मध्यप्रदेश में चुनाव से पहले नाराज वर्ग को मनाने का सरकार का हर दांव उलटा पड़ता दिखाई दे रहा है. प्रदेश में सरकार से नाराज अतिथि शिक्षकों को मनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मास्टर स्ट्रोक चलते हुए अतिथि शिक्षकों के मानदेय को दोगुना करने का ऐलान किया है लेकिन सरकार का ये मास्टर स्ट्रोक भी बेकार चला गया. अतिथि शिक्षकों ने सरकार की इस सौगात को खारिज करते हुए इसे ‘चुनावी जुमलेबाजी’ बताया है. अतिथि शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष रविकांत गुप्ता ने कहा कि सरकार मानदेय बढ़ाने का ढोंग करके जन मानस मे अपनी वाहवाही करवा कर केवल वोट लेना चाहती है. उनका कहना है कि सरकार ने पहले ही नए सत्र से अतिथि शिक्षकों के मानदेय को बढ़ाने की घोषणा की थी लेकिन आज तक अतिथि शिक्षकों को बढ़ा हुआ वेतन नहीं मिला.
सरकार ने खुशी से नहीं मजबूरी में बढ़ाया है मानदेय
वहीं जब उच्च न्यायालय के फटकार के बाद मानदेय बढ़ाया तो उसमे भी सरकार ने गेम खेल दिया. पहले जहां अतिथि शिक्षकों को वर्ग 1 मे 60 रू वर्ग 2 में 50 प्रति कालखण्ड व वर्ग 3 100 रू प्रति दिन देती थी जिससे 4500/ 3500/ 2500 मिलते थे और बढ़े हुए मानदेय के अनुसार अतिथि शिक्षकों को वर्ग 1 मे 90 रू वर्ग 2 मे 75 प्रति कालखण्ड व वर्ग 3 में 50 रू प्रति दिन देगी. और उन्हे मात्र तीन कालखण्ड का ही मानदेय मिलेगा जिससे उन्हे मात्र 6,750 रुपए 5,625 रुपए और 3,750 रुपए ही मानदेय प्राप्त होगा. लेकिन सरकार इसे दुगना मानदेय बताकर अपनी पीठ थपथपा रही है.
खुला विरोध करेंगे अतिथि शिक्षक
आगे उन्होने कहा कि सरकार अतिथि शिक्षकों से पूरे दिन कार्य करवाती है और मानदेय दो या तीन पीरियड का ही देना चाहती. जिला संयोजक बलभद्र सिह ने कहा अब अतिथि शिक्षक सरकार खुला विरोध करेगे व जो पार्टी अतिथि शिक्षकों का हित करेगी उसी पार्टी का अतिथि शिक्षक सहयोग करेगे. नही तो खुद अतिथि शिक्षक अपने प्रत्याशी मैदान मे उतारेगें. क्योकि जिले के सभी गांवों मे 4-6 अतिथि शिक्षक निवास करते है और पूरे जिले भर मे करीब 3000/ अतिथि शिक्षक है जो करीब चारो विधान सभा मे 50,000 वोट प्रभावित कर सकते है.

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