छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के ठीक पहले राज्य की रमन सरकार ने कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए किसानों को धान की फसल पर 300 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने के फैसले पर मुहर लगा दी है. बता दें कि बीजेपी ने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों को 300 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने का वादा किया था.
सरकार ने इस वर्ष करीब 75 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है. जिसके लिए कैबिनेट में 2400 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है. कैबिनेट में इस बात पर भी चर्चा की गई है कि इस बजट को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर अनुपूरक बजट में पास किया जाए. जिसके लिए 11-12 सितंबर को दो दिवसीय सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल से भी अनुमति मांगी गई है. राज्य सरकार के इस फैसले से लगभग 13 लाख किसानों को फायदा होगा. राज्य सरकार यह सुनश्चित करने की तैयारी कर रही है कि किसानों को यह बोनस दीपावली के पहले ही बांट दिए जाए .
छत्तीसगढ़ में किसान और उनके कल्याण की योजनाएं हमेशा से एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहती है. राज्य की बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है. जो एक बड़ा वोट बैंक भी है. राज्य की कुल ढाई करोड़ की आबादी में डेढ़ करोड़ परिवार खेती से जुड़े हैं. इसमें लगभग 12 लाख पंजीकृत किसान हैं. जबकि लगभग 18 लाख गैर पंजीकृत किसान, इसके अलावा आठ लाख के लगभग ऐसे किसान है जो साग सब्जियों का उत्पादन करते हैं.
प्रदेश में बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही दल किसानों को लुभाने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ती. यही नहीं मौका पड़ने पर दोनों ही राजनीतिक दल एक दूसरे को किसान विरोधी होने का आरोप लगाने से भी नहीं चूकते. मुख्यमंत्री रमन सिंह के इस नए एलान के बाद कांग्रेस भी इसे भुनाने में पीछे नहीं है. कांग्रेस का दावा है कि उसके दबाव के चलते ही मुख्यमंत्री रमन सिंह को यह फैसला लेना पड़ा. कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि सिर्फ चुनावी फायदा उठाने के लिए बीजेपी किसानों की हमदर्द बन रही है. जबकि पूरे पांच साल उनकी अनदेखी की गई.

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