मोदी सरकार ने बिहार के दरभंगा में एम्स अस्पताल खोलने का फ़ैसला किया है.

मोदी सरकार ने बिहार में एम्स खोलने का फ़ैसला किया है. कैबिनेट की बैठक में ये तय हुआ. इस अस्पताल को बनने में चार साल लग सकते हैं. बताया गया है कि इस पर 1264 करोड़ रुपये खर्च होंगे. बिहार में चुनाव से पहले मोदी सरकार का ये बड़ा एलान है. अब तक राज्य में एक ही एम्स है, जो पटना में है. दरभंगा में पहले से एक मेडिकल कॉलेज है. लेकिन एम्स हो जाने से पूरे मिथिलांचल की तस्वीर बदल जाएगी. दरभंगा में छठ से पहले फ़्लाइट सेवा शुरू करने का फ़ैसला और अब एम्स शुरू करने की घोषणा. ऐसा लगता है बीजेपी मिथिला के लोगों का दिल जीतने के मिशन पर है. बीते रविवार को पार्टी के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने भी दरभंगा का दौरा किया था. उन्होंने वहां मखाना के किसानों से मुलाक़ात भी की थी.

पग पग पोखरी माछ मखान, सरस बोल मुस्की मुख पान. मिथिला की पहचान को इस एक लाईन में बताया गया है. वो क्षेत्र जहां जगह जगह तालाब हैं. मछली और मखाना है. लोग मीठी बोली बोलते हों और मुंह हमेशा पान से भरा हो. लेकिन मिथिलांचल की एक और पहचान है. ग़रीबी, लाचारी और हर साल बाढ़ की तबाही. अब भी इस इलाक़े के कई घर पानी में डूबे हैं. इंदिरा गांधी के जमाने में ललित नारायण मिश्र देश के रेल मंत्री थे. उनके जमाने में मिथिला में खूब काम हुआ. फिर इस इलाक़े की अनदेखी होती रही. लेकिन मोदी सरकार के दो फ़ैसलों ने मिथिला और मैथिलों को फिर से चर्चा में ला दिया है.

अगर चार सालों में यानी अगले लोकसभा चुनाव तक दरभंगा में एम्स शुरू हो गया तो पीएम नरेन्द्र मोदी लंबे समय तक मिथिलांचल में याद किए जायेंगे. इस इलाक़े में इसकी बड़ी ज़रूरत थी. इससे पहले पिछले हफ़्ते दरभंगा एयरपोर्ट शुरू होने की घोषणा की गई थी. नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वहां का दौरा किया. फिर बताया कि नवंबर महीने के पहले हफ़्ते से फ़्लाइट शुरू हो जाएगी. जिसके लिए बुकिंग इसी महीने से शुरू की जा सकती है. अब तक सिर्फ़ पटना और गया से ही फ़्लाइट चलती हैं.

बिहार में दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा जैसे ज़िले मिथिलांचल में आते हैं. ये इलाक़ा नेपाल से सटा हुआ है. हर साल कुछ इलाक़ों को कोसी डुबाती है तो कुछ को कमला. यहां कोई बड़ा उद्योग नहीं है. बाढ़ के कारण कई जगहों पर सिर्फ़ एक ही फसल होती है. बिहार का ये इलाक़ा पिछड़ा माना जाता है. लेकिन राजनैतिक रूप से उतना ही जागरूक.

आज़ादी के बाद से ही मिथिलांचल पर कांग्रेस का दबदबा रहा. कुछ ज़िलों में लेफ़्ट पाटियां भी मज़बूत रहीं. मंडल आयोग के बाद इलाक़े में आरजेडी की पकड़ मज़बूत होती रही. मुस्लिम यादव समीकरण के बूते अब भी आरजेडी का दबदबा बना है. लेकिन बीजेपी भी अब चुनौती देने लगी है. लोकसभा चुनाव में एनडीए का पलड़ा भारी रहा. लेकिन ताबड़तोड़ तोहफ़ों से मिथिलांचल को मोदी अपना गढ़ बनाने में जुटे हैं.