घरेलू यात्री वाहन उद्योग में इस वित्तीय वर्ष में मामूली वृद्धि होने की संभावना है। रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में इस क्षेत्र की थोक बिक्री में 1 से 4 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। हालांकि, अप्रैल से जुलाई 2025 के बीच इसमें 1.1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
ICRA ने बताया कि उच्च इन्वेंट्री स्तर और पिछले साल के मजबूत आधार के कारण इस साल विकास पर दबाव बना हुआ है। डीलरों के संगठन फाडा के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के अंत तक डीलरों के पास औसतन 55 दिन का इन्वेंट्री स्टॉक था।
हालांकि, ऑटोमोबाइल कंपनियों द्वारा लगातार नए मॉडल लॉन्च और सरकार द्वारा जीएसटी में सुधारों के कारण आने वाले महीनों में मांग में तेजी आ सकती है। केंद्र सरकार ने जीएसटी स्लैब को मौजूदा 5, 12, 18 और 28% से घटाकर केवल 5 और 18% करने का प्रस्ताव रखा है। यदि छोटी कार सेगमेंट पर टैक्स कम होता है, तो बिक्री में सुधार भी हो सकता है।
जुलाई 2025 में यात्री वाहनों की थोक बिक्री महीने-दर-महीने 8.9 प्रतिशत बढ़ी। यह वृद्धि इसलिए हुई क्योंकि कंपनियों ने त्योहारी सीजन से पहले डीलरों को अधिक स्टॉक भेजा। हालांकि, सालाना आधार पर वॉल्यूम लगभग 3.4 लाख यूनिट पर स्थिर रहा।
खुदरा बिक्री भी जुलाई में 10.4 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन सालाना आधार पर इसमें 0.8 प्रतिशत की मामूली गिरावट रही। ICRA के अनुसार, एसयूवी सेगमेंट का दबदबा बना हुआ है और यह कुल यात्री वाहन वॉल्यूम का 65-66 प्रतिशत हिस्सा दे रहा है। आने वाले महीनों में यूटिलिटी वाहन ही विकास के मुख्य चालक बने रहेंगे।
जुलाई में यात्री वाहन निर्यात में 9% की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें सबसे बड़ा योगदान मारुति सुजुकी और हुंडई मोटर इंडिया का रहा। कुल मिलाकर, ऑटो सेक्टर इस साल धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। हालांकि, त्योहारी सीजन, नए लॉन्च और संभावित कर सुधार आने वाले महीनों में बाजार को मजबूत सहारा दे सकते हैं।