Editorial :- नेपाल में भारत के प्रभाव को खत्म करना चाहती हैं चीनी लोन वुल्फ  हाओ यांकी

10 July 2020

>> चीन की राजदूत हाओ यांकी के खिलाफ नेपाल में सड़क से लेकर राजनीतिक गलियारे तक विरोध तेज।

>> हाओ यांकी ने नेपाली पीएम से लेकर सेना प्रमुख तक को अपने इशारों पर चलने के लिए मजबूर किया।

>> उर्दू बोलने में माहिर हाओ नेपाल में भारत और अमेरिका के खिलाफ चीनी अजेंडे को सेट कर रहीं।

कुछ वर्षों से लोन वुल्फ अटैक बन गया आतंक का नया जरिया।

. ये तरीका उनके लिए ज्यादा आसान है, क्योंकि इसके लिए दहशतगर्दों को किसी बड़ी योजना या साधनों की जरूरत नहीं पड़ती. हाल की के दिनों में दुनियाभर में लोन वुल्फ अटैक में सैंकड़ों लोगों की जान जा चुकी है. कई मामलों में हमलावरों ने या तो खुद को खत्म कर लिया या फिर पुलिस से मुठभेड़ में वे मारे गए.

>> नेपाल में चीनी राजदूत होउ यांकी ऐसी लोन वुल्फ है जो नेपाल में कुटनीतिक अटैक बिना खुद को खत्म किये कर रही है। 

चीन की राजदूत होउ यांकी है लोन वुल्फ

  हाओ चीन की वुल्फ वॉरियरÓ राजनयिकों की नई पीढ़ी से ताल्लुक रखती हैं। चीनी राजनयिकों को यह नाम एक ब्लॉकबास्टर फिल्म के नाम पर दिया गया है जिसमें एक चीनी कमांडो अफ्रीका और दक्षिणपूर्व एशिया में बुरे ‘अमेरिकियोंÓ की हत्या करता है। 

 >> नेपाल में छात्र संगठनों ने चीनी राजदूत ‘होउ यांकीÓ का किया विरोध, कहा- ‘चाइना वापस जाओÓ 

इसकी चर्चा संपादकीय के नीचे अलग से की गई है। 

 नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सत्ता को बचाने के लिए दिन-रात एक करने वाली चीन की राजदूत हाओ यांकी के खिलाफ नेपाल में सड़क से लेकर राजनीतिक गलियारे तक विरोध तेज होता जा रहा है। पाकिस्तान में काम कर चुकीं हाओ यांकी ने नेपाली प्रधानमंत्री से लेकर सेना प्रमुख तक को अपने इशारों पर चलने के लिए मजबूर कर दिया है। फार्राटेदार उर्दू बोलने में माहिर हाओ इन दिनों नेपाल में भारत और अमेरिका के खिलाफ चीनी अजेंडे को सेट करने में जुट गई

चीनी राजनयिकों की नई पीढ़ी से ताल्लुक रखने वाली ‘वुल्फ Ó हाओ ने बेहद कम समय के अंदर के नेपाल के सत्ता गलियारों में जोरदार पकड़ बना ली है। उनकी कोशिश है कि किसी भी तरीके से नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को ओली के समर्थन में खड़ा रखा जाए जो इन भारत के खिलाफ लगातार कई फैसले ले चुके हैं। यही नहीं ओली सरकार ने चीनी राजदूत के इशारे पर अमेरिका से मिलने वाली 50 करोड़ डॉलर की सहायता को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया है। पिछले दिनों अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियों के बाद भी ओली सरकार इस फंड पर अब तक कोई फैसला नहीं ले पाई है।

दरअसल, चीन को लग रहा है कि ओली ही वह तुरुप का इक्का हैं जिन्हें नेपाल में भारत और अमेरिका के प्रभाव को खत्म करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं ओली भी लगातार चीनी राजदूत के इशारे पर भारत के खिलाफ जहरीले बयान दे रहे हैं। उनकी कोशिश है कि भारत के खिलाफ बयानबाजी करके और कदम उठाकर के चीन को खुश रखें। इससे उनकी सत्ता बची रहेगी। चीनी राजदूत और पीएम ओली के इस खेल को अब न केवल नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता प्रचंड बल्कि जनता समाजबादी पार्टी-नेपाल और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा भी समझ गए हैं।

नेपाली नक्शे के पीछे चीनी राजदूत की कूटनीति

भारतीय खुफिया सूत्रों ने कहा कि हिमालयी गणराज्य नेपाल में युवा चीनी राजदूत होउ यानकी नेपाल की सीमा को फिर से परिभाषित किए जाने के लिए कॉमरेड ओली के कदम के पीछे एक प्रेरणादायक कारक रही हैं। यानी नेपाल जो भारत के कालापानी और लिपुलेख को अपने नक्शे में दर्शा रहा है, उसके पीछे चीनी राजदूत की ही कूटनीति और दिमाग काम कर रहा है। पाकिस्तान में 3 साल तक काम कर चुकीं हाओ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के तर्ज पर ढालने की कोशिश कर रही हैं।

 हाओ का ओली के विरोधी प्रचंड से भी अच्छा संबंध है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी का वह प्रतिनिधिमंडल, जो राजनीतिक मानचित्र को बदलने के लिए संविधान संशोधन विधेयक का मसौदा तैयार करने में सहायता कर रहा था, वह चीनी राजदूत के संपर्क में था। चीन के विदेश नीति के रणनीतिकारों के इशारे पर काम कर रही युवा चीनी राजदूत को नेपाल में सबसे शक्तिशाली विदेशी राजनयिकों में से एक माना जाता है।

चीनी राजदूत का नेपाल के सेना प्रमुख पूरन चंद्र थापा के साथ भी बेहद करीबी संबंध है। 

 >> नेपाल में वहॉ की सरकार और नेता सभी भेडिय़ा धसान मुहावरे को चरितार्थ कर रहे हैं। 

चीनी राजदूत होउ यांकी नेपाल की जनता, नेता और सरकार को अपने जाल में फंसाने के लिये एक सुंदर सी लोन वुल्फ बन गई है। अब उसके पीछे-पीछे नेपाल के नेता और सरकार आख्ंा बंद करके चल रहे हैं। 

 भेड़-चाल मुहावरा है जो खूब प्रचलित है। सामाजिक प्राणियों की एक लम्बी श्रंखला है जिसमें भेड़ें भी आती हैं। भेड़ों का स्वभाव होता है एक दूसरे के पीछे चलना। किसी स्थान पर अगर एक भेड़ किसी ओर चल पड़ती है तो बाकी भेड़ें भी उसी का अनुसरण करती हैं। गति करते इस समूह को ही भेड़ों का रेवड़ कहा जाता है। भेड़ को हिन्दी की कुछ शैलियों में गाडर भी कहा जाता है। एक दूसरे के पीछे चलने की वजह से भेड़ों को कभी नुकसान नहीं होता। प्रकृति नें किन्हीं प्राणियों को समूह में रहने का गुण दिया है जिसके चलते वे अपनी सुरक्षा कर पाते हैं। मनुष्य ने भेड़ों के इस स्वभाव को अंधानुकरण से जोड़ा। इस तरह से भेड़-चाल का अर्थ हुआ बिना सोचे-समझे किसी का अनुसरण करना, नकल करना या किसी की पटरी पर चलना। लीक पर चलना जहां लियाकत की बात है वहीं भेड़चाल बुद्धिमानी की निशानी नहीं है। 

अविवेकी भीड़ की ‘भेडय़ा-धसानÓ के खिलाफ़ज्

अंध-बधिर ‘व्यक्तियोंÓ को सही राह बतलाने के लिए…

अपने आप को भी ‘व्यामोहÓ से बारंबार उबारने की खातिर…

प्रतिबद्ध हूँ, जी हाँ, शतधा प्रतिबद्ध हूँ!

नागार्जुन की उक्त कविता का उल्लेख इस संपादकीय पृष्ठ में अलग से दिया गया है। 

प्रतिबद्ध हूँ, संबद्ध हूँ, आबद्ध हूँनागार्जुन

प्रतिबद्ध हूँ

संबद्ध हूँ

आबद्ध हूँ

प्रतिबद्ध हूँ, जी हाँ, प्रतिबद्ध हूँ –

बहुजन समाज की अनुपल प्रगति के निमित्त –

संकुचित ‘स्वÓ की आपाधापी के निषेधार्थ… 

अविवेकी भीड़ की ‘भेडय़ा-धसानÓ के खिलाफ़ज्

अंध-बधिर ‘व्यक्तियोंÓ को सही राह बतलाने के लिए…

अपने आप को भी ‘व्यामोहÓ से बारंबार उबारने की खातिर…

प्रतिबद्ध हूँ, जी हाँ, शतधा प्रतिबद्ध हूँ!

संबद्ध हूँ, जी हाँ, संबद्ध हूँ –

सचर-अचर सृष्टि सेज्

शीत से, ताप से, धूप से, ओस से, हिमपात सेज्

राग से, द्वेष से, क्रोध से, घृणा से, हर्ष से, शोक से, उमंग से, आक्रोश से…

निश्चय-अनिश्चय से, संशय-भ्रम से, क्रम से, व्यतिक्रम सेज्

निष्ठा-अनिष्ठा से, आस्था-अनास्था से, संकल्प-विकल्प सेज्

जीवन से, मृत्यु से, नाश-निर्माण से, शाप-वरदान से…

उत्थान से, पतन से, प्रकाश से, तिमिर से…

दंभ से, मान से, अणु से, महान सेज्

लघु-लघुतर-लघुतम से, महा-महाविशाल सेज्

पल-अनुपल से, काल-महाकाल सेज्

पृथ्वी-पाताल से, ग्रह-उपग्रह से, निहरिका-जल से…

रिक्त से, शून्य से, व्याप्ति-अव्याप्ति-महाव्याप्ति सेज्

अथ से, इति से, अस्ति से, नास्ति सेज्

सबसे और किसी से नहीं

और जाने किस-किस से…

संबद्ध हूँं, जी हॉँ, शतदा संबद्ध हूँ।

रूप-रस-गंध और स्पर्श से, शब्द से…

नाद से, ध्वनि से, स्वर से, इंगित-आकृति से…

सच से, झूठ से, दोनों की मिलावट से…

विधि से, निषेध से, पुण्य से, पाप से…

उज्जवल से, मलिन से, लाभ से, हानि से…

गति से, अगति से, प्रगति से, दुर्गति सेज्

यश से, कलंक से, नाम-दुर्नाम सेज्

संबद्ध हूँं, जी हॉँ, शतदा संबद्ध हूँ!

 आबद्ध हूँ, जी हाँ आबद्ध हूँ –

स्वजन-परिजन के प्यार की डोर मेंज्

प्रियजन के पलकों की कोर मेंज्

सपनीली रातों के भोर मेंज्

बहुरूपा कल्पना रानी के आलिंगन-पाश मेंज्

तीसरी-चौथी पीढिय़ों के दंतुरित शिशु-सुलभ हास मेंज्

लाख-लाख मुखड़ों के तरुण हुलास मेंज्

आबद्ध हूँ, जी हाँ शतधा आबद्ध हूँ!

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नागार्जुन ने यह कविता आपातकाल के प्रतिवाद में लिखी थी।

ख़ूब तनी हो, ख़ूब अड़ी हो, ख़ूब लड़ी हो

प्रजातंत्र को कौन पूछता, तुम्हीं बड़ी हो

डर के मारे न्यायपालिका काँप गई है

वो बेचारी अगली गति-विधि भाँप गई है

देश बड़ा है, लोकतंत्र है सिक्का खोटा

तुम्हीं बड़ी हो, संविधान है तुम से छोटा

तुम से छोटा राष्ट्र हिन्द का, तुम्हीं बड़ी हो

खूब तनी हो,खूब अड़ी हो,खूब लड़ी हो

गांधी-नेहरू तुम से दोनों हुए उजागर

तुम्हें चाहते सारी दुनिया के नटनागर

रूस तुम्हें ताक़त देगा, अमरीका पैसा

तुम्हें पता है, किससे सौदा होगा कैसा

ब्रेझनेव के सिवा तुम्हारा नहीं सहारा

कौन सहेगा धौंस तुम्हारी, मान तुम्हारा

हल्दी. धनिया, मिर्च, प्याज सब तो लेती हो

याद करो औरों को तुम क्या-क्या देती हो

मौज, मज़ा, तिकड़म, खुदगर्जी, डाह, शरारत

बेईमानी, दगा, झूठ की चली तिजारत

मलका हो तुम ठगों-उचक्कों के गिरोह में

जिद्दी हो, बस, डूबी हो आकण्ठ मोह में

यह कमज़ोरी ही तुमको अब ले डूबेगी

आज नहीं तो कल सारी जनता ऊबेगी

लाभ-लोभ की पुतली हो, छलिया माई हो

मस्तानों की माँ हो, गुण्डों की धाई हो

सुदृढ़ प्रशासन का मतलब है प्रबल पिटाई

सुदृढ़ प्रशासन का मतलब है ‘इन्द्राÓ माई

बन्दूकें ही हुईं आज माध्यम शासन का

गोली ही पर्याय बन गई है राशन का

शिक्षा केन्द्र बनेंगे अब तो फौजी अड्डे

हुकुम चलाएँगे ताशों के तीन तिगड्डे

बेगम होगी, इर्द-गिर्द बस गूल्लू होंगे

मोर न होगा, हंस न होगा, उल्लू होंगे…

नेपाल में छात्र संगठनों ने चीनी राजदूत होउ यांकी का किया विरोध, कहा- चाइना वापस जाओ

नेपाल की राजनीति में चीन के बढ़ते दखल का विरोध ललितपुर के छात्र संगठनों ने शुरू कर दिया है। छात्रों का आरोप है कि चीन के इशारे पर सरकार चल रही है। घरेलू मामलों में दखल को लेकर छात्र संगठनों ने सड़क पर उतर कर चीनी राजदूत होउ यांकी का विरोध शुरू कर दिया है और नेपाल विद्यार्थी संघ नेतृत्व में छात्र हाथों में पोस्टर लेकर ‘चाइना वापस जाओÓ का नारा लगाते हुए विरोध कर रहे हैं।

रूपनदेही जिले के राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी जिलाध्यक्ष अजय वर्मा ने बताया कि यह पहली बार नहीं है कि चीनी राजदूत ने संकट के समय नेपाल के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप किया है। करीब डेढ़ महीने पहले जब एनसीपी की अंदरूनी कलह शीर्ष पर पहुंच गई थी तब उन्होंने राष्ट्रपति भंडारी, प्रधानमंत्री ओली और एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड एवं माधव नेपाल से अलग-अलग बैठक कर मामले को हल किया था।छात्र संगठन की ओर से चीनी राजदूत के दखल को लेकर छात्र विरोध कर रहे हैं। छात्र नेता विष्णु पोरेल ने कहा कि चीनी राजूदत नेपाल की राजनीति में ज्यादा दखल दे रही हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। छात्र संगठन शांतिपूर्वक अपना विरोध जारी रखेगा। जल्दी ही नेपाल के अन्य हिस्सों में विरोध होगा।पाल के सोशल मीडिया में तस्वीरें वायरलनेपाल के सोशल मीडिया तस्वीरें वायरल हो रही हैं, उनमें दिख रहे पोस्टरों पर ‘गो बैक चाइनाÓ और ‘नो इन्टर्फिरन्सÓ जैसे नारे लिखे गए थे। नेपाल की मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के स्टूडेंट विंग के सदस्यों ने कहा, ‘चीन की राजदूत को दूतावास में रहना चाहिए, हमारे नेताओं के घरों में नहीं। हाउ यांकी चुप रहें।Ó

 यांकी इन दिनों काठमांडू में काफी सक्रिय हैं और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करके ओली के लिए कवच बनने का प्रयास कर रही हैं।को चीनी राजदूत ने वरिष्ठ एनसीपी नेता माधव कुमार नेपाल से मुलाकात की थी और वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की थी। उन्होंने उसी दिन राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से भी मुलाकात की थी।

 नेपाल और खनाल के करीबियों ने बताया कि इन दोनों नेताओं ने देश की नवीनतम राजनीतिक स्थिति पर चीनी राजदूत के साथ चर्चा की। उन्होंने उसका ब्योरा नहीं दिया।

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