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सरगुजा जिले में छह हजार हेक्टेयर में लगी सुगंधित धान की फसल पर मौसम का खतरा

बेमौसम बारिश से सरगुजा अंचल में सुगंधित धान पर खतरा मंडराने लगा है। सुगंधित धान की फसल पक चुकी है। पिछले दो दिनों से हो रही बारिश और हवाएं चलने के कारण धान की खड़ी फसल खेतों में पसर गई है। खलिहान में काट कर रखी गई फसल भी पूरी तरीके से भीग चुकी है। ऐसे में मिसाई कर पाना आसान नहीं है। यदि मौसम नहीं खुला तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सुगंधित पारंपरिक धान जिसमें जीराफूल प्रमुखता से शामिल है। सरगुजा अंचल में जीराफूल धान ही किसान अधिक लगाते हैं। इसके साथ बिसनी भी लगाते हैं।

इन दोनों धान की खासियत यह है कि इसमें रासायनिक उर्वरक काफी कम लगता है या फिर कई किसान रासायनिक उर्वरक का उपयोग भी नहीं करते। इसलिए यह खाने में स्वादिष्ट और काफी सुगंधित होता है। खासकर जीराफूल धान की मांग तो काफी अधिक है। अभी भी 80 से 100 रुपये प्रति किलो साफ सुथरा जीराफूल चावल लोग हाथो-हाथ खरीद लेते हैं। मुंहमांगे दाम पर बिकने वाले इस सुगंधित धान की बालियां जमीन पर पसर जाने से गुणवत्ता खराब होने की आशंका बढ़ गई है। सरगुजा में समर्थन मूल्य पर धान बिक्री करने वाले किसान स्वयं के उपयोग के लिए बड़े रकबे में सुगंधित धान की खेती करते हैं। कटाई, मिसाई के समय बारिश ने किसानों को चिंता में डाल दिया है।

सरगुजा जिले में जहां बड़े पैमाने पर हाइब्रिड धान की खेती किसान करते हैं वही वर्ष भर नमी रहने वाले खेतों में किसान वर्षों से पारंपरिक सुगंधित धान की किस्में ही लगाते आ रहे हैं। सरगुजा अंचल में लगभग 6000 हेक्टेयर में सुगंधित धान कि किस्में लगाई गई हैं। इसमें करीब 3000 हेक्टेयर में तो सिर्फ जीराफूल धान की किस्में ही लगी है, क्योंकि इसकी बढ़वार अधिक होती है और पौधे काफी पतले होते हैं इसलिए बालियां पकने के बाद झुक जाती हैं। बालियां वजनदार होने के कारण बेमौसम बारिश व तेज हवा में धान की फसल जमीन पर पसर जाती है। चूंकि पहले से ही गहरे खेतों में इसकी खेती की जाती है इसलिए बारिश में धान जमीन पर पसरने के कारण दोनों तरफ से नमी मिलने से बालियां खराब हो जाती हैं।