कभी भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में हैचबैक कारों की सबसे अधिक मांग हुआ करती थी। किफायती कीमत, छोटे आकार और बेहतर माइलेज इन्हें मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए पहली पसंद बनाते थे। लेकिन, समय के साथ यह ट्रेंड बदल रहा है। पिछले कुछ महीनों में हैचबैक कारों की बिक्री में गिरावट आई है, जबकि एसयूवी इस अंतर को तेजी से भर रही हैं। जुलाई 2025 के आंकड़े इस बदलते रुझान को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
मारुति सुजुकी, जो हैचबैक सेगमेंट में अग्रणी है, के कई मॉडलों की बिक्री कमजोर रही। जुलाई में वैगनआर की 14,710 यूनिट्स बिकीं। इसके बाद स्विफ्ट की 14,190 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो पिछले साल की तुलना में थोड़ी अधिक है।
हालांकि, ऑल्टो K10 की बिक्री में 20% की गिरावट आई, जिससे 5,910 यूनिट्स बिकीं। इग्निस की 1,977 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो 11% कम है। सिलेरियो ने 1,392 यूनिट्स बेचीं, जिसमें 43% की गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा नुकसान एस-प्रेसो को हुआ, जिसकी बिक्री 64% घटकर केवल 912 यूनिट्स रह गई।
टाटा मोटर्स की लोकप्रिय हैचबैक टियागो की बिक्री जुलाई में 5,575 यूनिट्स तक सीमित रही, जो 1.5% की गिरावट है। अल्ट्रोज़ की बिक्री 13% घटकर 3,905 यूनिट्स रह गई। ग्रैंड i10 निओस की बिक्री 28% घटकर 3,560 यूनिट्स रही, जबकि i20 की बिक्री 31% घटकर 3,396 यूनिट पर आ गई।
ग्राहक अब कॉम्पैक्ट और मिड-साइज एसयूवी को अधिक पसंद कर रहे हैं। एसयूवी न केवल अधिक जगह और बेहतर ग्राउंड क्लीयरेंस प्रदान करती हैं, बल्कि कंपनियां इस सेगमेंट में लगातार नए मॉडल और उन्नत फीचर्स भी लॉन्च कर रही हैं। हालांकि, कंपनियां अब छोटी कारों पर भी ध्यान दे रही हैं। माना जा रहा है कि जीएसटी कम होने से छोटी कारों की कीमतें कम हो सकती हैं।