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Editorial:बजट से ठीक पहले महत्वपूर्ण निर्णय से होगा लाभ

1-1-2023

देश की अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में बजट की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। देश की जनता को भिन्न-भिन्न प्रकार की सुविधा पहुंचाने के लिए बजट को पेश किया जाता है, लेकिन कोविड-19 के बाद से बजट बनाने की प्रक्रिया पहले से कठिन हो गयी है। हालांकि अब मोदी सरकार ने बजट से ठीक पहले एक ऐसा कदम उठाया है, जिससे वित्तीय लाभ हो सकता है।
जब देश में कोरोना महामारी का कहर छाया था तब गरीब लोग भूखे पेट न सोएं, इसलिए मोदी सरकार के द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की शुरुआत की गई थीं। यह योजना उस समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता थीं। इस आपातकालीन उपाय के तहत 81.35 करोड़ भारतीयों को मुफ्त भोजन मिलता था लेकिन कुछ समय बाद जब अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी तो मोदी सरकार ने सफल प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को बंद करने का निर्णय लिया और इस योजना को बंद कर दिया। अब इसके स्थान पर सरकार वैधानिक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत उन्हें मुफ्त भोजन मुहैया करवाएगी। इससे पहले एनएफएसए के लाभार्थियों को तीन रुपये प्रति किलो चावल, दो रुपये किलो गेहूं और एक रुपये किलो मोटा अनाज मिल रहा था। कोविड के दौरान, इन सभी लाभार्थियों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत सब्सिडी वाले लोगों के अलावा मुफ्त अनाज मिल रहा था।
अगर स्पष्ट शब्दों में कहें तो लोगों को अभी भी मुफ्त अनाज मिलता रहेगा, भले ही ये अनाज पीएमजीकेएवाई से मिले या फिर एनएफएसए से। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ट्विटर पर इसकी घोषणा की है. उन्होंने लिखा, “राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत दिसंबर 2023 तक 800 मिलियन से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा।”सरकार के द्वारा मुफ्त अनाज देने का कार्य किया जा रहा था उसे एक योजना से दूसरी योजना में स्थानांतरित कर दिया गया है। मोदी सरकार ने भले ही यह निर्णय देश की जनता और अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर किया हो, लेकिन विपक्ष इसका उपयोग बीजेपी को गरीब विरोधी दिखाने के लिए भी कर सकती है। साल 2023 में 10 राज्यों में चुनाव होने वाले हैं जहां पर विपक्ष मोदी सरकार पर इसे लेकर सवाल खड़े कर सकती है।

हालांकि, काफी लंबे समय से क्करूत्र्य्रङ्घ योजना अस्थिर थी। इसमें भ्रष्टाचार और काला बाजारी जैसी समस्याएं भी अंतर्निहित थी। पीएमजीकेएवाई ने एनएफएसए के तहत पहले से उपलब्ध 5 किलोग्राम से अधिक और प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम अनाज प्रदान किया जा रहा था। इससे हर व्यक्ति को प्रति माह 10 किलो अनाज मिल रहा था। लेकिन प्रश्न यह है कि एक माह में प्रति व्यक्ति इतने अनाज का उपयोग किया जा रहा होगा? उत्तर है नहीं, क्योंकि सरकार ने कई मामलों में पाया कि आर्थिक सुधार होने के बाद भी इन अनाजों का एक बड़ा हिस्सा काला बाजार में बेचा जा रहा था। क्करूत्र्य्रङ्घ योजना को बंद करने के पीछे आर्थिक सुधार भी एक बड़ा कारण है।