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जोगी और मायावती का गठबंधन हमें नहीं कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएगा: रमन सिंह

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह भाजपा के सबसे लंबे वक्त तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहने वाली शख्सियत हैं। हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने एंटी इंकंबेंसी से लेकर सतनामी संप्रदाय के सवालों पर जवाब दिये।
इस बार चुनाव की चुनौती के बारे में पूछे जाने पर रमन सिंह का जवाब वही चिरपरिचित शांत शैली में सामने आया। उन्होंने कहा, “हर चुनाव चुनौती ही होता है और हर चुनाव अलग भी। बीते 15 साल के दौरान हमने बिना थके लोगों की भलाई के लिए काम किया है। मतदाताओं ने हमारा प्रदर्शन देखा है। उम्मीद है कि वो हमारे साथ बने रहेंगे। प्रचार के दौरान मिले समर्थन के बाद अब इतना दबाव नहीं है।”
सवाल एंटी इंकंबेंसी का
रमन सिंह 15 साल से मुख्यमंत्री हैं। जाहिर हैं, तीन बार की एंटी-इंकंबेंसी उनके सामने सबसे बड़े खतरे के तौर पर है। इस सवाल पर उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार के खिलाफ कोई एंटी-इंकंबेंसी नहीं है। रमन सिंह ने कहा कि ये फैक्टर तब काम करता है जब आप लोगों की उम्मीद पर खरे न उतरें।
सतनामी संप्रदाय का क्या होगा असर?
भाजपा ने बीते 2013 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 10 में से 9 सीटों पर कब्जा जमाया था। सतनामी संप्रदाय ने तब निर्दलीय उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था लेकिन इस बार वो कांग्रेस के साथ हैं। क्या ये भाजपा को नुकसान पहुंचाएगा। रमन सिंह मानते हैं कि चूंकि मैदान में इस संप्रदाय के अनुयायियों में अजीत जोगी का भी ठीकठाक दखल है, वो कांग्रेस के वोट काटेंगे। उन्हें लगता है कि 2013 में करीब 4 फीसदी वोट लेने वाली बसपा और जोगी का गठबंधन इस बार 5 से 6 फीसदी वोट शेयर ला पाएगा। उन्हें लगता है कि कुछ बागी भाजपा उम्मीदवारों के उतरने के बावजूद सतनामी संप्रदाय भाजपा के मुकाबले कांग्रेस को ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा।
कांग्रेस की चुनौती
मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की चुनौती और एकता को लेकर भी रमन सिंह कुछ सशंकित हैं। इंटरव्यू में दिए जवाब में वो कांग्रेस के भीतर की लड़ाई की ओर इशारा करते हैं। रमन सिंह ने कहा, “कांग्रेस की एकता बस ऊपरी है। पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हैं। नेतृत्व में विभाजन काफी गहरा है।”

छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा सीटों में से 72 पर 20 नवंबर को मतदान हुआ। नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे।