भोजपुरी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने वाले पवन सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उनकी पत्नी ज्योति सिंह के एक पोस्ट के कारण, जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त की है, वे सुर्खियों में हैं। ज्योति सिंह ने फेसबुक पर एक लंबा पोस्ट लिखा है जिसमें उन्होंने अपना दर्द साझा किया है।
अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर पोस्ट करते हुए ज्योति सिंह ने लिखा है, ‘आदरणीय पति पवन सिंह जी, मैं आज कई महीनों से आपसे कुछ पारिवारिक और राजनीतिक मुद्दों पर बात करने की कोशिश कर रही हूं, लेकिन आपने या आपके साथ रहने वाले लोगों ने मेरे कॉल और मैसेज का रिप्लाई देना शायद उचित नहीं समझा। मैं आपसे मिलने लखनऊ तक गई, छठ के समय, जब आप डेहरी में आए थे। मैंने उस समय भी आपसे मिलना उचित समझा, लेकिन आपने मिलने से मना कर दिया। कहा गया कि बॉस बोल रहे हैं लखनऊ में मिलने को। पिछले दो महीने पहले मेरे पापा जी भी आपसे मिलने गए, लेकिन कोई सकारात्मक रिजल्ट आपने नहीं दिया।’
ज्योति सिंह के इस पत्र को पढ़ने से यह स्पष्ट होता है कि वह अपनी ओर से प्रयास कर रही हैं, लेकिन पवन सिंह उनसे संपर्क नहीं करना चाहते हैं। ज्योति सिंह ने अपने पोस्ट में आगे लिखा है, ‘दुनिया का कौन सा बड़ा पाप मैंने किया है, जिसकी इतनी बड़ी सजा मुझे दी जा रही है? मेरे मां-बाप की इज्जत से खेलने का काम किया जा रहा है।’
ज्योति सिंह ने आगे लिखा कि अगर वह पवन सिंह के लायक नहीं थीं, तो उन्हें पहले की तरह ही दूर कर देना चाहिए था। उन्होंने लिखा, ‘मुझे झूठा आश्वासन देकर अपने लोकसभा चुनाव में अपने साथ लाकर आज जीवन की उस चोटी पर खड़ा किया है कि मुझे आत्महत्या के सिवा कुछ नहीं सूझ रहा है, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकती। क्योंकि पता है कि मैं आत्महत्या करूंगी भी तो सवाल मुझ पर ही उठेंगे और मेरे मां-बाप पर उठेंगे।’
ज्योति ने इस पत्र में पवन सिंह को उनके कर्तव्य की याद दिलाई। उन्होंने लिखा कि उन्होंने एक पतिव्रता पत्नी का धर्म निभाया और कदम से कदम मिलाकर साथ दिया, अब उनकी बारी है अपना धर्म निभाने की। उन्होंने विनती की है कि अगर पवन उन्हें अपनी पत्नी नहीं मानते, तो कम से कम इंसानियत के नाते उनके साथ खड़े हो जाएं। यही उनके लिए बहुत बड़ी बात होगी। ज्योति ने लिखा कि वह तो आपका परिवार हैं और उन्हें इस बात से बहुत बुरा लगता है, ‘जब आप वैसे लोगों को गले लगाते हैं जो आपको बहुत कुछ बोलकर आपके पास आ जाते है, लेकिन मैं अपनी परेशानी बताऊं तो किसको? जब मेरा अपना खुद का परिवार मुझे कुछ नहीं समझ रहा है।’
इसलिए ज्योति ने पवन सिंह से इस पत्र के माध्यम से अंतिम बार विनती की है। क्योंकि वह पिछले सात साल से संघर्ष कर रही हैं। अब उन्हें अपने ही जीवन से नफरत होती जा रही है। उन्होंने आखिर में लिखा है कि पवन सिंह कभी तो उनका दर्द समझें।