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Editorial :- आरएसएस की शाखा आईये संघ को समझिये

आरएसएस प्रमुख के बयान से कांग्रेस गदगद, कहाभागवत ने खोल दी जनता की आंखें। जनता की आंखे तो खुली हुई है परंतु राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की आंखे खुलना आवश्यक है।
मोहन भागवत जी ने देश की स्वतंत्रता के लिए कांग्रेस पार्टी के योगदान को सराहा है। यह पहला अवसर नहीं है जबकि किसी भी राजनीतिक नेता या पार्टी के अच्छे कार्यों की प्रशंसा संघ ने की है। इसके पूर्व राजीव गांधी के भी अच्छे प्रयासों की संघ प्रशंसा कर चुका है।
संघ को समझने के लिये गांधी से लेकर  पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी तक जिस प्रकार से संघ के कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर संघ को समझा है वही सत्कर्म संघ की आलोचना करने वालों को  करना आवश्यक है।
मंै दूसरी कक्षा में पढ़ रहा था तब से ही संघ का स्वयंसेवक हूं। १९५९ में नागपुर मेें संघ के प्रशिक्षण शिविर में रायपुर के स्वयंसेवक के नाते सम्मिलित होकर संघ से और संस्कारित होने का मुझे सुअवसर प्राप्त हुआ था।
संघ के कार्यक्रमों में, शाखा में जाने से किस प्रकार से संस्कार प्राप्त होते हैं इसके संक्षिप्त में कुछ उदाहरण मैं दे रहा हूं।
मा..गोलवलकर जी नागपुर में संघ के प्रशिक्षण शिविर में बातबात में संस्कारित करते थे। गोलवलकर जी (गुरूजी) स्वयं तो दाढ़ी रखे थे और बाल भी लंबे रहते थे। जहॉ तक मुझे स्मरण है उन्होंने ऐसा इसलिये किया था क्योंकि उनके जो गुरू थे उन्होंने गोलवलकर जी को समाज की सेवा में कार्यरत होने को कहा था परंतु उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें गोलवलकर जी के बाल और दाढ़ी अच्छी लगती है वे इसे वैसे ही रखें।
प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने वाले किसी स्वयंसेवक को बिना शेविंग के देखते थे तो वे उंगली से इशारा करते हुए मंद मुस्कुराते हुए कहते थे ऐसा क्यों?
इसी प्रकार से बेल्ट के बक्कल या जूते में पॉलिश होने पर वे इशारेइशारे में समझा देते थे।
यदि कोई स्वयं सेवक अपनी बनियान गलत प्रकार से सुखाने के लिये टांग देता था तो भी वे  ऐसा करने के लिये कह देते थे।
भोजन परोसने का कार्य भी स्वयं सेवक ही बारीबारी से करते थे। यदि परोसने वाला कोई स्वयं सेवक अपनी नाक पर हाथ रखने लग जाता था तो वे यदि स्वयं सेवक का नाम लेकर भी कह देते थे कि ऐसा क्यों?
इस प्रकार से छोटीछोटी बातों से होते हैं स्वयं सेवक संस्कारित।
इसीलिये मेरे जैसा साधारण स्वयं सेवक भी आज यह कह सकता है कि मुझमें जो भी कुछ अच्छाईयां है वह संघ के वातावरण में रहने से है और जो बुराईयां या त्रुटियां है वे बाहरी वातावरण से है।
यहॉ एक और बात का मैं उल्लेख करना चाहूंगा। एक समय संघ के संस्थापक डॉ हेडगेवार जी के साथ में एक संघ के अधिकारी बैठे हुए थे। डॉ साहब ने अधिकारी जी को कहा कि वे सामने जो लड़के जा रहे हैं वे स्वयं सेवक प्रतीत होते हैं उन्हें बुलाइये।
अधिकारी ने आश्चर्य चकित होते हुए प्रश्न किया कि डॉ साहब वे स्वयंसेवक ही हैं ऐसा कैसे?
डॉ साहब ने कहा आप बुलाईये, उनकी चाल से लगता है कि वे स्वयंसेवक हैं। जब उन लड़कों को बुलाया गया तो वास्तव में वे स्वयंसेवक ही थे।
अतएव संस्कारित स्वयंसेवक जहॉ कहीं भी रहेंगे जाएंगे वे अपनी पहचान अपने क्रियाकलापों से बता देते हैं।
अतएव अभी जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन दिन के व्याख्यानमाला कार्यक्रमभारत का भविष्यÓ में संघ की विचारधारा समझने के इच्छुक विपक्षी नेताओं को तथा समाज के विभिन्न वर्गों के महानुभावों को भी आमंंत्रित किया गया था।
कार्यक्रम के आज के अंतिम दिन २०० से भी अधिक उपस्थित लोगों की तरफ से 215 सवाल आए हैं और उनके उत्तर सरसंघचालक   मोहन भागवत जी ने देते हुए संघ के विचारोंं को समझाने का प्रयास किया है।
इसका विस्तृत विवरण यहॉ अलग से दिया गया है।