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Editorial :- pathar bajo ko deshbhakt khne wale dwara Bharat mata ki jai sambodhan wali

अटल जी की याद में प्रार्थना सभा का आयोजन दिल्ली में २० अगस्त को हुआ था उसमें   सत्तारूढ़ पार्टी ही नहीं बल्कि विपक्षी पार्टियों के नेताओ ने भी एकता का प्रदर्शन कर अटल जी का अनुसरण किया था।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने भी अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी को ऐसा नेता करार दिया था जो सभी दलो को एक साथ चलने में विश्वास रखते थे और उनके मरने के बाद भी सभी दल एक जगह एकत्र हुए।
फारूख अब्दुल्ला ने वहॉ उपस्थित होकर जो वक्तव्य दिया था उसका स्वागत करने में हम सभी राष्ट्रवादी कंजूसी कर बैठे हैं। फारूख अब्दुल्ला ने कहा था अटल जी पीएम नहीं हिन्दुस्तान के दिलों के मालिक थे, दुआ करता हूं मरते दम तक उन्हीं के रास्ते पर चलूं।
अटल जी की शोक सभा में फारूख अब्दुल्ला ने बड़े गर्व से लगाये थे नारे भारत माता की जय के।
मैं फारूख अब्दुल्ला का आलोचक रहा हूं। उन्होंने भारत की सेना पर पत्थर फेंकने वालो को देशभक्त कहा था और अपनी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस को हुर्रियत के पीछे-पीछे चलने को भी कहा था।
परंतु अटल जी की याद में हुई प्रार्थना सभा में   फारूख अब्दुल्ला ने जो कहा और जिस गर्व से भारत माता की जय के नारे लगाये उसका जिस प्रकार से राष्ट्रवादी हम सभी को जो स्वागत करना चाहिये वह करने में हम चूक रहे हैं।
जहॉ तक मुझे स्मरण है फारूख अब्दुल्ला के उक्त वक्तव्य और नारे पर सार्थक प्रतिक्रिया न भाजपा के और न ही अन्य किसी पार्टी के नेता द्वारा दी गई हो ऐसा मेरी जानकारी में नहीं है।
मीडिया में भी इस पर कोई संपादकीय या स्तंभ प्रकाशित हुआ हो यह भी मेरी जानकारी में नही है।
आज बकरीद की नमाज पढऩे के तुरंत बाद कश्मीर में भारत की सेना के जवानों के वाहनों पर पत्थरबाजी की गई।
इतना ही नहीं ईद की नमाज के बाद जैसे ही एसपीओ फैयाज अहमद बाहर आए, आतंकियों ने उनपर गोलियां चला दीं।  एसपीओ आतंकवादियों से मुकाबले के लिए पुलिस द्वारा चलाए जा रहे अभियान में शामिल थे।
पत्थरबाज घाटी की सड़कों पर निकले और पाकिस्तान के झंडे लहराए और आतंकवादी समूह इस्लामी राज्य इराक और सीरिया (आईएसआईएस) से का बैनर भी लहराया.  जिसके बाद शांति को बाधित करने के लिए, प्रदर्शनकारियों ने ईद की नमाज अदा करने के बाद हिंदुस्तान विरोधी नारे लगाना शुरू किए और सुरक्षाबलों के कर्मियों से जा भिड़े।
आज हजरत बल में ईद की नमाज के दौरान फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ नारेबाजी की गई। बकरीद के मौके पर वह श्रीनगर की हजरत बल दरगाह पहुंचे थे जहां स्थानीय लोगों ने उनका विरोध किया और उनके खिलाफ  नारेबाजी की।
जानकारी के अनुसार प्रार्थना खत्म होते ही फारूक अब्दुल्ला जैसे ही मस्जिद से बाहर निकलने लगे तो लोगों ने अपने जूते हाथों में पकडकऱ शर्म करो, शर्म करो के नारे लगाना शुरू कर दिये। बताया जा रहा है कि फारूक के खिलाफ ये नारेबाजी भारत माता की जय के नारे लगाने के विरोध में की गई।
फारूक अब्दुल्ला ने भारत माता की जय बोलने पर उनका विरोध करने वालों पर तीखा पलटवार किया है। फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि वो ऐसे विरोध से डरने वाले नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमें जीना भी इसी मुल्क में है और मरना भी इसी मुल्क में हैं। कश्मीर के लोग हिंदुस्तान का हिस्सा है और नफरत से नहीं प्यार से कश्मीर बनेगा। अब्दुल्ला ने कहा, ‘देश को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। ये देश हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई सबका है। उन्होंने कहा कि जो लोग विरोध कर रहे हैं वे चंद सिरफिरे हैं, कश्मीरी गद्दार नहीं है।
मुझे आश्चर्य है जिस निडरता का परिचय फारूख अब्दुल्ला ने अब दिया है उसके लिये उनकी प्रशंसा करनेे में हम सभी क्यों चूक रहे हैं।
कुलभूषण जाधव से मिलने की अनुमति उनकी माता और पत्नी को पाकिस्तान को देनी पड़ी  थी अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की लताड़ के बाद में। वहॉ पर उनकी पत्नी के साथ दुरव्यवहार करते हुए उनकी जूती तक निकलवा ली गई थी।
इसे स्मरण कर संभवत: नवजोत सिद्धूृ पाकिस्तान से जूते खरीदकर लाये।
उन्हीं जूतों से उत्साहित होकर  कश्मीर के अलगाववादियों ने फारूख अब्दुल्ला को जूते दिखाने का दुस्साहस किया है।
मुझे विश्वास है कि मीडिया और राजनीतिज्ञ निडर होकर फारूख अब्दुल्ला के उक्त देशभक्ति और निडरता की प्रशंसा करेंगे।