3 April 2019

नेहरू वंश के बाद अब राहुल गांधी किस प्रकार से गरीबों के नाम पर और मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर चलकर राष्ट्रविरोधी कृत्य करते रहे हैं और कर रहे हैं इसकी पोल आज जो वायनाड लोकसभा क्षेत्र की जनता की स्थिति है वह खोल रही है।

मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर नेहरूजिन्ना ने चाल चली और भारत का विभाजन हुआ।

इसके बाद इंदिरा गांंधी और राजीव गांधी तथा सोनिया गांधी के इशारे पर दस वर्षोँ तक चली यूपीए सरकार ने भी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर चलते हुए भारत के मुस्लिमों को मुख्यधारा में आने से रोके रखा। इतना ही नहीं भारत की मुस्लिम आबादी को गरीब भी बनाये रखा।

 वैसे तो केरल देश भर में मानवीय सूचकांक में विकास के दृष्टिकोण से काफी अव्वल माना जाता है, लेकिन इस राज्य की वायनाड, कोझिकोड और मलापुर क्षेत्र काफी पिछड़े हैं। वायनाड में सबसे ज्यादा आदिवासी (18.55त्न) रहते हैं और यहां पर गरीबी का प्रतिशत सबसे ज्यादा 32.85 फीसदी है। वहीं कोझिकोड में भी गरीबी का प्रतिशत 5.67 फीसदी और मलापुरम का 6.91 फीसदी है। इन तीनों जिलों वायनाड, कोझिकोड और मलापुरम में कम आय वाले लोगों की संख्या क्रमश: 97.76त्न, 75.55त्न और 70.5 त्न है।

यहॉ यह भी उल्लेखनीय है कि मुस्लिम बाहुल्य उक्त क्षेत्रों में मुस्लिम लीग का प्रभुत्व रहा है और  यह मुस्लिम लीग कांगे्रस की सहयोगी पार्टी रही है।

उक्त क्षेत्रों में मुस्लिम लीग के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी का भी प्रभाव रहा है।

वायनाड 2009 में ही लोकसभा सीट बनी है। तब से दोनों चुनावों में कांग्रेस का उम्मीदवार जीता है। हालांकि, 2014 में जीत का अंतर 2009 की तुलना में कई गुना कम रह गया था।

 स्वतंत्रता के बाद से १९४७ से अब तक वायनाड लोकसभा क्षेत्रों पर कभी  वामपंथी जीतते रहे हैं तो कभी कांग्रेस।

जनसंघ या भाजपा की यहॉ पर उपस्थिति नहीं रही है।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि केरल में कभी कांग्रेस का तो कभी वामपंथियों का शासन रहा है।  स्वतंत्रता के बाद से अब तक ७३ वर्षों में भी कांग्रेस और  वामपंथी शासक मुस्लिम समाज को गरीब ही बनाये रहे थे और उन्हें मुख्यधारा में आने से रोकते रहे।

वायनाड लोकसभा क्षेत्र केरल के सबसे पिछड़े इलाकों में शामिल है। आदिवासी बहुल क्षेत्र में किसी व्यक्ति की सबसे ज्यादा आय 5,000 रुपये मासिक से कम है।

अब प्रश्र यह है कि आजादी के बाद के ७३ वर्षों तक मुस्लिम बाहुल्य वायनाड लोकसभा क्षेत्र को गरीब किसने रखा? वामपंाथी पार्टियों और कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग के अलावा और कौन हो सकते हैं?

ऐसे में राहुल गांधी को विश्वास है कि उनके  परदादा नेहरू, दादी इंदिरा और पिता राजीव गांधी  जैसे गरीबी हटाओ का नारा देते रहे वैसे ही उनका  अर्थात राहुल गांधी का 6,000 रुपये प्रति माह देने का न्यूनतम आय गारंटी योजना कांग्रेस के पक्ष में हवा बदलने का माद्दा रखती है।

इसी प्रकार का विश्वास रखकर वे सोच रहे हैं कि कर्जमाफी का नारा देकर उन्होंने तीन विधानसभा क्षेत्र जीत लिया वैसे ही लोकसभा जीत जायेंगे।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी गरीबी हटाने की सिर्फ बात की। इसी तरह दिवंगत राजीव गांधी (पूर्व प्रधानमंत्री) और सोनिया गांधी ने भी ऐसा ही किया। अब नेहरू जी के परपोते (राहुल गांधी) भी अबगरीबी हटाओÓ का नारा दे रहे हैं।   जनता जानना चाहती है कि किसकी गरीबी हटी है।

लगता है, नेहरूगांधी परिवार का गऱीबी से गर्भनाल का संबंध है. दादी से लेकर पोते तक, इस परिवार का हर कोई भारत से गऱीबी हटाना चाहता है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की दादी, दिवंगत इंदिरा गांधी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के साल 1966 से लेकर अब यानी 2019 तक के समय की गणना करें तो पूरे 43 बरस हो गए, नेहरूगांधी परिवार को गऱीबी हटाते. लेकिन गऱीबी है कि मुई, हटती ही नहीं.

कमसेकम तो इंदिरा गांधी के 14 वर्ष के कार्यकाल में हटी, उनके पुत्र राजीव गांधी के. तथ्य तो यही बताते हैं.

इसलिए शायद इंदिरा के पोते राहुल ने तय किया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी जैसे ही जीतेगी, देश के हर गऱीब, चाहे वह रोज़ी कमा रहा हो या निठल्ला बैठा हो, के बैंक खाते में एक निश्चित रक़म भेज देगी.

कोई गऱीब भूखा नहीं रहेगा और हर महीने एक तयशुदा राशि पाने से वंचित रहेगा, “राहुल के इस ऐलान को विपक्ष ने भले खय़ाली पुलाव कहकर ख़ारिज कर दिया हो लेकिन नेहरूगांधी परिवार के वंशज को या फिर उनके लिए चुनावी रणनीति बनाने वाले उनके सिपहसालारों को भरोसा है कि ये नारा भी वैसा ही जादू करेगा जैसे किसानों की कजऱ्माफ़ी के वादे ने हाल के विधानसभा चुनाव में किया.

ये और बात है कि इन राज्यों में किसान फि़लहाल कजऱ्माफ़ी के मायाजाल में चकरघिन्नी खा रहे हैं.

अंदाज़ ये लगाया गया कि राहुल ने ये घोषणा इस अंदेशे में की कि मोदीसरकार बजट में देश के हर गऱीब के लिए न्यूनतम आमदनी गारंटी योजना की घोषणा कर सकती है.

घोषणा तो कर दी गई लेकिन राहुल समेत कोई कांग्रेसी सूरमा ये बताने आगे नहीं आया कि देश में गऱीबों की कुल फलांफलां तादाद को वे हर महीने इमदाद देंगे और उसके लिए रक़म इस या उस मद से जुटाई जाएगी.

लोकसभा चुनाव (रुशद्म स्ड्डड्ढद्धड्ड श्वद्यद्गष्ह्लद्बशठ्ठ 2019) के अपने घोषणा पत्र में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सबसे ज्यादा जोर नौकरी और न्यूनतम आय गारंटी योजना (न्याय) पर रखा है।न्यायÓ स्कीम समूचे देश में कांग्रेस को कितना फायदा पहुंचा सकती है, यह तो अभी स्पष्ट नहीं है।

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