8 October 2018

एक अन्य समाचार है कि शरद पवार ने भी घोषणा की है कि वे २०१९ के लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी नहीं होंगे।
एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार चुनाव से पहले महागठबंधन की कल्पना को व्यावहरिक ही नहीं मानते हैं. उनका मानना है कि क्षेत्रीय दलों की मजबूती की वजह से महागठबंधन व्यावहारिक नहीं दिखाई देता है. पवार का राजनीतिक अनुभव और दूरदर्शिता उनके इस बयान से साफ दिखाई देता है।
रविवार को राजधानी लखनऊ पहुंचे गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस और सपा में मारामारी मची है. दोनों को आत्मचिंतन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि महज मोदी विरोध के नाम पर गठबंधन नहीं बनाया जा सकता।
राजनीतिक गठबंधन ङ्कह्य महागठबंधन :
ठीक ही कहा गया है कि महागठबंधन से पहलेमहाभारतÓ के लिए कांग्रेस रहे तैयार, क्करू  पद कीबाधारेसÓ कैसे होगी पार।
फिलहाल कांग्रेस के लिए महागठबंधन बना पाना उसी तरह असंभव दिखाई दे रहा है जिस तरह अपने बूते साल 2019 का लोकसभा चुनाव जीतना।
  बड़ा सवाल ये है कि सिर्फ मोदी को रोकने के लिए क्या पश्चिम बंगाल में टीएमसी और वामदल आपसी रंजिश को भुलाकर कांग्रेस के साथ सकेंगे? क्या तमिलनाडु में डीएमके और आआईएडीएमके, बिहार में लालूनीतीश, यूपी में अखिलेशमायावती और दूसरे राज्यों में गैर कांग्रेसी क्षेत्रीय दलों के साथ कांग्रेस का गठबंधन साकार हो सकेगा?
क्या केरल में कांगे्रस और वामपंथी दल लोकसभा चुनाव भाजपा के विरूद्ध मिलकर लड़ेंगे? इसी प्रकार के प्रश्र चिन्ह मोदी फोबिया से ग्रस्त नेताओं के समक्ष खड़े हैं। बिहार, आंध्रा, तेलंगाना आदि प्रांतों के संबंध में।
प्रजातंत्र में सशक्त विपक्ष तो जरूरी है परंतु क्या सिर्फ मोदी विरोध के नाम पर महागठबंधन नहीं बन जायेगा महाठगबंधन या गृहयुद्ध की स्थिति उत्पन्न करने के लिये महालठबंधन।
यहॉ मैं कांग्रेस और नेहरूगांधी डायनेस्टी के सत्तालोलुपता के संबंंध में भी चर्चा करना चाहूंगा। पंडित नेहरू अपना बहुरूपीया रूप धारण कर देश का विभाजन करवाकर प्रधानमंंंत्री बन गये।
उसके उपरांत उन्होंने दिल में सपने संजोये रखे अपनी एकमेव पुत्री इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का और इस दृष्टि से उन्होंने इंदिरा जी को तैय्यार करना (त्रह्म्शशद्वद्बठ्ठद्द) प्रारंभ कर दिया था। इसी उद्देश्य से इंदिरा जी को उन्होंने उनके पति फिरोज गंाधी से अलग करवाकर अपने पास रखा।
कुछ घटनाक्रम ऐसा हुआ कि लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बन गये। परंतु यह नेहरूगांधी खानदान को नागुजार हुआ। उसके उपरांत ताशकंद में शास्त्री जी की रहस्यमय ढंग से हत्या हो गई।
शास्त्री जी की मृत्यु के बाद रूसी केजीबी और इंदिरा जी अपनी किचन वामपंथी लॉबी की मदद से प्रधानमंत्री बन गई।
उनकी मृत्यु के उपरांत प्रणव मुखर्जी के प्रधानमंत्री बनने का वातावरण था परंतु एक षडयंत्र के तहत राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनाया गया।
राजीव गांधी की मृत्यु के उपरांत गठबंधन का दौर प्रारंभ हुआ क्योंकि कांग्रेस अब पूर्ण बहुमत खो चुकी थी।
नरसिंह राव  प्रधानमंत्री तो बन गये परंतु इससे नेहरूगांधी डायनेस्टी भक्त कांग्रेस के नेता छटपटाते रहे।
इस प्रकार से हम देखते हैं कि नेहरूगांधी डायनेस्टी की मु_ में कांग्रेस रही है और कांग्रेस तथा गांधी डायनेस्टी का कोई भी सदस्य यह कभी नहीं चाहा कि कांग्रेस का अध्यक्ष या भारत का प्रधानमंत्री कोई दूसरा बने।
यही कारण है कि मजबूरी में भले ही कांग्रेस अपने बाहरी सपोर्ट से किसी अन्य को जैसे देवगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल को प्रधानमंत्री बना दिया हो परंतु उनका शासन एक वर्ष से अधिक नहीं चल सका यही हश्र उनके पूर्र्व चंद्र शेखर अन्य के साथ हुआ।  
अब वर्तमान स्थिति की पुन: चर्चा करें तो हमारे सामने महाभारत का दृश्य उपस्थित हो जाता है।
दुर्योधन और पांडव दोनों ही श्री कृष्ण के पास उनकी सहायता प्राप्त करने के लिये पहुंचे। श्री कृष्ण ने दोनों से कहा कि दोनों ही उनके प्रिय हैं।  दोनों को ही वे निराश नहीं करेंगे। एक तरफ मैं स्वयं हूं और दूसरी तरफ मेरी अपार सेना है। दुर्याधन से पूछा कि वह क्या चाहता है? दूर्योधन ने तपाक से सेना मांग ली। पांडवों ने खुशीखुशी श्री कृष्ण जी को मांग लिया। परिणाम क्या हुआ यह हम सबको विदित है।
अभी भी महाभारत का युद्ध कुरूक्षेत्र के मैदान में २०१९ में सज रहा है। एक तरफ कौरव हैं अपार सेना के साथ और दूसरी तरफ पांडव हैं अपनी सेना के साथ। पांडवों को अर्थात भाजपा को अर्थात एनडीए को श्री कृष्ण के रूप में सार्थी नरेन्द्र मोदी का साथ मिला हुआ है और दूसरी ओर….
गठबंंधन और महागठबंधन खड़े हैं टुकटुकी लगाये। यूपीए और एनडीए दोनों ही अपनेअपने गठबंधन बनाये हुए हैं। परंतु यूपीए का नेतृत्व कर रही कांग्रेस अब महागठबंधन बनाने की प्रक्रिया में है। उसका किस प्रकार से हश्र हो रहा है इसकी तो चर्चा ऊपर कर चुका हूं।
पवार दिग्भ्रमित हैं। लालू जेल में हैं। महागठबंधन के अन्य नेता बेल पर हैं। जेल जाने की तैय्यारी में हैं।
राहुल गांधी येनकेनप्रकारेण प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। इसके लिये उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन भी भारत के दुश्मन चीन और पाकिस्तान की मदद से बना लिया है।
जिस प्रकार से सियार अपने आपको रंगे देखकर शेर समझ लेता है वही हाल राहुल गांधी का है। वे बहुरूपीये बन जैसे घटनावश हिंदू नेहरू दिल से मुस्लिम और अंग्रेज होते हुए भी अपने नाम के आगे पंडित रख लिये थे उसी प्रकार से राहुल भी अब मध्यप्रदेश चुनाव में अपने पोस्टर में राम और शिवभक्त के बाद नर्मदा भक्त बनकर पंडित राहुल नामांकित हो पुलकित हैं।
प्रजातंत्र बनाम परिवारवादी का रूप धारण कर चुका है २०१९ का लोकसभा चुनाव। एक तरफ प्रजातांत्रिक भाजपा है और दूसरी तरफ अप्रजातांत्रिक परिवारवादी पार्टियां हैं। परिवारवाद  प्रजातंत्र का पोषक नहीं हो सकता।
यह तो समय ही बतायेगा कि २०१९ के महाभारत में विजय किसकी होगी?

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