जम्मू संभाग के अखनूर जिले में बाढ़ के कारण उत्पन्न स्थिति में देश सेवा करते हुए एक अग्निवीर ने बलिदान दिया। शनिवार को अग्निवीर जवान का पार्थिव शरीर सैन्य सम्मान के साथ उसके घर भेजा गया। शहीद जवान मणिपुर के जिमी गमिनलुन मेट थे। 26 अगस्त को अखनूर में बाढ़ के दौरान चिनाब नदी खतरे के निशान से 14 फीट ऊपर बह रही थी। इस दौरान सेना ने बाढ़ विरोधी अभियान शुरू किया, तभी जिमी गमिनलुन पानी के तेज बहाव में बह गए।
परगवाल में बाढ़ की स्थिति में देश की रक्षा में तैनात एक और वीर ने बलिदान दिया है। इससे पहले बीएसएफ की 195 बटालियन के कांस्टेबल राजीब नूनिया भी शहीद हुए थे।
जिमी गमिनलुन मेट असम के सिलचर इलाके के रहने वाले थे। वहीं, जम्मू के रामबन जिले में बादल फटने से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। रियासी जिले के माहौर में भूस्खलन के कारण सात लोगों की मौत हो चुकी है। सोमवार से अब तक बाढ़, बारिश और बादल फटने से 54 लोगों की मौत हो चुकी है।
इस बीच, जम्मू संभाग की सभी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया, जिसके बाद राहत और बचाव अभियान जारी रहा। सेना, वायु सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियां पिछले दिनों आई अभूतपूर्व बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए एकजुट होकर काम कर रही हैं।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में जम्मू क्षेत्र में छिटपुट बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने तथा कश्मीर के कुछ हिस्सों में छिटपुट बौछारें पड़ने की संभावना के साथ आमतौर पर बादल छाए रहने का अनुमान जताया है। 5 सितंबर तक मौसम की स्थिति अनिश्चित रहने की उम्मीद है।
श्री माता वैष्णो देवी तीर्थस्थल मार्ग पर अर्धकुंवारी में भी बचाव अभियान जारी रहा, जहां मंगलवार को भूस्खलन हुआ था। तीर्थयात्रा अगले तीन दिनों तक स्थगित रहेगी। छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जम्मू संभाग के सभी शैक्षणिक संस्थान 30 अगस्त तक बंद रहेंगे।
उधमपुर में जखेनी और चेनानी के बीच कई भूस्खलनों के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग लगातार चौथे दिन भी बंद रहा, जिससे 500-600 से अधिक वाहन फंसे रहे। किश्तवाड़-सिंथन-अनंतनाग राजमार्ग भी बंद रहा, जबकि शोपियां (कश्मीर) और पुंछ (जम्मू) के बीच मुगल रोड पर केवल हल्के मोटर वाहनों (एलएमवी) को ही जाने की अनुमति दी जा रही है। ताजा बर्फबारी के कारण श्रीनगर-लेह और श्रीनगर-गुरेज़ मार्ग भी बंद रहे।
जम्मू संभाग में रेल यातायात स्थगित रहा और आगे भी प्रभावित रहेगा। उत्तर रेलवे ने जम्मू आने-जाने वाली 40 निर्धारित ट्रेनों को रद्द कर दिया है, जबकि 12 अन्य को बीच में ही रोक दिया जाएगा या अन्य स्थानों से चलाया जाएगा। फंसे हुए यात्रियों को निकालने के लिए दो विशेष ट्रेनें चलाई गईं।
अधिकारियों के अनुसार, कठुआ-माधोपुर पंजाब डाउनलाइन पर पुल संख्या 17 पर अचानक आई बाढ़ और मिट्टी के कटाव के कारण हुई दरारों सहित कई स्थानों पर रेल यातायात अगले कुछ दिनों तक ठप रहने की संभावना है।