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राजस्थान में 2274 उम्मीदवारों की साख दांव पर, 199 सीटों पर कल डाले जाएंगे वोट

राजस्थान में लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व के लिए तैयारियां जोरो पर है. सूबे में शुक्रवार को वोट डाले जाने है. इस बार 199 सीटों के लिए विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं. चुनाव मैदान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, AICC महासचिव अशोक गहलोत और सचिन पायलेट सहित 2274 उम्मीदवारों की साख दाव पर लगी हुवी है. चुनाव के लिए प्रदेश के कुल 51,65 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. जहाँ 4करोड़ 75 लाख 54 हज़ार 705 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. इनमें 2,47,22,365 पुरुष और 2,27,15,396 महिला मतदाता हैं. पिछले चुनाव में जहाँ 28 ट्रांसजेंडर ही वोट दे रहे थे वहीँ इस बार इनकी संख्या बढ़कर 238 हो गयी है. सबसे ज्यादा जयपुर में झोटवाडा विधानसभा क्षेत्र में 3 लाख 60 हज़ार 813 मतदाता है जबकि सबसे कम मतदाता धौलपुर के बसेडी विधानसभा क्षेत्र में 1 लाख 75 हज़ार 475 हैं. 4 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ 3 लाख से ज्यादा वोटर्स हैं.

मतदान केन्द्रों पर भेजने से पहले चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को बाकायदा इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन और पहली बार उपयोग में यहाँ लाये जा रहे बसे उन्नत प्रणाली वाली एम थ्री ईवीएम का इस्तेमाल मोक ड्रिल के जरिये समझाया जा रहा है. इसमें वन टाइम प्रोग्रामिंग का दावा किया अजा रहा है यानी की इसे हैक करने की कोशिश पर पूरी कार्यप्रणाली ही ठप पड़ जाएगी. वोट पंजीकृत होने के दो मिनट में वीवीपेट की ट्रेलर मतदाता को दिखने के बाद 7 सेकेण्ड के बाद मशीन से पर्ची गिर जायेगी और इसमें वोट के रजिस्ट्रेशन की “बीप” की आवाज आएगी. यदि कोई वोटर यह आपत्ति करे कि उसने जिस प्रत्याशी को वोट दिया वह उसके नाम पंजीकृत नहीं हुआ तो उसे दोबारा वोटिंग कराई जा सकती है लेकिन उसका दावा झूठा पाए जाने पर पीठासीन अधिकारी उसके खिलाफ मामला दर्ज करेगा.

निर्वाचन विभाग के अनुसार प्लानिंग ऐसी है कि चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात मिलेगी. साथ ही डरा धमकाकर या प्रलोभन के जरिए वोट देने से रोकने या वोट दिलवाने के प्रयासों पर विशेष नजर रहेगी. इस बार सबसे ज्यादा 1382 संवेदनशील मतदान केन्द्र की पहचान हुई हैं. साथ ही 3740 केंद्रों में होगी वीडियोग्राफी होगी,जिसके लिए 4,65 केंद्रों में माइक्रो ऑब्जर्वर्स को तैनात करने के साथ राजस्थान पुलिस के जानों के साथ बाहरी राज्य से 650 केंद्रीय अर्द्धसैन्य बल की कंपनियों के जवानों को सुरक्षा इंतजामों के लिए बुलाया गया है. हर कंपनी में करीब 120 शाश्त्र्धारी जवान होंगे. इसमें भी रेपिड एक्शन फ़ोर्स की 134 कंपनी, BSF की 10 कंपनी, CISF की 103 कंपनी ITBP की 42 ने मोर्चा लिया है.

दिलचस्प बात यह है की राजस्थान में इस बार का चुनावी रण बहुत ही दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि इस बार यहाँ हर पांच साल में सत्ता परिवतर्न के मिथक को तोड़ने के लिए जहाँ बीजेपी जुटी हई हैं वहीं कांग्रेस की कोशिश इसे बरक़रार रखने की है. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत , सचिन पायलेट, CP जोशी, सहित कई दिग्गजों की साख दांव पर लगी हुई है. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों के साथ पीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी सरीके दिग्गज स्टार प्रचारकों ने पूरी ताकत झोंक दी थी. 15 नवंबर से 5 दिसंबर तक के 20 दिनों के धुंआधार प्रचार अभियान में पीएम मोदी जहाँ 100 विधानसभा क्षेत्र कवर करते हुए 12 जनसभाएं की वहीँ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने 9 जनसभाएं करके 30 सीटें कवर की.

कुल मिलकर कांग्रेस टीम के 15 दिग्गजों ने इस दौरान कुल 433 सभाएं की हैं. इनमें सर्वाधिक 230 सभाएं पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट और दूसरे नंबर पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 100 सभाओं के साथ रहे जबकि बीजेपी की स्टार प्रचारकों की टीम में 15 नेताओं ने कुल 233 सभाएं की हैं जो कांग्रेस की सभाओं से करीब 200 कम हैं. बीजेपी में सर्वाधिक 75 सभाएं सीएम वसुंधरा राजे की जबकि विवादित बयानबाजी को लेकर चर्चित रहे योगी आदित्यनाथ ने 24 सभाएं की.

ख़ास बात यह भी है की इस बार राजस्थान में चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों में से 597 यानी की 27 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति भी हैं जिसके लिहाज़ से सभी प्रत्याशियों की औसतन संपत्ति 2.12 करोड़ रुपए आंकी गई है. प्रत्याशियों में सबसे ज्यादा धनी नेशनल यूनियनिस्ट जमींदारा पार्टी की गंगानगर से चुनाव लड़ रहीं कामिनी जिंदल हैं, जिनकी कुल संपत्ति 287 करोड़ से ज्यादा है. इसके बाद कांग्रेस के ढोड सीट से चुनाव लड़ रहे परसराम मारडिया का नंबर है, जिनकी कुल संपत्ति 172 करोड़ से ज्यादा है. इसके अलावा चुनावी मैदान में 320 यानी की 15 फीसदी प्रत्याशियों पर आपराधिक और 195 यानी 9 फीसदी प्रत्याशियों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. जाहिर है की चुनाव प्रचार के दौरान आरोप – प्रत्यारोपो ने माहौल को गर्मा दिया था लेकिन अब मतदाताओं को फैसला करना है की उन्हें किस तरह की सरकार अपने लिए चुननी है.