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विधानसभा चुनाव: मैनपुरी में राजनीतिक बिसात पर वक्त के साथ बदले दांव, दल बदलकर कई नेता बने विधायक

सार
राजनीति में सब जायज है… इस कहावत को मैनपुरी जिले के नेताओं ने कई बार सच साबित किया। राजनीतिक बिसात पर वक्त के साथ दांव और दल बदले। इसका उन्हें फायदा मिला और वह विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे। 

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मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से बाबूराम यादव लगातार पांच बार विधायक रहे। उनके इस रिकार्ड को आज तक दूसरा नेता नहीं तोड़ पाया है। लगातार पांच बार विधायक चुने जाने का रिकॉर्ड बनाने के लिए बाबूराम यादव को राजनीतिक बिसात पर समय-समय पर दांव और दल दोनों बदलने पड़े। उन्होंने वर्ष 1985 में लोकदल से विधानसभा चुनाव जीता। 

इसके बाद उन्होंने दल बदलकर 1989 में जनता दल, 1991 से जनता पार्टी से चुनाव लड़ा और जीता। करहल में सपा की लहर आई तो वह साइकिल पर सवार हो गए। उन्होंने वर्ष 1993 और 1996 में समाजवादी पार्टी से करहल विधानसभा सीट पर चुनाव जीता। 

पूर्व मंत्री मुंशीलाल ने भी बदले दल 

पूर्व मंत्री मुंशीलाल की बात करें तो उन्होंने भी वक्त की नजाकत को समझकर दांव चले और चार बार विधायक बने। वर्ष 1967 और 1969 में उन्होंने स्वतंत्र पार्टी से करहल विधानसभा सीट पर चुनाव जीता। वर्ष 1974 में उन्होंने पार्टी बदलकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया। 

कांग्रेस के टिकट पर किशनी विधानसभा क्षेत्र से वह 1974 और 1980 में दो बार विधायक चुने गए। करहल सीट पर सोबरन सिंह यादव ने पहला चुनाव वर्ष 2002 में भाजपा के टिकट पर जीता। इसके बाद उन्होंने भी साइकिल का हैंडल थाम लिया और 2007, 2012 और 2017 में सपा के टिकट पर चुनाव जीते।
रामेश्वर का दांव पड़ा उल्टा
रामेश्वर दयाल चार बार विधायक रहे। जीत के लिए उन्होंने हर चुनाव में अपना दांव बदला। किशनी विधानसभा सीट पर उन्होंने 1989 में जनता दल के टिकट पर चुनाव जीता। दल बदलकर वह 1991 में जनता पार्टी से चुनाव लड़े, जनता ने उन्हें दूसरी बार विधायक चुनाव। 

समाजवादी पार्टी का गठन हुआ तो चुनावी बयार को समझकर वह मुलायम सिंह यादव के साथ हो गए। सपा के टिकट पर उन्होंने 1993 और 1996 का चुनाव जीता। वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में सपा ने उनका टिकिट काटा तो वह बागी हो गए और भाजपा का दामन थाम लिया। चार बार के विधायक का यह दांव उल्टा पड़ गया और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 

कौन-कितनी बार विधायक बना 
– 05 बार लगातार विधायक चुने गए बाबूराम यादव
– 04 बार लगातार विधायक चुने गए सोबरन सिंह यादव
– 04 बार लगातार विधायक बने मुंशीलाल 
– 04 बार रामेश्वर दयाल विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे

विस्तार

मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से बाबूराम यादव लगातार पांच बार विधायक रहे। उनके इस रिकार्ड को आज तक दूसरा नेता नहीं तोड़ पाया है। लगातार पांच बार विधायक चुने जाने का रिकॉर्ड बनाने के लिए बाबूराम यादव को राजनीतिक बिसात पर समय-समय पर दांव और दल दोनों बदलने पड़े। उन्होंने वर्ष 1985 में लोकदल से विधानसभा चुनाव जीता। 

इसके बाद उन्होंने दल बदलकर 1989 में जनता दल, 1991 से जनता पार्टी से चुनाव लड़ा और जीता। करहल में सपा की लहर आई तो वह साइकिल पर सवार हो गए। उन्होंने वर्ष 1993 और 1996 में समाजवादी पार्टी से करहल विधानसभा सीट पर चुनाव जीता। 

पूर्व मंत्री मुंशीलाल ने भी बदले दल 

पूर्व मंत्री मुंशीलाल की बात करें तो उन्होंने भी वक्त की नजाकत को समझकर दांव चले और चार बार विधायक बने। वर्ष 1967 और 1969 में उन्होंने स्वतंत्र पार्टी से करहल विधानसभा सीट पर चुनाव जीता। वर्ष 1974 में उन्होंने पार्टी बदलकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया।