29 January 2019

आज मुझे अजीत डोभाल जी का एक भाषण पढऩे को मिला। डोभाल जी ने अपने भाषण में खुलासा किया है कि  द्वितीय विश्व युद्ध जीतने के बाद भी अंग्रेजों ने भारत को अचानक क्यों छोड़ दिया?

इस भाषण में, उन्होंने खुलासा किया कि कैसे सुभाष चंद्र बोस और आईएनए की धमकी के कारण अंग्रेजों को भारत छोडऩे के लिए मजबूर किया गया था।

भारत के एनएसए ने इस बात को रेखांकित किया है कि महात्मा गांधी ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका निभाई थी, लेकिन कांग्रेस पार्टी के भारत छोड़ो आंदोलन ने अंग्रेजों पर कोई दबाव नहीं डाला। यह पूरी तरह फ्लॉप रही।

अत्यधिक बुद्धिमान अधिकारी ने यह जानकारी साझा करके एक सदमा पहुँचाया कि 1956 में, ब्रिटिश प्रधान मंत्री क्लीमेंट एटली ने स्वयं स्वीकार किया था कि सुभाष चंद्र बोस ने ब्रिटिश सेना के सैनिकों के बीच राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देने और सशस्त्र विद्रोह करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अधिक से अधिक लोग आईएनए में शामिल होने लगे। साथ ही, जिस तरह से भारतीय राष्ट्रीय सेना अंग्रेजों के खिलाफ लडऩे के लिए तैयार थी, वह इस बात का संकेत था कि वे ज्यादा समय तक भारत पर कब्जा नहीं कर पाएंगे।

एनएसए के अनुसार, क्लेमेंट एटली ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति फणी भूषण चक्रवर्ती के सामने स्वतंत्रता संग्राम में बोस की भूमिका पर प्रकाश डाला।

अजीत डोभाल जी के भाषण को पढ़ते समय मुझे इकॉनामी टाईम्स में प्रकाशित प्रसिद्ध अर्थशास्त्री स्वामीनाथन एस अंकलेसरिया अय्यर कास्वतंत्रता, हेसा या अहिंसा द्वारा जीती गई?Ó  शीर्षक से प्रकाशित एक लेख का ंस्मरण हो रहा है।

1857 में मितानिन संख्या में सीमित थे और प्रभावी नेतृत्व की कमी थी। लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध से लडऩे के लिए, अंग्रेजों ने 2.5 मिलियन भारतीय सैनिकों की एक सेना बनाई, जिसमें सैंडहस्र्ट में सक्षम अधिकारी कैडर प्रशिक्षित थे। 1946 तक, देशभक्ति की उम्मीदें भारत में एक उच्च स्तर तक बढ़ गई थीं।

इस माहौल में, अंग्रेजों को डर था कि वे अब ब्रिटिश भारतीय सेना के 2.5 मिलियन सैनिकों की वफादारी पर भरोसा नहीं कर सकते। इस स्थिति में सशस्त्र विद्रोह करने वाले जीतेंगे और ब्रिटिश नागरिकों की हत्या कर दी जाएगी।

सुभाष चंद्र बोस ने जीवित रहते हुए मरणोपरांत अधिक से अधिक भूमिका निभाई।  गांधीजी की अहिंसा के अलावा सुभाष चंद्र बोस तथा अन्य की अंग्रेजों के विरूद्ध सशस्त्र क्रांति के कारण भी भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

अगस्त २००७ को अंग्रेजी में लिखित एक लेख का कुछ हिस्सा मैं यहॉ उदधृत कर रहा हूं:

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