10 December 2018

रामचंद्र गुहा बीजेपी विरोध के लिये किसी भी स्तर तक जा सकते हैं। इसका परिचय उन्होंने बीफ खाते हुए अपने ट्विटर अकाउंट पर अपनी एक फोटो पोस्ट की, बोलेबीजेपी शासित गोवा में मना रहा हंू जश्र।

इस पर सोशल मीडिया में हुए विरोध को देखते हुए उन्होंने सोशल मीडिया में पोस्ट की गई अपनी ट्विट को हटा दिया है। परंतु लिखा है कि उनका भाजपा विरोध जारी रहेगा।

यहॉ यह उल्लेखनीय है कि रामचंद्र गुहा प्रारंभ से ही अपने आपको शाकाहारी बताते रहे हंै। बावजूद इसके उन्होंने अपनी फोटो बीफ खाते हुए स्वयं ही अपने टविटर अकाउंट में पोस्ट की।

कई लोगों नेभारत के बाद गांधीÓ लेखक से एक ट्वीट में असंगतता के बारे में भी सवाल उठाया था, जिसे उन्होंने कुछ साल पहले रखा था कि वे शाकाहारी भोजन करते हैं। एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक स्पॉटलाइट में था, जिसमें उन्होंने शाकाहारी होने का दावा किया था

यही विरोधाभाष वोट बैंक पॉलिटिक्स के चलते बहुरूपीये जनेऊधारी ब्राम्हण रामभक्त राहुल गांधी के साथ भी है।

>> फिरोज खान के पौत्र क्रिस्चियन सोनिया गांधी के पुत्र अपने आपको हिन्दू ही नहीं बल्कि जनेऊधारी ब्राम्हण भी कहते हैं। अभी राजस्थान विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने अपना गोत्र ने दत्तात्रेय भी विख्यात किया। यह सब  अपने मुख से कभी नहीं कहा। परंतु अपने प्रवक्ता  सूरजेवाला तथा कांग्रेस के अन्य नेताओं से कहलवाया है।

>> वे अपने आपको दूृसरों के मुंह से हिन्दू ही नहीं कहलवा रहे हैं बल्कि अपने आपको राम भक्त भी जाहिर कर रहे हैं।

प्रश्र यह उपस्थित होता है कि जिसकी कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार चल रही थी उस के मंत्री क्रिस्चियन अंबिका सोनी ने सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा दिया था कि राम मिथक हैं, काल्पनिक हैं ऐतिहासिक नहीं।

अभी कुछ दिनों पूर्व जब गुजरात विधानसभा के चुनाव हो रहे थे उस समय सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के ही नेता कपिल सिब्बल ने मुस्लिम पसर्नल ला बोर्ड के वकील के नाते कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर के केस की सुनवाई २०१९ के लोकसभा चुनाव तक टाल दी जाये। अर्थात कांग्रेस येनकेनप्रकारेण अयोध्या में राम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण हो यह नहीं चाहती।

राहुल गांधी शाकाहारी हैं या और कुछ ?  रामचंद्र गुहा ने जिस प्रकार से शाकाहारी और बीफ खाऊ जाहिर कर असंगतता जाहिर की है उसी प्रकार से राहुल गांधी ने भी मंदिर जाने के पूर्व अंडे खाकर जाहिर की थी।

इस संबंध में मुझे एक वाकया का स्मरण हो रहा है। रायपुर में एक सेवा संस्थान २०० रूपये महीने में हर बीमार व्यक्ति को गोमूत्र का सेवन करने को देती है।

गोमूत्र सेवन करने वाले बीमारी से पीडि़त एक व्यक्ति से किसी ने प्रश्र किया कि वह वोट किसे दिया तो उत्तर था कांग्रेस को। इस पर उस व्यक्ति ने प्रश्र किया कि कांग्रेस तो गो हत्या की समर्थक है पंडित नेहरू के शासन के समय से ही।

कर्नाटक में भाजपा की सरकार थी तब वहॉ पर उसने गो हत्या पर प्रतिबंध लगा दिया था। उसके बाद कांग्रेस की सरकार आने पर पुन: सिद्धारमैय्या की कांग्र्रेस की सरकार ने वह प्रतिबंध हटा दिया था।

इसी विसंगति से जिस प्रकार से रामचंद्र गुहा ग्रसित हैं उसी प्रकार से राहुल गांधी भी हैं।

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