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शिवराज सिंह चौहान को अपने ही घर बुधनी में क्यों झेलनी पड़ रही है नाराजगी

तेरह साल से राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे शिवराज सिंह चौहान अपनी परंपरागत सीट बुधनी से चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी अपनी पत्नी साधना सिंह और पुत्र कार्तिकेय को सौंप रखी है. चुनाव प्रचार के दौरान साधना सिंह और कार्तिकेय दोनों को ही जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है. नाराजगी की वजह वे स्थानीय नेता हैं, जिन्हें क्षेत्र की जनता की समस्याओं को सुलझाने की जिम्मेदारी शिवराज सिंह चौहान ने दी थी. कांग्रेस उम्मीदवार जनता की इस नाराजगी को अपनी सफलता के तौर पर देख रहे हैं.

क्षेत्र में मौलिक समस्याएं हैं जनता की नाराजगी की वजह

क्षेत्र में बिजली की कोई समस्या नहीं है. बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कुछ गांवों में पीने के पानी की समस्या काफी गंभीर है. शिवराज सिंह चौहान के इस निर्वाचन क्षेत्र से ही नर्मदा बहती है. सिंचाई के लिए पानी की समस्या न होने के कारण किसानों को अच्छी उपज भी मिल जाती है. क्षेत्र की दूसरी बड़ी समस्या स्वास्थ्य सुविधाओं की है.

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कई प्राथमिक चिकित्सालयों में डाक्टर ही नहीं हैं. क्षेत्र के लोगों की बीमारी के इलाज के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हर संभव मदद भी करते हैं. मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान और स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत मदद भी मंजूर करते हैं. क्षेत्र का दौरा भी नियमित तौर पर करते हैं. स्थानीय नेताओं की शिकायतें मिलने के बाद उन्होंने अपने पुत्र कार्तिकेय को इस क्षेत्र की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी है. चुनाव प्रचार के दौरान कार्तिकेय को भी लगातार वोटरों के तानों को सुनना पड़ रहा है.

बुधनी क्षेत्र की बोली में बुंदेलखंडी का उपयोग ज्यादा होता है. इस कारण सहजता से कही गई बात भी गुस्से के रूप में बाहर आती है. कार्तिकेय से लोग पूछ रहे हैं कि चुनाव से पहले क्षेत्र की जनता का ख्याल क्यों नहीं आया?

वोटरों की नाराजगी में जीत उम्मीद लगाए हैं अरुण यादव

पिछले डेढ़ दशक में कांग्रेस स्थानीय स्तर पर एक भी ऐसा नेता तैयार नहीं कर पाई जो चुनाव में शिवराज सिंह चौहान के लिए चुनौती बन सके. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भोपाल से डॉ. महेंद्र सिंह चौहान को बुधनी चुनाव लड़ने के लिए भेजा था. महेंद्र सिंह चौहान का इस क्षेत्र से कभी कोई प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष वास्ता नहीं रहा था. वोटर भी उनके नहीं जानते थे और वो भी स्थानीय लोगों से अपरिचित थे.

डॉ. चौहान को टिकट देने की घोषणा के बाद ही यह भविष्यवाणी होने लगीं थीं कि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री चौहान को वॉकओवर दे दिया है. पिछले चुनाव में भी शिवराज सिंह चौहान ने प्रचार नहीं किया था.

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प्रचार की जिम्मेदारी स्थानीय नेताओं को सौंपकर पूरे प्रदेश में बीजेपी को जिताने निकल पड़े थे. इस बार भी शिवराज सिंह चौहान बुधनी में प्रचार करने नहीं जा रहे हैं. कांग्रेस ने उनके खिलाफ इस बार पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव को मैदान में उतारा है. यादव, का कार्य क्षेत्र खरगोन रहा है. बुधनी के लिए वे बाहरी उम्मीदवार हैं. अरुण यादव का साथ पूर्व विधायक राजकुमार पटेल एवं अर्जुन आर्य दे रहे हैं.

इसके साथ ही कांग्रेस ने क्षेत्र के पुराने नेताओं को भी घर से निकालकर जनसंपर्क में लगाया है. इस बार बुधनी विधानसभा में मुकाबला रोचक है, लेकिन कांग्रेस की जीत पक्की है, ऐसा भी नहीं है. कांग्रेस ने विधानसभा क्षेत्र में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. अरुण यादव गांव-गांव जाकर लोगों से घर-घर में संपर्क कर रहे हैं. वे वादा भी कर रहे हैं कि यदि यहां से जीते तो उनकी हर समस्या का निराकरण करेंगे. इसके साथ ही वे अपने संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों को भी जनता के सामने रख रहे हैं, ताकि जनता को विश्वास हो सके कि वे यहां पर जीतने के बाद काम कराएंगे.