Editorial :- विकास दुबे का परिवार VS  कांग्रेस-सपा-बसपा

11 July 2020

विकास दुबे एनकाउंटर: परिजनों ने भी किया शव लेने से इनकार

मां सरला ने कहा- मुझे नहीं जाना कानपुर, पिता बोले- जो हुआ अच्छा हुआ, पापी मारा गया।

राम कुमार  ने कहा कि जो हुआ अच्छा हुआ. सही किया कि पापी मारा गया. विकास दुबे की पत्नी ऋचा ने पहले ही शव लेने से मना कर दिया था।

सिपाही राहुल की बहन बोली, बलिदान के दिन ही विकास के मारे जाने से भाई की आत्मा को मिलेगी शांति।

बिकरू गांव में अकेला रहता था विकास, बेटा विदेश में कर रहा मेडिकल की पढ़ाई। 

>> विकास दुबे के एन्काउंटर होने के बाद उसके परिवारजनों ने माता-पिता पत्नी आदि सभी ने डॉन विकास दुबे के मारे जाने पर दु:ख व्यक्त नहीं किया है। ठीक इसके विपरीत विपक्षी पार्टियां कांगे्रस-बसपा-सपा राजनीति की रोटी सेकते हुए उसी प्रकार से आंसु बहा रहे हैं जिस प्रकार से सलमान खुर्शीद के कहे अनुसार बाटला एन्काउंटर में सोनिया गांधी ने आंसु बहाये थे। 

विकास दुबे एनकाउंटर पर राजनीति करने वाले कांग्रेसियों और अखिलेश को जनता ने सुनाई जमकर खरी-खोटी। इसकी चर्चा इस संपादकीय पृष्ठ में अलग से की गई है। 

>> कांग्रेस के अंदर रहते हुए स्वतंत्रता के पूर्व भी नेहरू परिवार ने धर्म जाति आधारित राजनीति की थी। जिसका परिणाम अखंड भारत का विभाजन है। १९४७ स्वतंत्रता के बाद भी नेहरू के समय से ही सोनिया गांधी के काल तक और अब राहुल-प्रियंका तक जाति,धर्म आधारित वोट बैंक पॉलिटिक्स, तुष्टिकरण की राजनीति करते हुए ६० वर्षों से अधिक काल तक जनता को भ्रमित कर शासन करते रही है। 

अब मोदी सरकार के आने से कांग्रेस सत्ताविहीन होकर उसी प्रकार से छटपटा रही है जिस प्रकार से बिन पानी के मछली छटपटाती है। 

कॉन्ग्रेस खेल रही ‘ब्राह्मण राजनीतिÓ

जाति की आड़ में अपराधियों को महिमामंडित करना बन्द करें।

>> नेहरू जी अपने सिर पर टोपी और नाम के आगे पंडित रखे रहे। इसकी आलोचना इसलिये होते रही है कि कथित रूप से पंडित नेहरू ने स्वयं ही यह व्यक्त भी किया था कि वे घटनावश हिन्दू परिवार में जन्मे हैं परंतु संस्कृति से मुस्लिम और शिक्षा से अंगे्रज हैं। पंडित नेहरू की बहन कृष्णा ने भी यह कहा है कि पंडित नेहरू जब नींद में रहते हैं तो भी अंग्रेजी में बड़बड़ाते रहते हैं। 

पंडित नेहरू कश्मीरी पंडित होते हुए भी और  कश्मीर के प्रश्र को १९४७ में अपने हाथ में लेने के बावजूद जम्मू कश्मीर के एक तिहाई भाग वर्तमान पीओके को पाकिस्तान को भेंट कर दिया। 

कांग्रेस के शासनकाल में ही कश्मीर मेें कश्मीरी पंडितों का नरसंहार हुआ और आज वे दिल्ली की सड़कों तक अपने ही देश में शरणार्थी बने हुए हैं। 

>>रजत शर्मा जी ने जाती की राजनीती करने वालों पर प्रहार करते हुए ठीक ही  है : “हम हमेशा कहते हैं कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती, समाज के लोग अपराधी को सिर्फ क्रिमिनल की नजर से देखते हैं, लेकिन ये कड़वा सच है कि यूपी और बिहार में आज भी जाति के नाम पर सारा खेल होता है, इसीलिए आज ब्राह्मणों के बीच,  उत्तर प्रदेश में, बिहार में, खूंखार अपराधी विकास दुबे का महिमामंडन करने की कोशिश की गई ।आज मैं इस तरह की सोच रखने वालों की आत्मा को जगाना चाहता हूं,  अगर कोई जाति के नाम पर, ब्राह्मण होने के नाम पर, उसकी मदद करने की कोशिश करेगा, उसका समर्थन करेगा, तो वह भी अपराधी होगा, गुनहगार होगा।”

विकास दुबे एनकाउंटर पर आंसु बहाते विपक्ष की नौटंकी

राजनीति करने वाले कांग्रेसियों और अखिलेश को जनता ने सुनाई जमकर खरी-खोटी 

विकास दुबे के एन्काउंटर होने के बाद उसके परिवारजनों ने माता-पिता पत्नी आदि सभी ने डॉन विकास दुबे के मारे जाने पर दु:ख व्यक्त नहीं किया है। ठीक इसके विपरीत विपक्षी पार्टियां कांगे्रस-बसपा-सपा राजनीति की रोटी सेकते हुए उसी प्रकार से आंसु बहा रहे हैं जिस प्रकार से सलमान खुर्शीद के कहे अनुसार बाटला एन्काउंटर में सोनिया गांधी ने आंसु बहाये थे। 

हत्या पर संदेह की उंगली उठाने वालों में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव, बसपा प्रमुख मायावती, कांग्रेस के जितिन प्रसाद और रालोद नेता अनंत चौधरी शामिल थे।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कटाक्ष किया: “वास्तव में, कार पलट नहीं गई थी। यह (राज्य) सरकार को रहस्योद्घाटन के रहस्योद्घाटन से बचने के लिए एक प्रयास था।” एक दिन पहले, यादव ने दुबे के कॉल डिटेल रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने की मांग की थी।

एक वीडियो बयान जारी करते हुए, उत्तर प्रदेश के कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने आरोप लगाया: “अगर एक आंख का जवाब एक आंख है, तो अदालत की क्या जरूरत है?” उन्होंने कहा कि कथित एनकाउंटर ने इस बारे में सवाल उठाया कि “कौन लोग हैं जो रहस्यों को दुबे के साथ दफन करना चाहते थे?”

भावुकता की गूंज, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट किया: “अपराधी समाप्त हो गया है, लेकिन अपराध और इसे संरक्षित करने वाले लोगों के बारे में क्या?”

बसपा सुप्रीमो मायावती, जिन्होंने हाल ही में भारत-चीन के तनाव से निपटने के लिए केंद्र के समर्थन का समर्थन किया, ने कथित गोलीबारी में “उच्च-स्तरीय जांच” की मांग की।

मायावती ने कहा कि जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में है, यह कहते हुए कि न केवल सच्चाई को जानने की जरूरत है, बल्कि “पुलिस-अपराधी-राजनेता की सांठगांठ का भी निर्धारण करें”।

चौधरी एनकाउंटर को ‘Ó ड्रामा ‘Ó करार देते हुए सबसे ज्यादा मुखर थे। ट्वीट्स की एक श्रृंखला में, उन्होंने आरोप लगाया: “विकास दुबे की मुठभेड़ के बाद, देश के सभी न्यायाधीशों को इस्तीफा दे देना चाहिए। भाजपा के ‘किल राजÓ में अदालतों की कोई आवश्यकता नहीं है। असली अपराधियों को बचाने के लिए यह सब नाटक बनाया गया है। आठ पुलिसकर्मियों की हत्या! “

उत्तर प्रदेश पुलिस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा: “हरियाणा पुलिस एक वांछित अपराधी को यूपी पुलिस को सौंप सकती है और पकड़ सकती है, लेकिन यूपी पुलिस पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया के लिए आदमी को सुरक्षित भी नहीं कर सकती है! अपने सर्वश्रेष्ठ, एक बॉट-अप यूपी पुलिस द्वारा। सबसे खराब स्थिति में आपराधिक-पुलिस-राजनेता की सांठगांठ के मामले में मालिकों को बचाने का प्रयास किया जाता है। “

विकास दुबे एनकाउंटर पर राजनीति करने वाले कांग्रेसियों को जनता ने सुनाई जमकर खरी-खोटी

विकास दुबे एनकाउंटर पर अखिलेश ने उठाए सवाल, तो जनता ने लगा दी क्लास

 लेकिन विकास दुबे को लेकर सवाल उठाना विपक्ष को महंगा पड़ रहा है। एक तरफ जहां लोगों सोशल मीडिया के जरिए यूपी सरकार और पुलिस का समर्थन कर रहे है तो वहीं विपक्ष को जमकर लताड़ लगा रहे है।

विकास दुबे एनकाउंटर पर दिग्विजय ने उठाए सवाल

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा है कि अब विकास और राजनेताओं व पुलिस अफसरों का संपर्क उजागर नहीं हो पाएगा। विकास दुबे के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कहा कि जिसका शक था वह हो गया। विकास दुबे का किन-किन राजनीतिक लोगों से, पुलिस व अन्य शासकीय अधिकारियों से संपर्क था, अब उजागर नहीं हो पाएगा। पिछले तीन-चार दिनों में विकास दुबे के दो अन्य साथियों का भी एनकाउंटर हुआ है लेकिन तीनों एनकाउंटर का पैटर्न एक समान क्यों है?

 अखिलेश ने उठाए सवाल, तो जनता ने लगा दी क्लास

 कानपुर शूटआउट के बाद से ही विकास दुबे के सपा नेताओं के साथ संबंध को लेकर तथ्य सामने लगे थे। उज्जैन में यूपी रजिस्ट्रेशन वाली एक कार मिलने के बाद से सपा से उसके संबंधों को लेकर सोशल मीडिया में दावे किए गए। सोशल मीडिया में कहा गया कि विकास दुबे महाकाल मंदिर में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मनोज यादव के नाम पर रजिस्टर्ड गाड़ी में पहुंचा था।  

 विकास दुबे के अखिलेश यादव के विधायक सतीश निगम से भी संबंध थे। एक तस्वीर में विकास दुबे और विधायक सतीश निगम एकसाथ गहन चर्चा में दिखाई दे रहे हैं। अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे शिव कुमार बेरिया समाजवादी पार्टी के कई मंत्री विकास दुबे के घर पर आते-जाते थे।

 विकास दुबे किस तरह समाजवादी पार्टी से जुड़ा हुआ था, इसका सबूत आप भी देख सकते हैं। विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे ने साल 2015 में गांव में समाजवादी पार्टी की आजीवन सदस्यता ली थी। ऋचा दुबे ने अधिकृत प्रत्याशी के लिए फॉर्म भरा था। उसने फॉर्म में सपा की सदस्यता का नंबर भी भरा।

 ऋचा दुबे ने सपा के स्वघोषित समर्थन से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा था। विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे का एक पोस्टर इसका स्पष्ट प्रमाण है। ये पोस्टर उस वक्त का है, जब रिचा दुबे घिमऊ से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रही थीं। जिला पंचायत सदस्य पद की दावेदार रिचा दुबे को उस वक्त समाजवादी पार्टी का समर्थन प्राप्त था। उसके पोस्टर में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की तस्वीरें भी साफ दिखाई दे रही हैं। 

 समाजवादी पार्टी के संरक्षण और विकास दुबे की दहशत का ही नतीजा था कि उसने 15 वर्षों से जिला पंचायत सदस्य का पद कब्जा रखा था। वह खुद तो जिला पंचायत था ही, साथ ही उसने अपनी पत्नी ऋचा को घिमऊ से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़वाया था। जिसमें वह जीत गई थीं। यही नहीं उसने अपने चचेरे भाई अनुराग दुबे को पंचायत सदस्य बनवाया था।