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श्रीकृष्ण का जीवन हर संस्कारों का जीवन्त उदाहरण

जीवन में हर कर्म कलाओं व संबंधों को निभाने के आदर्श के रूप में श्रीकृष्ण जी का चरित्र हम सबके सामने है। उनका जीवन ही हर संस्कारों का जीवन्त उदाहरण है। पूरे सृष्टि चक्र में सर्वाेत्तम भूमिका होने के कारण वे इस रंगमंच के सबसे श्रेष्ठ नायक हैं, परमात्मा की सर्वाेत्तम रचना है, १६ कला सम्पूर्ण अर्थात् पवित्रता से संपन्न उनका जीवन रहा। भक्त जिन्हें बच्चों से प्यार है वे श्रीकृष्ण को लल्ला के रूप में देखते हैं, प्रेमी-प्रेमिका उन्हें राधे-कृष्ण के रूप में याद करते हैं, योद्धा उन्हें महाभारत के युद्ध में देखते हैं, पॉलीटिशियन्स उन्हें शासक-प्रशासक व मार्गदर्शक के रूप में सामने रखते हैं अर्थात् सभी भूमिकाओं पर उनका जीवन हमारे लिए प्रेरणादायी है जो समाज को चाहिए क्योंकि हर मनुष्य अपने जीवन में अनेक भूमिकाएं
निभाता है।
ये बातें जन्माष्टमी के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र के हार्मनी हॉल में जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू ने कही। उन्होंने बताया कि उन्होंने जहां बचपन की लीलाओं के माध्यम से अनेक कल्याणकारी कर्तव्य किए वहीं अर्जुन के साथ मित्रता का, द्रौपदी के साथ भाई का, कुंती के साथ पुत्र समान, राधा के साथ साजन के रूप में, विदुर के घर मेहमान बनकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। यहां तक कि युधिष्ठिर द्वारा रचित राजसुयज्ञ में भी उन्होंने झूठे पत्तल उठाकर सिद्ध किया कि कोई भी कर्म छोटा नहीं होता, हर कर्म का महत्व होता है।
इस अवसर पर सेवाकेन्द्र में बहुत सुंदर झांकी सजायी गई जिसे देखने पहुंची भीड़ को परमात्म संदेश देते हुए दीदीजी ने आग्रह किया कि झांकी देखने के साथ अपने अंदर भी झांकें और वर्तमान समय इस कल्याणकारी संगमयुग की वेला में अपने जीवन का कुछ समय निकालकर इस धरा पर अवतरित हुए परमपिता परमात्मा को पहचानकर उनके सानिध्य का लाभ ले लें।
अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मनमोहक आयोजन
इस अवसर पर श्रीकृष्ण की लीलाओं व चरित्रों पर आधारित अनेक मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गई। जहां दृष्टिबाधित बच्चे- कु.पूजा व पृथ्वी कुमार ने कृष्ण भक्ति के बहुत सुंदर गीत गाए। वहीं कु. तन्मया ने काहे छेड़-छेड़ मोहे गीत व कालिया नाग पर, कु. भारती, कु. गौरी, कु. दिव्या व कु. रितु ने गोवर्धन लीला, राधा ढ़ूंढ़ रही किसी ने मेरा श्याम ढ़ूंढ़ा…., सांवरी सूरत पे मोहन…., हर जन्म में सांवरे का साथ चाहिए….आदि गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किए। वहीं मंजू दीदी जी के साथ बहनों व भाईयों ने श्रीकृष्ण के विभिन्न चरित्रों पर आधारित नृत्य नाटिका – सब सौं ऊंची प्रेम सगाई प्रस्तुत किया।