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धमतरी में गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद और जैविक कीटनाशक दवाई तैयार कर के कर रहे है जैविक खेती

गौमाता के गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद और जैविक कीटनाशक दवाई बनाकर जैविक खेती विभिन्न फसलों चावल, मूली, भाटा, चनाबूट रायपुर रोड में टाटा मोटर्स शोरूम के सामने संबलपुर के पास खेम साहू कुर्रा निवासी कर रहा है। मूली का वजन साढ़े तीन किलो का वो भी एकदम नरम, भाटा का वजन भी एक किलो तक रहता है। इसका स्वाद व खुश्बू भी बहुत ही सुन्दर और प्राकृतिक रहता है । खेम साहू अपने गांव कुर्रा में चावल की जैविक खेती भी कर रहा है। वर्तमान परिदृश्य में हम सब रासायनिक खाद और कीटनाशक के प्रयोग से उत्पन्न अन्न, फल सब्जी शरीर के लिए बहुत ही घातक हो रहा है वह इसके आवश्यक गुणकारी तत्व भी प्रदूषित हो रहा है। इसका प्राकृतिक स्वाद और खुशबू भी गायब हो गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ धमतरी के जिला कार्यवाह मोहन लाल साहु का कहना है कि रासायनिक कीटनाशक और खाद वाले अन्न, फल सब्जी के प्रयोग से शरीर का प्रतिरोधक क्षमता कम हो गया है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इतना कम हो गया है कि बिना एंटीबायोटिक दवाई के सामान्य बीमारी बुखार, सर्दी, खांसी भी ठीक नहीं होता है । जबकि शरीर के लिए यह एंटीबायोटिक दवाई उचित नहीं है।

पहले गौमाता के गोबर खाद और गोमूत्र से बने जैविक खेती किया जाता था। इससे मनुष्य के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता काफी अच्छी थी । सामान्य दवाई से भी बिना एंटीबायोटिक दवाई के प्रयोग से बीमारी भी ठीक हो जाया करती थी। मनुष्य की आयु भी बहुत लंबी हुआ करती थी। रासायनिक खाद और कीटनाशक के प्रयोग से लीवर, किडनी, आदि शरीर से संबंधित गंभीर बीमारी कैंसर जैसे लाइलाज व अन्य बीमारी हो रही है। रासायनिक खाद और कीटनाशक के प्रयोग से भुमि उर्वरक क्षमता कम हो रही है, जमीन बंजर होते जा रहा है। प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ रहा है। मनुष्य के साथ अन्य जीव.जंतु पशुए पक्षी का जीवन प्रभावित हो रहा है। घर आंगन में कलरव करने वाले पक्षी भी गायब होते जा रहे हैं। वास्तव में वर्तमान समय में गौवंश पालन की महत्ता को अधिक बल देना चाहिए। गौमाता के संरक्षण और संवर्धन से ही सृष्टि में जीवन है। सभी किसान भाइयों को गौमाता के गोबर, गौमूत्र से बने जैविक खाद को बढ़ावा देते हुए जनजागरण अभियान चलाना चाहिए।