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झारखंड में पेयजलापूर्ति योजनाओं का हाल ‘नौ दिन चले ढाई कोस’, 38% आबादी तक ही पाइपलाइन से पेयजल

झारखंड में पेयजलापूर्ति योजनाओं की रफ्तार पर ‘नौ दिन चले ढाई कोस’ वाला मुहावरा बिल्कुल सटीक बैठता है. झारखंड अलग राज्य गठन के 20 वर्ष गुजर जाने के बाद भी यहां आधी आबादी को भी पाइपलाइन से पेयजल की आपूर्ति नहीं की जा सकी है. फिलहाल राज्य की 38 प्रतिशत आबादी तक ही पाइपलाइन से पेयजल की आपूर्ति हो पायी है.

हालांकि, राज्य गठन के पूर्व की स्थिति में काफी सुधार हुआ है. वर्ष 2000 के पहले राज्य की केवल पांच प्रतिशत आबादी को ही पाइपलाइन के जरिये पानी उपलब्ध कराया जाता था. वहीं, झारखंड बनने के बाद वर्ष 2014-15 तक भी पाइपलाइन जलापूर्ति योजना से ग्रामीण आबादी का आच्छादन केवल 12 प्रतिशत था.

झारखंड में पाइपलाइन के जरिये घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने में अब तक सफलता नहीं मिली है. राज्य के 54.08 लाख घरों में से केवल 5.48 लाख घरों (लगभग 10 प्रतिशत) में ही पानी का कनेक्शन दिया जा सका है, जबकि, करीब 49 लाख घरों में पानी का कनेक्शन देने का काम अब भी बाकी है. राज्य गठन के पूर्व स्थिति बदतर थी. वर्ष 2001 में राज्य के दो प्रतिशत घरों में ही पानी का कनेक्शन था.

पाइपलाइन नहीं होने से ग्रामीण इलाके पूरी तरह चापानल, कुआं या नदी के पानी पर आश्रित थे. इसी कारण राज्य में चापानलों की संख्या राष्ट्रीय औसत से अधिक हो गयी. वर्ष 2013 में चापानलों की अधिक संख्या को भूमिगत जल के दोहन और प्रदूषण का कारण मानते हुए नये चापानल लगाने पर पाबंदी लगाते हुए पाइपलाइन योजनाओं में कुछ तेजी लायी गयी. हालांकि, अब तक संतोषजनक परिणाम नहीं प्राप्त किया जा सका है. ऐसे में नये चापानल लगाने पर लगायी गयी पाबंदी वापस ले ली गयी है.

गुजरे 20 वर्षों के दौरान राज्य के आदिम जनजाति, अनुसूचित जाति और जनजाति टोलों में जलापूर्ति के लिए काम किया गया है. राज्य गठन के पहले इन टोलों में एक भी जलापूर्ति योजना नहीं थी. वर्तमान में आदिम जनजाति, अनुसूचित जाति और जनजाति टोलों में रहनेवाले करीब 78,000 परिवारों के लिए 13,000 से अधिक पेयजलापूर्ति योजनाओं पर काम किया जा रहा है.

आदिम जनजाति को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सौर ऊर्जा चलित लघु ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना भी शुरू की गयी है. 2251 सौर ऊर्जा आधारित इन जलापूर्ति योजनाओं में से 162 पूरी की जा चुकी हैं. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने वर्ष 2024 तक राज्य के सभी टोलों और बसावटों में पाइप जलापूर्ति योजनाओं से पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

भविष्य में राज्य को होनेवाली पानी की जरूरत के मुताबिक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अब तक कुछ विशेष नहीं किया गया है. गुजरे 20 वर्षों के दौरान राज्य में कोई भी नया डैम बनाने की योजना पर ठोस कार्य नहीं किया जा सका है. राज्य गठन के पूर्व की स्थिति आज तक बरकरार है. राज्य के सभी 24 जिलों में पेयजल की आपूर्ति के लिए कुल 11 डैम ही हैं. इन डैमों के रख-रखाव पर भी ध्यान नहीं दिया गया है. डैमों की सफाई दशकों से नहीं की गयी है. गाद होने से डैमों का जल संग्रहण क्षेत्र घटता जा रहा है. इस कारण गर्मी के मौसम में पानी की राशनिंग तक करनी पड़ रही है.