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कल वसुंधरा के गढ़ धौलपुर में राहुल गांधी, मायावती भी हैं चुनौती

पांच राज्यों में चुनाव तारीखों की घोषणा के साथ ही रैलियों और जनसभाओं की संख्या में तेजी आ गई है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मध्य प्रदेश में रोड शो करने के बाद अब राजस्थान की जनता के बीच पहुंच रहे हैं, जहां वह 9 व 10 अक्टूबर को अलग-अलग चुनावी कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. राहुल अपने दौरे की शुरुआत मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गढ़ धौलपुर से करेंगे.
बताया जा रहा है कि राहुल गांधी अपने रोड शो के दौरान जिले की सभी चार विधानसभा सीटों को कवर करेंगे, जिसकी शुरुआत धौलपुर से होगी और राहुल का काफिला महुआ तक जाएगा. यह रोड शो करीब 150 किलोमीटर का बताया जा रहा है, जिसमें राहुल पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर आम जनता तक पहुंचेंगे. राहुल पिछले दो महीनों में महज दो बार ही राजस्थान के दौरे पर गए हैं, लेकिन अब जबकि हर कोई चुनाव मोड में आ गया है, ऐसे में राहुल का वसुंधरा के गढ़ से चुनावी कैंपेन का आगाज करना भी काफी अहम माना जा रहा है.
क्या है कार्यक्रम?
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राजस्थान के 5 जिलों की 2 दिन की यात्रा पर कल धौलपुर पहुंच रहे हैं. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के घर धौलपुर से अपना रोड शो शुरू करेंगे और भारतपुर होते हुए दौसा जिले में पहुंचेंगे.मंगलवार सूबह करीब 11:30 बजे राहुल गांधी दिल्ली से धौलपुर के मनिया आएंगे. 11:40 पर मनिया में नुक्कड़ सभा संबोधित करेंगे और उसके बाद बस में सवार होकर अपना रोड शो शुरू करेंगे. 150 किलोमीटर लंबे रोड शो में एक दर्जन छोटी और दो बड़ी जनसभाओं को राहुल गांधी संबोधित करेंगे. धौलपुर के बसेड़ी और गुलाब पुर में भी राहुल गांधी की सभा है. इसके बाद बयाना के रास्ते भरतपुर जिले में प्रवेश करेंगे और वहां से दौसा के महुआ में आकर रात को 8:00 बजे अपना रोड शो खत्म करेंगे.
धौलपुर की महारानी हैं वसुंधरा राजे
मौजूदा मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता वसुंधरा राजे सिंधिया का इस जिले से पुराना नाता है. ग्वालियर राजघराने की बेटी वसुंधरा राजे की शादी धौलपुर के राजा हेमंत सिंह से हुई थी. हालांकि, 1972 में शादी के कुछ वक्त बाद ही दोनों अलग हो गए, लेकिन वसुंधरा ने धौलपुर नहीं छोड़ा और वहां की रानी बनकर जनता का स्नेह प्राप्त करती रहीं. यहां तक कि वसुंधरा राने ने अपने राजनीतिक करियर का आगाज भी इसी धौलपुर से किया, जब 1985 में उन्होंने पहली बार धौलपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की.
धौलपुर का सियासी समीकरण
धौलपुर जिला भरतपुर संभाग में आता है और यहां कुल 4 विधानसभा सीट हैं, इनमें 3 सीटें सामान्य वर्ग के लिए हैं, जबकि 1 सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है. 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 2 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि बीजेपी और बीएसपी को 1-1 सीट मिली थी. ऐसा तब था जबकि पूरे राज्य में कांग्रेस 200 में से महज 21 सीट ही जीत पाई थी.
जिले की 90 फीसदी से ज्यादा आबादी हिंदू है, जबकि यहां करीब 6 फीसदी मुस्लिम जनसंख्या है. अनुसूचित जाति 20 और अनुसूचित जनजाति की आबादी करीब 5 फीसदी है. यहां ब्राह्मण, कुशवाह के अलावा गुर्जर और राजपूत वोट भी निर्णायक भूमिका में है.
बसपा भी फैक्टर
मध्य प्रदेश की सीमा से सटे धौलपुर में एससी वोटों का खासा प्रभाव है, जिसके चलते बहुजन समाज पार्टी को भी यहां जीत मिलती रही है. 2013 के चुनाव में बीएसपी को जिले की चारों सीटों पर 1 लाख से ज्यादा वोट (23%) प्राप्त हुआ था और पार्टी तीसरे नंबर रही थी. जबकि कांग्रेस को यहां सबसे ज्यादा 36% वोट व बीजेपी को 32% वोट प्राप्त हुआ था.
धौलपुर सीट की ही बात की जाए तो बसपा के टिकट पर बीएल कुशवाहा ने यहां से बाजी मारी थी. लेकिन कत्ल की साजिश रचने के आरोप में दिसंबर 2016 में बीएल कुशवाहा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई और कुशवाहा की पत्नी शोभारानी बीजेपी में शामिल हो गईं. 2017 में शोभारानी ने बीजेपी के टिकट यहां से उपचुनाव लड़ा और वह जीत गईं. 2008 के चुनाव में भी इस सीट पर बीएसपी ने कड़ी चुनौती दी थी और वह कांग्रेस से 700 वोट व बीजेपी से करीब 2 हजार वोट से पिछड़ गई थी.
धौलपुर के अलावा बसेड़ी सीट पर भी बसपा ने 2013 के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था और तीसरे नंबर पर रहते हुए उसे 26 फीसदी वोट शेयर मिला था. जबकि बीजेपी को 36 और कांग्रेस को 35 प्रतिशत वोट मिला था. राजखेड़ा सीट पर भी बीएसपी तीसरे नंबर पर रही थी.
ऐसे में कांग्रेस के साथ गठबंधन न करने का बसपा सुप्रीमो मायावती का फैसला, धौलपुर जिले के नतीजे प्रभावित कर सकता है. शायद यही वजह है कि धौलपुर में बीजेपी की कमजोरी को देखते हुए बीएसपी फैक्टर से पार पाने के लिए राहुल ने यहां जान फूंकने पहुंच रहे हैं.