Editorial:- दिल्ली दंगे 2020: द अनटोल्ड स्टोरी पुस्तक की छपाई अब गरूड़ प्रकाशन द्वारा

24 August 2020

दिल्ली दंगा 2020: द अनटोल्ड स्टोरी की किताब, जिसे उसके प्रकाशक ब्लूम्सबरी ने वामपंथी और इस्लामवादियों के दबाव में वापस ले लिया था, ओपी इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार : अब गरुड़ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की जाएगी।
। मोनिका अरोड़ा, सोनाली चितलकर और प्रेरणा मल्होत्रा द्वारा लिखी गई पुस्तक को ब्रिटेन के कार्यालय के दबाव में प्रकाशन गृह द्वारा अचानक वापस ले लिया गया था, यहाँ तक कि लेखक भी कल पुस्तक के एक आभासी लॉन्च में भाग ले रहे थे।
पुस्तक की लेखिका एडवोकेट मोनिका अरोड़ा ने बताया कि लोगों की भावना के अनुसार, वे गरुड़ प्रकाशन के साथ आगे बढ़ रही हैं, जो एक घर में प्रकाशित होने वाला प्रकाशन है। लेखकों ने निर्णय लिया क्योंकि उन्हें उनके ईमेल के लिए ब्लूम्सबरी से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, उन्होंने उनसे औपचारिक रूप से लिखित रूप में पुष्टि करने के लिए कहा कि वे पुस्तक वापस ले रहे हैं। ब्लूम्सबरी ने केवल फोन के माध्यम से लेखकों को सूचित किया था कि पुस्तक को वापस ले लिया गया है, अनुबंध को समाप्त करने के लिए कोई औपचारिक संचार नहीं भेजा गया था।
हमारे पास एक और प्रकाशक के साथ जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है । “, अरोड़ा ने ट्वीट किया था । उसके बाद, उसने बताया कि उन्होंने गरुड़ प्रकाशन के माध्यम से पुस्तक प्रकाशित करने का फैसला किया है।
घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए, गरुड़ प्रकाशन ने लेखक को उन पर भरोसा करने के लिए धन्यवाद देते हुए इसकी पुष्टि की। “दोस्त! आपके समर्थन के लिए धन्यवाद। आइए मिलकर इसे हर घर तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा, ‘Ó सत्य की जीत होनी चाहिए।

बाद में उन्होंने एक और ट्वीट पोस्ट करते हुए कहा कि वे किताब को अंग्रेजी और हिंदी दोनों में प्रकाशित करेंगे। गरुड़ प्रकाशन ने आगे कहा कि किताब के लिए प्री-ऑर्डर लिंक जल्द ही उपलब्ध कराए जाएंगे।
इससे पहले कम्पनी ने इन्हीं लेखक (आनंद रंगनाथन) के उपन्यास ‘द रैट ईटरÓ को प्रकाशित किया था। लेखक संदीप देव ने भी घोषणा की है कि वो इस प्रकाशन संस्था से वो सारी किताबों के प्रकाशन अधिकार वापस ले रहे हैं, जो भविष्य में आने वाली थी। उन्होंने कम्पनी की ताज़ा हरकत को विचारों की हत्या करार देते हुए कहा कि उसने वामपंथी लॉबी के दबाव में आकर दिल्ली दंगों पर आने वाली पुस्तक के प्रकाशन पर रोक लगाई है।
संदीप देव की अब तक 6 पुस्तकें ब्लूम्सबरी द्वारा प्रकाशित की जा चुकी है और आगे 9 ऐसी पुस्तकें आने वाली थीं, जिनका प्रकाशन उक्त कम्पनी को ही करना है। उन्होंने उन सभी 9 किताबों के प्रकाशन का अधिकार ब्लूम्सबरी से छीन लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वो इस कम्पनी के साथ अब भविष्य में कभी काम नहीं करेंगे। वो अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी और मराठी में कई पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं।

तुर्की से कांग्रेस और आमिर को प्यार क्यों?

भाजपा अलगाववाद की ओर जा रहे मुस्लिमों को राष्ट्र की मुख्यधारा में जोड़ रही है। इतना ही नहीं विश्व के मुस्लिम देश भी हुए मोदी के मुरीद ।

आर्टिकल ३७० के निष्प्रभावी किये जाने के मोदी सरकार के कदम का पूरे विश्व के मुस्लिम देशों से समर्थन मिला है,पाकिस्तान मलेशिया और तुर्की को छोड़कर। 

आर्टिकल ३७० के विरोध पर पाकिस्तान और मलेशिया के पूर्व पीएम का माफीनामा। इस विषय पर विस्तार से चर्चा हमने लोकशक्ति के १३ अगस्त के संपादकीय में की है। 

भूल हर मनुष्य से होती है, और ये स्वाभाविक है, पर उस भूल को स्वीकार करने का साहस बहुत ही कम लोगों में होता है। मलेशिया के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष महातिर मुहम्मद भारत का विरोध कर अब पश्चाताप कर रहे हैं। उसी प्रकार से कश्मीर मुद्दे को ही लेकर पाकिस्तान ने सऊदी अरब से पंगा लिया और अब वह माफी मांग रहा है। 

 कांग्रेस क्या अब इन सबसे सबक लेगी? 

>> आज का समाचार है : शाहीन बाग सोशल एक्टिविस्ट शहजाद अली भाजपा में हुए शामिल।

>>  दो दिन पूर्व का यह भी समाचार है :  शाह फैसल का भी हुआ सच्चाई के सामने समर्पण बोले कश्मीर में 5 अगस्त से पहले का दौर लौटना असंभव, हो सकते हैं नए एलजी मनोज सिन्हा के सलाहकार।

इससे स्पष्ट है कि अलगाववाद की ओर कदम बढ़ा चुके मुस्लिमों को भाजपा राष्ट्र की मुख्यधारा में जोडऩे का प्रयास कर रही है। 

परंतु विडंबना है कि हमारे यहॉ के कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दल वोटबैंक के लालच मेें तुष्टीकरण की नीति अपना रहे हैं इससे बेंगलुरू जैसी हिंसात्मक घटनाओं का जन्म हुआ। 

कांग्रेस ही नहीं बल्कि उनके समर्थक मीडिया भी वालस्ट्रीट जनरल बीबीसी जैसे पाश्चात्य जगत के भारत विरोधी मीडिया का अनुकरण कर  भारत में अलगाववाद को बढ़ावा दे रहे हैं। 

>>  मीडिया ने पी नवीन को बनाया बेंगलुरु दंगे का कारण तो कांग्रेस ने अपने दलित विधायक से किया किनारा।

>>  वालस्ट्रीट जनरल का अनुकरण कर राहुल गांधी का आरोप : भारत में फेसबुक-व्हाट्सएप  पर बीजेपी-आरएसएस का नियंत्रण: 

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (क्चछ्वक्क) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (क्रस्स्) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि भाजपा और आरएसएस भारत में फेसबुक और व्हाट्सएप को नियंत्रित करते हैं। इसके साथ राहुल ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नलÓ की एक रिपोर्ट को भी शेयर किया है। 

वॉल स्ट्रीट भारत और हिन्दू विरोधी अभियान चला रखा है। दिल्ली दंगों में आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या का आरोप आप पार्षद ताहिर हुसैन लगा है। परंतु ठीक इसके विपरीत वॉल स्ट्रीट जनरल ने खबर छापी थी, आईबी के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या इस्लामी कट्टरपंथियों ने नहीं की है, बल्कि ‘जय श्री रामÓ का नारा लगाने वाली हिंदुवादी भीड़ ने की है।

राहुल गांधी के आरोप पर पलटवार करते हुए रविशंकर प्रसाद ने जो टिप्पणी की है उसे तथा इस संपादकीय में ऊपर दिये गये अन्य तथ्यों से संंबंधित समाचार इस संपादकीय पृष्ठ में अलग से है। 

कश्मीर में धारा 370 की बहाली चाहती है कांग्रेस, पी. चिदंबरम ने इन 6 पार्टियों को किया सलाम

जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर के सभी राजनितिक दलों में खलबली मच गई तो वहीँ कांग्रेस ने इसे असंवैधानिक करार दिया और कहा कि मोदी सरकार ने कश्मीर से धारा 370 हटाकर लोकतंत्र का मर्डर किया है, कश्मीर के सभी राजनितिक दल एकजुट हो गए हैं और कश्मीर में धारा 370 की बहाली की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी इन सभी दलों का समर्थन कर रही है, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने धारा 370 की बहाली के लिए एकजुट हुई 6 राजनैतिक पार्टियों को सलाम ठोंका है।

देश के पूर्व गृह व् वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने रविवार को एक ट्वीट में लिखा, अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए एकजुट हुईं मुख्यधारा की पार्टियों की एकता और जज्बे को सलाम। मेरी उनसे अपील है कि वे अपनी मांग के लिए डटकर खड़े हों. स्वयंभू राष्ट्रवादियों की आलोचनाओं को नजरंदाज करें जो इतिहास पढ़ते नहीं हैं बल्कि इतिहास को दोबारा लिखने की कोशिश करते हैं. देश के संविधान में राज्यों के विशेष प्रावधानों के कई उदाहरण हैं।

आपको बता दें कि कश्मीर की सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए साथ आने का ऐलान किया है। जम्मू-कश्मीर के सियासी दलों ने शनिवार को इसका घोषणा पत्र जारी किया। संयुक्त बयान में कहा गया है कि 5 अगस्त 2019 की घटना ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर के रिश्ते को पूरी तरह से बदल दिया है, रिश्तों को फिर से मिलाने के लिए जम्मू कश्मीर में फिर से धारा 370 लागू किया जाय।

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