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जानिए, संघ के न चाहते हुए भी कैसे वसुंधरा की चली, उतारा इकलौता मुस्‍लिम उम्‍मीदवार

राजस्थान विधानसभा चुनाव में सीएम वसुंधरा राजे की जिद के आगे आरएसएस को भी घुटने टेकने पड़े हैं। राजे ने टिकट वितरण में पार्टी के भीतर अपने विरोधी खेमे को परास्त कर दिया है। उम्मीदवारों के चयन में सिर्फ और सिर्फ वसुंधरा राजे की ही सुनी गयी। इसके पहले चर्चा थी कि संघ और पार्टी के वरिष्ठ नेता उनसे नाराज़ हैं और इसका असर उनके चेहते उम्मीदवारों पर पड़ेगा। कई करीबियों के टिकट काटे जाने का भी दावा किया गया। लेकिन, प्रत्याशियों के चयन में वसुंधरा ने लगभग अपने मन माफिक काम कराया। यहां तक मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारे जाने की रणनीति को भी उन्होंने खारिज करवा दिया और आखिरी पलों में अपने करीबी युनूस खान को टिकट दिलाकर संघ को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

बीजेपी ने युनूस खान का टिकट डीडवाना से काट दिया था। लेकिन, अब उन्हें कांग्रेस के उम्मीदवार सचिन पायलट के खिलाफ टोंक से मैदान में उतारा गया है। मुस्लिम बहुल टोंक सीट से कांग्रेस करीब चार दशक बाद किसी हिंदू चेहरे को मैदान में उतारी है। जबकि, इसके पहले यहां से मुसलमान उम्मीदवार ही कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ते रहे हैं। वहीं, मुस्लिम बहुल क्षेत्र में युनूस खान के नाम पर दांव चलकर वसुंधरा राजे किसी बड़े उलट-फेर की उम्मीद में हैं। ऐसा नहीं था कि टोंक से भी युनूस को टिकट मिलना आसान था। यहां पहले ही अजीत मेहता को टिकट दिया जा चुका था। लेकिन, उनका टिकट काटकर युनूस को दिया गया। बताया जा रहा है कि आरएसएस पहले दिन से युनूस खान को टिकट नहीं दिए जाने पर अड़ा था। लेकिन, वसुंधरा की जिद के आगे सभी को पीछे हटना पड़ा। इस बीच जैसे ही अजीत मेहता को उनके टिकट काटे जाने की सूचना मिली उन्होंने बागी रुख इख्तियार कर लिया। लेकिन, मेहता को शांत करने की जिम्मेदारी पार्टी ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को दी। शेखावत ने मेहता और टोंक के जिलाध्यक्ष गणेश को सीएम आवास पर बुलाया। वसुंधरा राजे और शेखावत की मौजूदगी में बागी नेताओं से बातचीत की गयी। जिसमें अजीत मेहता लगभग मान गए और युनूस का टिकट पक्के तौर पर फाइनल हो गया।