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अंधविश्वास ने ली जान: ‘शरीर नश्वर है, हमें बाबा ने बुलाया है…’ सुसाइड नोट लिखकर 3 लड़कियों ने ट्रेन के आगे कूदकर की आत्महत्या, यूट्यूब पर तीनों सुनी थीं प्रवचन

मथुरा. देश में इन दिनों अंधविश्वास चरम पर है। 6 साल पहले दिल्ली के बुरी तरह से जख्मी एक ही परिवार के सभी 11 सदस्यों ने मोक्ष की चाहत में आत्महत्या कर ली थी। इस घटना ने देश ही नहीं बल्कि विदेशों के लोगों को दहला कर रखा था। आज भी अनपढ़ से लेकर डिग्रीधारी लोग अंधविश्वास की दलदल में फंस गए हैं। उत्तर प्रदेश के मथुरा में 13-14 साल की 3 लड़कियों ने शव नश्वर कर लिया है और बाबा ने बुलाकर 24 मई को ट्रेन से काटकर जान दे दी।

बता दें कि बिहार के योगिया मठ से माया (13), गौरी (14) और माही (16) ये तीनों 13 मई को सूख गई थीं। माही के घर पर एक पत्र मिला। इस पर लिखा था- ‘हमको बाबा बुलाए हैं।’ सब ठीक करने के लिए हमें जाना होगा. हम तीनों लालगंज या हिमालय जा रहे हैं। खोजने की कोशिश मत करना, क्योंकि हम जहर खरीदे हुए हैं। खोज तो हम जहर पीकर मर जायेंगे.’

तीनो किशोरियाँ सहेली हैं. 13 मई को तीनो घर छोडकर आये थे। एक किशोरी ने अपने घर पर बैग में चिट्ठी छोड़ी थी, जिसमें लिखा था कि वह परमात्मा से मिलने जा रही हैं। मंगलवार कोत्रिपाठियों के स्वजन ने उनके बैग व कपड़े से पहचान की। तीन लड़कियां 6 महीने पहले एक-दूसरे के कॉन्टैक्ट में आईं थीं। वो यूट्यूब, इंस्टाग्राम पर सिर्फ धार्मिक और प्रेरक प्रवचन सुनती थीं। वह शरीर नेश्वर है। एक लड़की माही अपनी मृत मां की आत्मा से भी बात करने का दावा करती थी।

तीनों ने इस वर्ष नौवीं कक्षा पास की थी। थाना टाउन के एसएसआइ मोहन कुमार ने बताया कि माया की मां सोनी देवी 22 मई को टाउन के थाना प्रभारी में गुमाशुदगी दर्ज कराई थी। गौरी के घर छोड़ने के बाद बैग में एक चिट्ठी मिली थी। इसमें लिखा था कि माया, गौरी व माहीत्रि परमात्मा से मिलने के लिए किसी धाम जा रही हैं। घरवाले धान की कोशिश न करें. तीन महीने बाद परमात्मा से मिलकर लौटती है।

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जानकारी के अनुसार माही के घर के बगल में दो सगी बहनें गौरी और माया रहती थीं। तीनों में अच्छी दोस्ती थी. माही बहुत छोटी थी, जब उसकी माँ ने दुनिया छोड़ दी थी। माँ की मृत्यु के बाद माही के जीवन में भटकाव आने लगा। भक्ति में डूबी माही के मन में यह बैठ गया है कि यह शरीर नेश्वर है। कभी मरता नहीं, अमरत्व प्राप्त करता है। धीरे-धीरे वह धर्म और अध्यात्म की ओर झुक गया। वह सदैव कृष्ण भक्ति में डूबी रहती थी और सत्संग, भजन सुना करती थी। माही को देखकर गौरी और माया भी उसी के रंग में रंग गए थे। वह दोनों भी माही के साथ सत्संग, भजन सुनने के साथ-साथ ध्यान करती थीं।

ऐसी हुई पहचान

गौरी के हाथ में मेहंदी से लार्ड युवराज लिखा था। माया के हाथ पर मेहंदी से एसबीजी लिखा था। माया की शर्ट पर ग्लोब टेलर स्टीकर मिला था। टेलर का स्टिकर मिलने के बाद पुलिस ने पत्थर पुलिस से संपर्क किया था, तो जानकारी हुई कि 22 मई को वहां के कस्बे के तहसीलदार ने स्वजन नेतीनों की गुमशुदगी दर्ज कराई थी।

सुसाइड नोट में लिखी ये बात

वहीं मथुरा पुलिस जब राक्षसों में लड़कियाँ के घर गई थी तो पुलिस को वहां गौरी और माया के घर से दो पत्र भी मिले थे। माया के पत्र में लिखा था कि, “बाबा को हिमालय में बुलाया गया है।” सभी कष्ट दूर हो जायेंगे।” द्वितीय अक्षर गौरी का था। गौरी ने लिखा था कि, “सॉरी से कुछ नहीं होता।” तुम मत मरना. तुम्हारी मौत से पहले मेरी मौत आ जाए. सॉरी मेरी वाइफ।”

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