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‘नरेंद्र मोदी स्टाइल में आ गई पिनाराई विजयन सरकार’, UDF ने वामपंथी सरकार को घेरते हुए क्यों कही ये बात?

कांग्रेस नीत यूडीएफ ने मंगलवार को वामपंथी सरकार पर विपक्ष के साथ कोई चर्चा न करके नरेंद्र मोदी स्टाइल में सदन में विधेयक पारित करने का आरोप लगाया। सतीशन साथ ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला और यूडीएफ विधायक एन समसुधीन ने कहा कि जो हुआ वह गलत था ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और इसने सदन में एक गलत मिसाल कायम की है।कांग्रेस नीत यूडीएफ ने मंगलवार को वामपंथी सरकार (पिनाराई विजयन) पर विपक्ष के साथ कोई चर्चा न करके ‘नरेंद्र मोदी स्टाइल’ में सदन में विधेयक पारित करने का आरोप लगाया। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने दोपहर में सदन की कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष के समक्ष केरल नगर पालिका (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2024 और केरल पंचायत राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2024 को सोमवार को सदन में बिना किसी चर्चा के पारित करने को लेकर विरोध दर्ज कराया।सतीशन ने कहा कि सदन की 10 जून की कार्यसूची के अनुसार दोनों विधेयकों को संबंधित विषय समितियों को भेजा जाना था। इस दौरान विपक्ष राज्य की शराब नीति में ‘संशोधन’ के संबंध में आरोपों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की अपनी मांग को लेकर सदन में हंगामा कर रहा था। उसी दौरान विधानसभा ने दोनों विधेयक पारित कर दिए।सतीशन, साथ ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला और यूडीएफ विधायक एन समसुधीन ने कहा कि जो हुआ वह गलत था, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और इसने सदन में एक गलत मिसाल कायम की है।विपक्ष ने स्पीकर से विधेयकों के पारित होने को स्थगित करने का आदेश देने की मांग की। सतीशन ने कहा कि विधेयकों को ‘उसी तरह पारित किया गया है जैसे संघ परिवार की सरकार संसद में करती है’ और स्पीकर ए एन शमसीर द्वारा दोनों विधेयकों को निलंबित करने की उनकी मांग को खारिज करने पर उन्होंने सदन से वॉकआउट कर दिया।विधानसभा अध्यक्ष ए एन शमसीर राज्य के स्थानीय स्वशासन मंत्री एमबी राजेश की दलील पर आधारित विपक्ष की मांग से सहमत नहीं थे। राजेश ने तर्क दिया कि विधेयकों को तत्काल पारित करने की आवश्यकता है क्योंकि 2025 में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों से संबंधित वार्ड परिसीमन सहित प्रक्रियाएं समय पर पूरी की जानी चाहिए।स्पीकर ने यह भी कहा कि अतीत में कई विधेयकों को समितियों के पास विचार के लिए भेजे बिना और विधानसभा में चर्चा किए बिना सदन में पेश और पारित किया गया है। साथ ही, शमसीर ने माना कि यह “सबसे वांछनीय” है कि वित्तीय विधेयकों को छोड़कर सभी विधेयकों को संबंधित विषय या चयन समितियों द्वारा विचार के बाद पारित किया जाए।