडेशन की वेबसाइट में ‘हमारी कहानीÓ सेक्शन में दी गई गतिविधियों और ष्ट्रढ्ढस्नष्ट के काम की जानकारी के स्क्रीनशॉट को भी ट्वीट किया है.

 भाजपा अध्यक्ष  जेपी नड्डा ने बताया कि भाजपा ने कुछ दिन पहले ट्वीट करके राजीव गांधी फाउंडेशन पर प्रश्न उठाए थे, आज पी चिदंबरम कहते हैं कि फाउंडेशन पैसे लौटा देगा। देश के पूर्व वित्त मंत्री जो खुद बेल पर हों, उसके द्वारा ये स्वीकारना होगा कि देश के अहित में फाउंडेशन ने नियम की अवहेलना करते हुए फंड लिया।

ष्टशठ्ठद्दह्म्द्गह्यह्य ने चीन से समझौते में नहीं जोडऩे दिया था ‘Ó द्ग3द्बह्यह्लद्बठ्ठद्द  शब्द- पूर्व सैन्य अफसर ने बताई कहानी

 बकौल लेफ्टिनेंट जनरल शेकेतकर, “1993 और 1996 के एंग्रीमेंट के बीच लिंक है। आपको इनमें समानताएं भी मिलेंगी। उस वक्त आगे के विवादों को रोकना/काबू रखने पर ही सबका जोर था। एग्रीमेंट में हम लाइन ऑफ कंट्रोल के बजाय एक्जिस्टिंग लाइन ऑफ कंट्रोल द्ग3द्बह्यह्लद्बठ्ठद्द चाहते थे। चीनियों ने इस पर आपत्ति जताई थी, पर हमने राजनयिकों से कहा था- ये अच्छी चीज है। अगर इस शब्द इस्तेमाल होगा, तब चीनियों के पास भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने का कोई स्कोप ही नहीं होगा। पर कुछ कारणों से ऐसा नहीं हुआ था।”

 भारत और चीन में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प के बीच पूर्व सैन्य अफसर लेफ्टिनेंट जनरल डीबी शेकेतकर ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि क्क्र सरकार ने चीन से समझौते में ‘मौजूदाÓ शब्द जोडऩे नहीं दिया था। ऐसा इसलिए हुआ था, क्योंकि चीन की तरफ से इस शब्द पर आपत्ति जताई गई थी। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल ने इसके अलावा कांग्रेस काल के दो बाबुओं के नाम भी लिए।

गुरुवार को अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘ञ्जद्बद्वद्गह्य हृश2Ó पर एक डिबेट के दौरान उन्होंने बताया, “मैं 1993 के पीस एंड ट्रैंक्वेरिटी एग्रीमेंट की ड्राफ्टिंग और अन्य मुद्दों से बहुत करीब से जुड़ा था। तब एक ज्वॉइंट वर्किंग ग्रुप था, जो इस पर काम कर रहा था। मैं उस समय सेना मुख्यालय का प्रतिधिनित्व कर रहा था और मैं मिलिट्री ऑपरेशंस में डिप्टी डायरेक्टर जनरल था। जो ड्राफ्ट आया था, उस पर हम ही लोग काम कर रहे थे। जब इस एग्रीमेंट पर साइन हुए थे, तब प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने सीमा मामलों से निपटने के लिए एक्सपर्ट ग्रुप की नियुक्ति की थी। मंन इस दौरान कश्मीर में आतंक संबंधी ऑपरशेंस हैंडल (मेजर जनरल) कर रहा था। मैं सीधे तौर पर तो हिस्सा तो नहीं लेता था, पर मुझसे सलाह ली जाती थी।”

उन्होंने आगे बताया, “डिप्लोमैट अधिक योग्य होते हैं। उनके काम करने के अपने तरीके होते हैं। चर्चा के दौरान सेना प्रमुख ने कह दिया था कि मैं नहीं बदल सकता हूं। मुझे अंग्रेजी ‘सिखाईÓ गई थी। डिक्शनरी का हवाला देते हुए बताया गया कि रु्रष्ट और मौजूदा रु्रष्ट में क्या अंतर होता है।”

एंकर नविका कुमार ने इसी दौरान पूर्व जनरल से पूछा कि आपको उस दौरान किसने अंग्रेजी का पाठ पढ़ाया था? उन्होंने जवाब दिया- हम विदेश मंत्रालय के अफसरों के साथ चर्चा कर रहे थे। जयंत दीक्षित विदेश सचिव थे। शिवशंकर मेनन, जो ज्वॉइंट सेक्रेट्री थे। अशोक कांत भी थे लूप में, पर चीनियों ने मौजूदा शब्द के लिए न कर दी। अगर हम उस वक्त इस शब्द के लिए राजी हो गए होते, तब इतना सब होता ही नहीं।

राकांपा (हृष्टक्क) अध्यक्ष शरद पवार ने कहा- “हम यह नहीं भूल सकते कि 1962 में क्या हुआ था जब चीन ने भारत के क्षेत्र के 45,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। ये आरोप लगाते समय, किसी को यह भी देखना चाहिए कि अतीत में क्या हुआ था। यह राष्ट्रीय हित का मुद्दा है और किसी को इस पर राजनीति में नहीं करनी चाहिए।”

 उन्होंने कहा – “जब भी चीनी सैनिकों ने भारतीय जमीन पर अतिक्रमण करने की कोशिश की, हमारे सैनिकों ने चीनी सेना के जवानों को पीछे धकेलने का प्रयास किया है। यह कहना कि यह किसी एक की असफलता है या किसी रक्षा मंत्री की विफलता है, सही नहीं है। अगर हमारी सेना अलर्ट पर नहीं होती, तो हमें चीनी दावे की जानकारी नहीं होती।”पवार ने भारत और चीन के बीच समझौते का हवाला देते हुए बताया कि दोनों राष्ट्रों ने एलएसी पर बंदूक का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया था।

गाल्वन घाटी में 20 भारतीय सैनिकों के मारे जाने की घटना के बाद भारतीय सेना द्वारा नियमों में परिवर्तन (आरओई) में एक महत्वपूर्ण बदलाव, “नियंत्रण की स्थितियों को संभालने” के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ तैनात कमांडरों को “कार्रवाई की पूर्ण स्वतंत्रता” देता है

 आरओई में संशोधन 15 जून को गालवान घाटी में 45 वर्षों में अपने पहले घातक संघर्ष में लगे भारतीय और चीनी सैनिकों के बाद आता है , जिसके परिणामस्वरूप 20 भारतीय सेना के जवान और कई चीनी हताहत हुए ।