लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष का महागठबंधन टूटता नज़र आ रहा है. हाल ही में खबर आई थी कि 2019 के चुनाव में उत्तर प्रदेश में महागठबंधन के 40-40 सीटों के फॉर्मूले से मायावती खुश नहीं थीं. अब छत्तीसगढ़ में मायावती ने कांग्रेस से किनारा कर लिया है. यहां  विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मायावती ने अजीत जोगी की पार्टी से गठबंधन कर लिया. गुरुवार को  प्रेस कॉन्फ्रेंस में बसपा प्रमुख मायावती ने यह जानकारी दी. अब तक अनुमान लगाया जा रहा था कि छत्तीसगढ़ का चुनाव बसपा कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ सकती है. छत्तीसगढ़ विधानसभा की कुल 90 सीटों पर बसपा 35 और अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस (छत्तीसगढ़-जे) 55 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. बसपा प्रमुख ने कहा कि अगर उनका गठबंधन जीतता है तो अजीत जोगी मुख्यमंत्री होंगे.
छत्तीसगढ़ में पिछले 15 सालों से डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है. अगर पिछले तीन चुनावों पर नज़र डालें तो कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर रही है. जीत-हार में सिर्फ दो या तीन प्रतिशत का फ़र्क ही रहा है. वहीं, इन चुनावों में बसपा का वोट प्रतिशत 4 और 6 के बीच रहा है. अगर बसपा और कांग्रेस का गठबंधन हो जाता तो कांग्रेस की सरकार बनने की  संभावनाएं प्रबल हो जातीं हैं .
लगातार 3 बार बनी भाजपा की सरकार
2003 में इस प्रदेश के गठन के बाद से ही यहां लगातार 3 बार भाजपा की सरकार बनी है और यदि अगले चुनाव में भी कांग्रेस ने इस राज्य में जमीनी स्र पर प्रबंधन मजबूत न किया तो भाजपा को रोकना कांग्रेस के लिए मुश्किल हो सकता है. कांग्रेस ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी व उनके बेटे अमित जोगी को पार्टी से निकाला है और पिता-पुत्र की यह जोड़ी आंध्र प्रदेश की तर्ज पर कांग्रेस के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है. आंध्र प्रदेश में भी जगनमोहन रेड्डी ने अलग पार्टी बनाकर राज्य से कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया था और जोगी भी अगले विधानसभा चुनाव में इसी राह पर चलते नजर आ रहे हैं. उन्होंने पिछले साल जून में छत्तीसगढ़ कांग्रेस का गठन किया है और वह अगले चुनाव में उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं. यदि जोगी ने छत्तीसगढ़ में वोटों का विभाजन कर दिया तो भाजपा को उसका फायदा होगा. प्रदेश का चुनावी इतिहास बताता है कि कांग्रेस छत्तीसगढ़ में भाजपा से कम और स्वतंत्र उम्मीदवारों के कारण ज्यादा हारी है.
2013 में 2 लाख से कम वोट से हारी कांग्रेस
छत्तीसगढ़ का पिछला विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. पार्टी को इस चुनाव में 39 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा ने  करीब 1 फीसदी वोटें ज्यादा हासिल करके 49 सीटें जीत लीं. नतीजों की रोचक बात यह रही कि कांग्रेस और भाजपा की जीत का अंतर 97,574 वोट रहा, जबकि नोटा को 4,01,058 वोट मिल गए.

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